जब दुनिया भर में लगातार मिसाइलें ताबड़तोड़ दागी जा रही हैं जब लगातार ईरान, इजराइल, अमेरिका के हर फाइटर जेट और जहाज को उड़ा रहा है। तभी अचानक अमेरिका के चार स्टार जनरल दिल्ली पहुंचे हैं। दुनिया भर में यह खबर फैली तो हर तरफ [एक सवाल गूंज रहा है और वो सवाल है कि आखिर अमेरिका की सेना को क्या ईरान से लड़ने के लिए भारत की जरूरत पड़ रही है? दुनिया की राजनीति में ताकत हमेशा स्थाई नहीं होती। कभी जो देश खुद को पूरी दुनिया का नेता मानता था आज वही अपने पुराने समीकरण बदलने पर मजबूर दिखाई दे रहा है और इस कहानी का नया किरदार है भारत। खुद को पूरी दुनिया को अपने इशारों पर नचाने की सोच रखने वाले डोनाल्ड ट्रंप अब ईरान के साथ युद्ध में इस कदर परेशान हैं कि अब वह उस देश से मदद मांगते उतर रहे हैं जिसे वह पहले कमजोर समझते थे। वो देश जिसने पिछले कुछ सालों में अपनी जगह वहां बना ली है जहां सुपर पावर नेशन के साथ अब वो भी कंधे से कंधा मिलाकर चलता है और यह देश कोई और नहीं बल्कि खुद हमारा भारत है।
ईरान, इजराइल अमेरिका की इस लगातार चल रही जंग को भारत केवल पीछे से बैठकर नहीं देख रहा है। बता दें कि भारत ने कूटनीतिक अपने डिप्लोमेटिक रिलेशन स्ट्रांग किए और अब हालात यह है कि हर देश आकर भारत से मदद मांग रहा है। इंडोपेसिफिक में बढ़ते तनाव, चीन की आक्रामकता और बदलते युद्ध के तरीकों के बीच अब अमेरिका खुलकर कहने लगा है कि इस पूरे क्षेत्र में की स्थिरता में भारत एक फोर्स पिलर बन चुका है। लेकिन अब बड़ा सवाल यह है क्या सच में अमेरिका को अब भारत की जरूरत पड़ने लगी है। अगर पिछले कुछ दशकों की वैश्विक राजनीति को देखें तो अमेरिका खुद को दुनिया की सबसे बड़ी ताकत मानकर चलता है। उसकी राजनीति अक्सर यही रही है कि बाकी देश उसके नेतृत्व का स्वीकार करें।
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लेकिन समय बदलता है और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी हालात तेजी से बदल रहे हैं और खास करके इस समय एशिया में चीन की बढ़ती ताकत देखने को मिल रही है।
इंडोपेसिफिक में सैन्य प्रतिस्पर्धा और मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष ने दुनिया को एक नया संदेश दे दिया है कि अब वैश्विक सुरक्षा सिर्फ एक देश के भरोसे नहीं चल सकती। यही वजह है कि अब अमेरिका अपने पुराने नजरिए में बदलाव करते हुए नजर आ रहे हैं। असल में अमेरिका की नीति में भारत को लेकर हमेशा दो तरह की सोच रही है। पहली सोच कहती है कि एशिया में संतुलन बनाए रखने के लिए भारत बेहद जरूरी है। तो वहीं खासकर तब जब चीन तेजी से एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। लेकिन दूसरी सोच यह भी कहती है कि भारत कहीं इतना शक्तिशाली ना हो जाए कि वो पूरी तरह स्वतंत्र रणनीति ताकत बन जाए। इसी वजह से भारत और अमेरिका के रिश्तों में कई बार सहयोग भी दिखता और दूरी भी दिखती नजर आई।
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डोनाल्ड ट्रंप की राजनीति हमेशा से यह रही है अमेरिका फर्स्ट नीति पर और कई बार यह संकेत मिला है कि अमेरिका किसी पर निर्भर नहीं। उस दौर में ऐसा माहौल भी बन जाता है जब जैसे भारत को अमेरिका की जरूरत है और ना कि अमेरिका को भारत की। लेकिन बदलते हालात ने यह धारणा भी बदलनी शुरू कर दी है। आधुनिक युद्ध का स्वरूप अब पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है। आज युद्ध सिर्फ टैंक, युद्धपोत और फाइटर जेट से नहीं जीते जा रहे हैं। बल्कि ड्रोन टेक्नोलॉजी, लंबी दूरी की मिसाइलें, साइबर हमले और अंडर वाटर ड्रोन जैसे नए हथियार युद्ध की दिशा बदल रहे हैं। मिडिल ईस्ट के हालिया संघर्षों ने यह भी दिखा दिया है कि छोटे लेकिन सटीक हथियार, बड़े सैन्य सिस्टम को चुनौती दे सकते हैं।
