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Author: Siddhbhoomi Team
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक एवं बालगोकुलम संस्था के संस्थापक एम. ए. कृष्णन का मंगलवार को यहां एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 97 वर्ष के थे। संघ के सूत्रों ने बताया कि स्वयंसेवकों के बीच एम. ए. सर के नाम से मशहूर कृष्णन ने यहां अमृता अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली।भगवान कृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले जन्माष्टमी समारोह के दौरान बालगोकुलम पूरे केरलम में बच्चों के लिए शोभा यात्राएं और कई तरह के कार्यक्रम आयोजित करता रहा है। राज्य में जन्माष्टमी के मौके पर रंग-बिरंगी शोभायात्राएं निकाली जाती हैं…
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता सरदार होसैन मोहेब्बी ने मंगलवार को कहा कि इस इलाके में मौजूद मिलिट्री बेस सुरक्षा देने में नाकाम रहे हैं और इसके बजाय अस्थिरता का कारण बन गए हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि अमेरिका की आर्थिक पाबंदियों के बावजूद ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध बनाए रखेगा। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (IRNA) के मुताबिक, मोहेब्बी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बातें कहीं। पड़ोसी देशों को संबोधित करते हुए मोहेब्बी ने कहा कि इस इलाके की सरकारों और लोगों को यह समझ आ गया…
बदलते दौर में तकनीक से लेकर हर क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहा है। ऐसे में अगर समय रहते कौशल और ज्ञान नहीं सीख पाए, तो हम जिंदगी की दौड़ में काफी पीछे रह जाएंगे। अक्सर आपने देखा होगा कि बहुत मेहनत करने के बाद भी कई लोगों को सब कुछ नहीं मिल पाता है। जिसके वह असल में हकदार होते हैं। इसलिए जीवन में सफल होने और सपनों को पूरा करने के लिए सिर्फ कड़ी मेहनत ही नहीं बल्कि सही दिशा में काम करना भी बेहद जरूरी है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपके साथ…
भारतीय शूटर नीरू ढांडा ने एशियाई खेलों में महिलाओं के व्यक्तिगत ट्रैप इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रच दिया। 26 साल की नीरू ने यह उपलब्धि 29 सितंबर को जापान के आइची-नागोया में हासिल की और इन खेलों में भारत के लिए पांचवां गोल्ड मेडल जीता। ढांडा ने अपनी जीत अपनी मां को समर्पित की, जो उनकी कोच भी हैं। इवेंट के बाद उन्होंने कहा कि मैं यह मेडल अपनी मां, अपनी कोच और पूरे भारत देश को समर्पित करती हूं। मैं यह मेडल अपनी मां और अपनी कोच के गले में पहनाना चाहती…
दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के तहत एक संस्था का पंजीकरण कराने में मदद करने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में गृह मंत्रालय के दो अधिकारियों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। गृह मंत्रालय के अनुसार, दो अधिकारियों- एक वरिष्ठ लेखाकार और एक लेखाकार- को 28 सितंबर को दिल्ली में पकड़ा गया।मंत्रालय ने कहा कि उनमें से एक वर्तमान में गृह मंत्रालय के विदेशी प्रभाग में तैनात है, जबकि दूसरा वर्तमान में वेतन एवं लेखा कार्यालय में तैनात है और वह इससे…
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की देखरेख में, गुजरात सरकार पूरे राज्य में “अपनी आंगनवाड़ी, अपनी जिम्मेदारी” की भावना के साथ ‘पोषण माह-2026’ मना रही है। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री मनीषाबेन वकील ने राज्यव्यापी समारोहों की शुरुआत की। पोषण को जन-आंदोलन बनाने के मकसद से चलाए जा रहे इस अभियान में संबंधित विभागों, स्थानीय निकायों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य कर्मियों, स्वयं-सहायता समूहों, अभिभावकों और आम लोगों को शामिल करते हुए कई तरह की गतिविधियां की जा रही हैं। 27 सितंबर, 2026 तक, गुजरात में पोषण से जुड़ी 2.43 करोड़ से ज़्यादा गतिविधियां दर्ज की गई हैं, जिससे राज्य देश भर में…
View this post on InstagramA post shared by Ekam Bawa (@ekambawaofficial)इसे भी पढ़ें: Bigg Boss 20 में Uditi Singh ने पुराने रिलेशनशिप पर तोड़ी चुप्पी, ब्रेकअप को बताया टर्निंग पॉइंटएकम बावा बोले- अभी भी लीगल बाप हूं मैंएकम बावा ने अपने बयान में तलाक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मैं इतने वक्त से पीछे लगा था कि मुझे तलाक दे दो, लेकिन तलाक मुझे आज भी नहीं मिला है। क्यों? अभी भी लीगल बाप हूं मैं।”रीति को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “रीति तिवारी जी, आपकी मां ने मेरे साथ शादी की है, आप बोल रहे हो कि मैं…
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई के छात्र साहिल वाकोडे के माता-पिता ने अपनी भूख हड़ताल के दूसरे दिन मंगलवार को उनके बेटे की मौत के लिए कथित तौर पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। परिवार के वकील ने कहा कि सरकार की ओर से अब तक कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं आया है। दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में साहिल के माता-पिता रविंद्र और सोनाली वाकोडे धरने पर बैठे हैं।महाराष्ट्र के यवतमाल के रहने वाले दोनों अपने बेटे की तस्वीर हाथ में लिए हुए थे और उसके लिए न्याय की मांग कर रहे थे। कुछ अन्य लोग…
Cancelling plans or saying no to things you don’t wish to do is absolutely normal, and you have every right to make that choice. However, doing it too often can make you seem unreliable and may affect your relationships over time. While there is no one-size-fits-all rule for cancelling plans, how and when you do it can make a difference. In this edition of ‘The Social Rules Nobody Taught Us’, HT Lifestyle spoke to Arouba Kabir, emotional and mental health expert and founder of Enso Wellness, to decode when it is okay to cancel plans, how to say no without…
क्या मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से देश की चुनावी व्यवस्था बदल जाएगी? क्या उनके पद से हटते ही मतदाता सूची की तमाम शिकायतें खत्म हो जाएंगी, क्या चुनाव में धनबल और बाहुबल का इस्तेमाल रुक जाएगा, क्या राजनीति के अपराधीकरण पर लगाम लग जाएगी और क्या लोकतंत्र पहले से ज्यादा पारदर्शी हो जाएगा? यह सब सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज हो रही है, उनके खिलाफ महाभियोग की तैयारी की बात सामने आ रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या…
सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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