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Author: Siddhbhoomi Team
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
हाल ही में भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) केंद्र में सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है। इसके अंतरराष्ट्रीय मायने बेहद अहम हैं, क्योंकि इसका फायदा दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मिलेगा। इस प्रकार भारत और ब्रिटेन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से आने वाले वर्षों में दूरगामी वैश्विक असर भी देखने को मिलेंगे।यह कहना गलत नहीं होगा कि अमेरिका प्रेरित भूमंडलीकरण और निजीकरण की नीतियों पर आधारित मुक्त वैश्विक अर्थव्यवस्था के दौरान, पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से कारोबारी संरक्षणवाद बढ़ा है, उसमें ऐसे व्यापार समझौतों की…
जब भी मानसून शुरू होता है, तो मार्केट में जामुन भी आने लगते हैं। गहरा बैंगनी रंग, खट्टा-मीठा स्वाद और हल्का सा कसैलापन लिए जामुन को नमक के साथ खाने में काफी मजा आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जामुन को स्टोर करके उससे कई सारी रेसिपीज भी बनती हैं। कुछ लोग जामुन का जैम, खट्टा-मीठा जूस और चटनी आदि ब्रेड से लेकर पराठे के साथ अच्छा लगता है। हालांकि कई लोग जामुन की चटनी बनाने में संकोच करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जामुन की चटनी खाने के स्वाद को दोगुना बढ़ा सकती है। ऐसे में…
एक बात साफ हो जानी चाहिए कि तकनीक मात्र उपकरण बनें तो यह मानवता के हित में नहीं हो सकती। ऐसे में तकनीक को जनकल्याण का माध्यम बनाना होगा। डिजिटल युग में बहुत कुछ बदला है। हमारे सोच का तरीका बदला है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में आज सामान्य मानव मन से भी अधिक तेजी से तकनीक काम करने लगी है। तकनीक ने इतना विकास कर लिया है कि अब मशीनें सोचने लगी है। हमारे चिंतन और मनन को प्रभावित करने लगी है। इसमें कोई दो राय नहीं कि तकनीक ने जीवन के सभी क्षेत्रों में प्रवेश करने के साथ…
पारंपरिक परिधानों में गोटा पट्टी का काम एक खास चमक और खूबसूरती जोड़ता है। जिस कारण महिलाओं के बीच गोटा वर्क वाले आउटफिट्स की जबरदस्त डिमांड रहती है। वहीं मार्केट में आपको गोटा पट्टी वर्क वाली साड़ियों की भरपूर वेराइटी देखने को मिल जाएगी। लेकिन गोटा पट्टी का यह वर्क अब सिर्फ साड़ियों तक ही सीमित नहीं है। बल्कि आजकल गोटा पट्टी ब्लाउज भी काफी ट्रेंड में हैं। यह ब्लाउज काफी आकर्षक और मनभावन होते हैं कि इनको एक ही नजर में खरीदने का मन करता है।लेकिन गोटा वर्क ब्लाउज को किस तरह की साड़ी के साथ पहनना चाहिए। यह…
‘हर छठा व्यक्ति अकेला है’-यह निष्कर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ताज़ा रिपोर्ट का है, जिसने पूरी दुनिया को चिन्ता में डाला है एवं सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर हम कैसी समाज-संरचना कर रहे हैं, जो इंसान को अकेला बना रही है। निश्चित ही बढ़ता अकेलापन कोई साधारण सामाजिक, पारिवारिक एवं व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक ऐसा वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है, जो व्यक्तियों, समाजों, और व्यावसायिक संस्थानों को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। दुनिया के करोड़ों लोग टूटे रिश्तों व संवादहीनता की स्थितियों में नितांत खामोशी का जीवन जी रहे हैं।…
