सोमवार को बिहार में महागठबंधन को बड़ा झटका लगा, जब राज्यसभा चुनाव में उसके चार विधायकों ने मतदान नहीं किया। चुनाव शाम 4 बजे समाप्त हुए, जिससे पांचवीं सीट पर विपक्षी गठबंधन की संभावनाओं पर संकट के बादल छा गए। मतदान न करने वालों में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के विधायक फैसल रहमान और कांग्रेस के तीन विधायक मनोहर प्रसाद, सुरेंद्र कुशवाहा और मनोज बिस्वास शामिल थे।
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राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 में निर्णायक जीत हासिल की और सुनियोजित चुनावी रणनीति के दम पर सभी पांच सीटें जीत लीं। जीतने वाले प्रमुख नेताओं में जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार शामिल हैं, जिन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा के बाद राज्यसभा में प्रवेश किया है। एनडीए के अन्य विजयी उम्मीदवारों में भारतीय जनता पार्टी के नितिन नबीन, केंद्रीय मंत्री राम नाथ ठाकुर, भाजपा नेता शिवेश कुमार और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं।
हालांकि, बड़ा झटका तेजस्वी यादव को लगा जो महागठबंधन के विधायकों को एकजुट नहीं रख पाए। इस बीच राज्यसभा चुनाव में मतदान न करने पर कांग्रेस नेता मनोज बिस्वास ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि आपने देखा ही होगा कि हमारा शीर्ष नेतृत्व, हमारे प्रदेश अध्यक्ष, इस चुनाव में शामिल नहीं थे। हमें मनोनीत उम्मीदवार पसंद नहीं आया। हम अल्पसंख्यक समुदाय के वोटों से विधायक बनते हैं। हमें उम्मीदवार पसंद नहीं आया, इसीलिए हमने अपना वोट नहीं डाला।
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तीन कांग्रेस विधायकों की अनुपस्थिति से आरजेडी में आक्रोश फैल गया है। पार्टी के नेता निजी तौर पर कांग्रेस पर अपने भीतर असंतोष को नियंत्रित करने में विफल रहने का आरोप लगा रहे हैं। इस घटना ने दोनों सहयोगी दलों के बीच समन्वय की पिछली विफलताओं की याद भी ताजा कर दी है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाते हुए कहा कि गठबंधन के खिलाफ मतदान करने वाले या मतदान से अनुपस्थित रहने वाले विधायकों को प्रलोभन दिए गए थे। उन्होंने कहा कि हम उनसे लड़ने के लिए तैयार हैं और हमारा संघर्ष जारी रहेगा।
