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सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
Hindi NewsCareerSanjiv Jain North Korea Ambassador Appointment | India Indonesia Brahmos Deal | Girish Bhardwaj Deat12 मिनट पहलेकॉपी लिंक1. भारत इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस डील हुई7 जुलाई को भारत-इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस डील हुई। इसके साथ ही 20 और समझौते हुए।ब्रह्मोस को लेकर दोनों देशों के बीच पिछले 4 महीने से बातचीत चल रही थी।भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की एडिशनल यूनिट देगा।इसी के साथ फिलीपींस, वियतनाम के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है।भारत-इंडोनेशिया समझौते के तहत भारत, इंडोनेशिया को ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल होने वाला भारतीय ‘अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइल भी बेचेगा।भारत इंडोनेशिया के लिए इलेक्ट्रॉनिक…
श्रीलंका की राजधानी कोलंबो के करीब स्थित नेगोम्बो जेल में हुई हिंसक झड़प ने पूरे देश को झकझोर दिया हैं। जेल के भीतर दो गुटों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते बड़े संघर्ष में बदल गया, जिसमें कम से कम 26 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मृतकों में जेल के कर्मचारी और कैदी दोनों शामिल हैं।मौजूद जानकारी के अनुसार यह हिंसा रविवार को शुरू हुई थी और सोमवार तक जारी रही। हालात बिगड़ने के बाद सुरक्षा बलों को जेल परिसर में अतिरिक्त तैनाती करनी पड़ी। कई घंटों की कोशिशों के…
ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान पूरे देश में शोक और भावनाओं का माहौल देखने को मिला हैं। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में लाखों लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए और अमेरिका तथा इजरायल के खिलाफ नारे लगाए। इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने खामेनेई की शहादत को इस्लामी इतिहास की एक बड़ी घटना बताते हुए दावा किया कि आने वाले वर्षों में उन्हें दूसरे इमाम हुसैन के रूप में याद किया जाएगा हैं।मौजूद जानकारी के अनुसार ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अंतिम संस्कार के दौरान विदेशी…
भारतीय क्रिकेट टीम इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में मिली हार के बाद भारत लगातार तीसरा पूरा हुआ टी20 मुकाबला हार चुका हैं। इससे पहले टीम को आयरलैंड के खिलाफ भी हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में अब भारतीय टीम पर श्रृंखला बचाने का दबाव बढ़ गया है।भारत दो बार लगातार टी20 विश्व कप जीत चुका हैं, लेकिन कप्तान के रूप में टीम को खिताब दिलाने वाले सूर्यकुमार यादव खराब बल्लेबाजी के कारण अपनी कप्तानी और टीम में जगह दोनों गंवा चुके हैं। दूसरी ओर आईपीएल में शानदार प्रदर्शन…
महिला टी20 विश्व कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया की कप्तान सोफी मोलिन्यूक्स ने कुछ इस वक्त चर्चा में हैं। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले उनकी फिटनेस और टीम में जगह को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही थीं, लेकिन उन्होंने मैदान पर अपने खेल और नेतृत्व से सभी आलोचनाओं का जवाब दिया है।बता दें कि 28 वर्षीय सोफी मोलिन्यूक्स को एलिसा हीली के बाद कप्तानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। शुरुआत में कई क्रिकेट विशेषज्ञों ने इस फैसले पर सवाल उठाए थे क्योंकि मोलिन्यूक्स लंबे समय से पीठ की चोट से जूझ रही थीं। इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया के चयनकर्ताओं ने उन पर…
फीफा विश्व कप के नॉकआउट चरण में मैदान पर मुकाबलों के साथ-साथ मैदान के बाहर भी विवाद लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस बार चर्चा का केंद्र अमेरिका के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन और उनके निलंबन से जुड़ा फैसला बन गया है। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और प्रसिद्ध फुटबॉल विश्लेषक गैरी लाइनकर ने अमेरिका की टीम प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा है कि निलंबन हटने के बावजूद बालोगुन को बेल्जियम के खिलाफ मुकाबले में नहीं खिलाया जाना चाहिए था।बता दें कि फोलारिन बालोगुन को बोस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ प्री-क्वार्टर मुकाबले में लाल कार्ड मिलने के बाद एक मैच के…
फीफा विश्व कप में फ्रांस से हार के बाद पैराग्वे की राजनीति और फुटबॉल जगत में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे ने पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्टे अमारिला की नस्लवादी टिप्पणियों की सार्वजनिक रूप से कड़ी आलोचना की है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमारिला ने फ्रांस और पैराग्वे के बीच खेले गए प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले के बाद सामाजिक माध्यम पर एमबाप्पे को लेकर कई विवादित पोस्ट किए।बता दें कि शनिवार को खेले गए इस मुकाबले में फ्रांस ने पैराग्वे को 1-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी। मैच का एकमात्र…
Busy schedules often leave working professionals with little time for exercise during the week. This leads to many packing their weekends with intense fitness goals.Working out only on the weekends can hurt in the long run. (Pexel)Also Read | Can excessive sweating during summer increase your risk of UTIs? Urologist Dr Abhinav Jain explainsWhile staying active is beneficial, suddenly pushing the body through intense gym workouts after days of inactivity places excessive stress on ageing joints, Dr Harish Talreja, consultant at the department of orthopaedics, Manipal Hospital, Jaipur, shared with Ht Lifestyle.“This pattern of living a ‘weekend warrior’ lifestyle increases…
Desk jobs include long hours of sitting in one place in front of a laptop, barely moving, except between meetings, PowerPoints, and deadlines. The resultant repercussions are extensive, silently affecting your health. So, to counter this, a common doubt arises: how much sitting is too much, and how often should one move? ALSO READ: Orthopaedic doctor shares 6 common workout mistakes you make which increase joint injury riskSitting for long hours is not recommended. (Picture credit: Freepik)Dr Naveen P. Reddy, senior consultant orthopaedic surgeon at Gleneagles Hospital, shared with HT Lifestyle how prolonged sitting affects the body and what officegoers…
शेयर बाजार में मंगलवार का कारोबारी सत्र स्विगी के निवेशकों के लिए राहत भरा रहा। कंपनी के शेयरों में करीब 7 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। इस बढ़त की बड़ी वजह कंपनी की ओर से दी गई वह जानकारी रही, जिसमें बताया गया कि उसकी घरेलू हिस्सेदारी अब 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है। मौजूद जानकारी के अनुसार यह बदलाव कंपनी को भारतीय स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनी बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव तक पहुंचाता है।बता दें कि कारोबार के दौरान स्विगी का शेयर लगभग 6.7 प्रतिशत चढ़कर 266 रुपये पर बंद हुआ। यह उस…
सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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