हमारे शरीर में जब भी किसी तरह की गड़बड़ी की शुरूआत होती है, तो कोई भी अंग ठीक से काम नहीं करता है। या फिर किसी भी न्यूट्रिशन और विटामिन की कमी होने लगती है। तो शरीर में इसके संकेत साफ नजर आते हैं। हालांकि अगर इन संकेतों को शुरूआत में ही समझ लिया जाए, तो आने वाले समय में बड़ी मुश्किल से बचा जा सकता है। पेट में गैस बनना, पाचन का कमजोर होना या ब्लोटिंग महसूस होना, नींद आने में मुश्किल, हमेशा कमजोरी, भूख न लगना, हाथ-पैरों में दर्द रहना या थकान महसूस होना आदि ऐसे लक्षण हैं,…
पहलगाम में जब आतंकी हमले में निर्दोषों का रक्त बहा, आहें एवं चीखें गूंजी, जिसने न केवल देश एवं दुनिया को झकझोर दिया था, बल्कि यह संकेत भी दे दिया कि आतंकवाद की जड़ें अब भी जीवित हैं और उन्हें राजनीतिक, वैचारिक और सीमा-पार समर्थन प्राप्त है। लेकिन इस बार एक बड़ा परिवर्तनकारी एवं प्रासंगिक कदम अमेरिका की ओर से सामने आया है, जिसने इस हमले की जिम्मेदारी लेने वाले पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की मुखौटा इकाई द रेजिस्टेंट फ्रंट (टीआरएफ) को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित कर दिया, इस तरह टीआरएफ की पहचान और आतंक के विरुद्ध वैश्विक एकजुटता…
पवित्र श्रावण मास चल रहा है, इस मास में देश के विभिन्न हिस्सों में शिवभक्त देवाधिदेव भगवान महादेव के ऊपर पवित्र नदियों का जल चढ़ाने के लिए सदियों से कांवड़ लेकर आते हैं। हालांकि कुछ लोगों के मन में यह प्रश्न उठता रहता है कि आखिर यह कांवड़ यात्रा क्या है, उन्होंने बेहद सरल शब्दों में यह समझना चाहिए कि कांवड़ यात्रा सनातन धर्मियों की केवल आस्था का ही नहीं बल्कि हमारे प्यारे देश भारत की समृद्धशाली धर्म-सांस्कृतिक, प्राचीन परंपरा और विरासत का एक अद्भुत प्रतीक है। वैसे भी सनातन धर्म-संस्कृति में पवित्र श्रावण मास की शिवरात्रि को देवाधिदेव भगवान…
धूल-मिट्टी और प्रदूषण का असर सिर्फ हमारी सेहत पर ही नहीं बल्कि स्किन का ग्लो भी कम हो जाता है। इस कारण स्किन संबंधी समस्या शुरू हो जाती हैं। ऐसे में महिलाएं स्किन का ग्लो वापस पाने के लिए तमाम ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल बंद करते ही यह समस्याएं फिर शुरू हो जाती हैं और ज्यादा खर्च भी होता है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि पपीते के पत्ते का इस्तेमाल करके आप स्किन संबंधी समस्याओं को कम करने के साथ स्किन को ग्लोइंग भी बना सकती हैं।आप पपीते के पत्ते का इस्तेमाल…
भारत में पर्यटन उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए कई वर्षों से लगातार प्रयास किए जाते रहे हैं, परंतु इस क्षेत्र में वृद्धि दर कम ही रही है। क्योंकि, भारत में पर्यटन का दायरा केवल ताजमहल, कश्मीर एवं गोवा आदि स्थलों तक ही सीमित रहा है। परंतु, हाल ही के वर्षों में धार्मिक क्षेत्रों यथा, अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, उज्जैन, हरिद्वार, उत्तराखंड में चार धाम (केदारधाम, बद्रीधाम, गंगोत्री एवं यमुनोत्री), माता वैष्णोदेवी एवं दक्षिण भारत स्थित विभिन्न मंदिरों सहित, बौद्ध धर्म, जैन धर्म एवं सिक्ख धर्म के कई पूजा स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं का विस्तार कर इन्हें आपस में जोड़कर पर्यटन…
सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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