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Author: Siddhbhoomi Team
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
आजकल की भागदौड़ भरी लाइफ में लोग अपने स्वास्थ्य का सही तरीके से ख्याल नहीं रख पा रहे हैं। ऐसे में लोगों को सेहत संबंधी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खराब खानपान और अनहेल्दी लाइफस्टाइल की वजह से बीपी की समस्या बढ़ गई है। हाई बीपी एक गंभीर बीमारी है और कई बार इसके लक्षण भी नहीं पता चलते हैं। लेकिन अगर समय रहते इसको कंट्रोल नहीं किया गया, तो कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।आज के समय में सिर्फ बड़े लोगों को ही नहीं बल्कि युवाओं को भी यह अपनी चपेट में…
वैश्विक स्तर पर आज की आर्थिक परिस्थितियों के बीच भारत का प्राचीन आर्थिक दर्शन संभवत: आशा की किरण के रूप में दिखाई पड़ता है। अमेरिका जैसा शक्तिशाली देश, अपने अहंकार के मद में, जब अपने पड़ौसी देशों एवं हितचिंतक देशों के साथ ही अन्य अविकसित एवं विकासशील देशों को भी नहीं बक्श रहा है एवं इन देशों से अमेरिका को होने विभिन्न उत्पादों के निर्यात पर टैरिफ का डंडा चला रहा है, तब भारतीय आर्थिक दर्शन की “वसुधैव कुटुंबकम”, “सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय” एवं “सर्वे भवंतु सुखिन सर्वे संतु निरामया:” जैसी नीतियों की याद सहज रूप से ही आ जाती…
अब नहीं चाहिए DSLR, सिर्फ टेक्स्ट से बनेगा प्रोफेशनल लुक!1. अब कैमरा नहीं, बस कमांड चाहिए!पहले पोर्ट्रेट फोटोग्राफी के लिए प्रोफेशनल कैमरा, महंगा लाइटिंग सेटअप और फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर की जरूरत होती थी। लेकिन अब ChatGPT के AI-पावर्ड टूल्स के साथ सिर्फ एक टेक्स्ट प्रॉम्प्ट देकर आप स्टूडियो-क्वालिटी पोर्ट्रेट बना सकते हैं। ये टेक्नोलॉजी इतनी उन्नत हो गई है कि आपकी लिखी हर डिटेल को समझकर उसका सटीक विजुअल आउटपुट बना सकती है। मतलब अब आपको फोटोग्राफर या फोटोशॉप एक्सपर्ट बनने की जरूरत नहीं – बस सही तरीके से निर्देश देने की जरूरत है।2. सही प्रॉम्प्ट देना है असली कलाAI…
टीसीएस ने हाल ही में अपने वैश्विक कार्यबल में लगभग 2% (करीब 12,000–12,261) कर्मचारी निकालने की घोषणा की है, जो मध्य और वरिष्ठ स्तर के कर्मचारियों को अधिक प्रभावित करेगी। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में इसे एआई चालित तकनीकी बदलावों का नतीजा बताया जा रहा है, लेकिन कंपनी के सीईओ ने स्पष्ट किया है कि यह मूलतः स्किल मिसमैच (skill mismatch) की वजह से किया जा रहा है, न कि सीधे AI द्वारा ऑटोमेशन की वजह से। हम आपको बता दें कि टीसीएस के CEO ने कहा है कि यह AI की वजह से नहीं है बल्कि यह कर्मचारी की स्किल्स…
डेंगू बुखार एक मच्छर जनित वायरल संक्रमण है जो दुनिया भर के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में आम है। यह डेंगू वायरस के कारण होता है, जो संक्रमित एडीज़ मच्छरों, मुख्यतः एडीज़ एजिप्टी, के काटने से मनुष्यों में फैलता है। डेंगू का प्रभावी ढंग से प्रबंधन और डेंगू रक्तस्रावी बुखार या डेंगू शॉक सिंड्रोम जैसी गंभीर जटिलताओं को रोकने के लिए शीघ्र निदान और सहायक देखभाल अत्यंत महत्वपूर्ण है।इसे भी पढ़ें: दिल्लीवालों की सेहत के लिए MCD का बड़ा कदम, डेंगू-मलेरिया से निपटने को 3 अस्पताल अलर्टडेंगू बुखार आमतौर पर अचानक तेज़ बुखार के साथ शुरू होता है। इसके बाद…
उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित सुप्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में गत रविवार को सुबह आरती के समय अचानक बेकाबू हुई भीड़ से मची भगदड़ से हुए हादसे में जहां 8 लोगों की जान चली गई, वहीं 26 लोग घायल बताए जा रहे हैं। इससे भक्त और भगवान के व्याकुल अन्तर्सम्बन्धों के साथ-साथ मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सुलगते हुए सवाल उठ हैं। ऐसा इसलिए कि अपने आपमें न तो यह पहली घटना है और न ही अंतिम! बावजूद इसके, बेगुनाहों की मौतों का यह सिलसिला कब थमेगा, विश्वास पूर्वक कुछ कहा नहीं जा सकता है, क्योंकि ब्रेक…
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफा देने, मुंबई सीरियल ट्रेन ब्लास्ट मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से सभी 12 आरोपियों के बरी होने और संसद के हंगामेदार मानसून सत्र पर इस हफ्ते पंजाबी अखबारों ने अपनी राय प्रमुखता से रखी है।उपराष्ट्रपति के इस्तीफे पर जालंधर से प्रकाशित ‘पंजाबी जागरण’ लिखता है- उपराष्ट्रपति के अचानक इस्तीफे से उठ रहे कई सवाल सही हैं और उनका जवाब मिलना चाहिए, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि जवाब मिलेंगे या नहीं। उनका इस्तीफा इसलिए भी अधिक आश्चर्यजनक है, क्योंकि दिन में वे सदन में सक्रिय थे और रात में उन्होंने यह कहते हुए इस्तीफा दे…
पेड़-पौधों की अनेक प्रजातियों के अलावा बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन और मौसम चक्र में आते बदलाव के कारण जीव-जंतुओं की अनेक प्रजातियों के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इन प्रजातियों के लुप्त होने का सीधा असर समस्त मानव सभ्यता पर पड़ना अवश्वम्भावी है। प्रदूषित हो रहे पर्यावरण के आज जो भयावह खतरे हमारे सामने आ रहे हैं, उनसे शायद ही कोई अनभिज्ञ हो और हमें यह स्वीकार करने से भी गुरेज नहीं करना चाहिए कि इस तरह की समस्याओं के लिए कहीं न कहीं जिम्मेदार हम स्वयं भी हैं। सबसे पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि प्रकृति…
अधिक काम करने के बाद थकान होना लाजमी है। जब थकान होती है, तो कुछ घंटों की नींद और आराम आपको फ्रेश कर देती है। लेकिन अगर आप ज्यादा काम नहीं करते हैं और इसके बाद भी हर समय थकान लगती है। कोई काम करने का दिल नहीं करता है, तो आप क्रोनिक फटीग सिंड्रोम से पीड़ित हो सकते हैं। यह थकान कोई मामूली थकान नहीं होती, जो ज्यादा काम करने, तनाव या फिर देर रात तक जागने से नहीं होती है। बल्कि यह बीमारी वाली थकावट होती है, जोकि कई महीनों तक बनी रहती है। यह थकान आराम करने…
अक्सर हम सभी अपने आउटफिट के साथ अलग-अलग डिजाइन वाले हैंडबैग कैरी करते हैं। इन हैंडबैग में फोन या अन्य जरूरी सामान लेकर जाते हैं। लेकिन आउटफिट के साथ हर हैंडबैग अच्छा नहीं लगता है। ऐसे में हम हैंडबैग को चेंज करने के बारे में सोचते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसे हैंडबैग के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको आप बताए गए डिजाइन के हिसाब से चूज कर सकते हैं। इससे आपको आउटफिट के साथ हैंडबैग को कैरी करने में दिक्कत भी नहीं होगी।हैंडबैग को आउटफिट के साथ ऐसे करें मैचअगर आप…
सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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