© 2025 Siddhbhoomi.com. Designed with ❤️ by Abiral Pandey.
Author: Siddhbhoomi Team
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
पश्चिम बंगाल इन दिनों धार्मिक और राजनीतिक उफान का केंद्र बना हुआ है। बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर मुस्लिम संगठनों और राजनीतिक समूहों की सक्रियता के बीच हिन्दू धर्मगुरुओं एवं संगठनों की मोर्चाबंदी ने क्या हिंदू क्रांति का शंखनाद किया है? क्या यह आगामी विधानसभा चुनावों में हिंदू वोटों को एकत्र करने का नया एजेंडा है, या पश्चिम बंगाल में लगातार हिन्दुओं पर हो रहे हमलों, उनको कुचलने की कुचेष्टाओं एवं मुस्लिम तुष्टीकरण का माकुल जबाव है। बाबा बागेश्वर धाम-धीरेन्द्र शास्त्री सहित अनेक हिंदू धर्मगुरुओं के प्रवचनीय हस्तक्षेप, लाखों लोगों द्वारा सामूहिक गीता पाठ और संतों की हुंकार से एक…
दो साल के लंबे इंतज़ार के बाद, रणवीर सिंह, जो इस दिसंबर में फिल्म इंडस्ट्री में 15 साल पूरे कर रहे हैं, आदित्य धर की स्पाई-एक्शन फिल्म धुरंधर के साथ बड़े पर्दे पर शानदार वापसी कर रहे हैं। फिल्म के ट्रेलर और प्रोमो ने पहले ही सोशल मीडिया पर धूम मचा दी है, जिससे फैंस के बीच काफी चर्चा हो रही है। संजय दत्त, अक्षय खन्ना, आर माधवन, अर्जुन रामपाल, सारा अर्जुन और राकेश बेदी जैसे कलाकारों से सजी इस फिल्म के मेकर्स ने जानबूझकर कहानी को छिपाकर रखा है, ताकि दर्शक थिएटर में पहली बार कहानी का अनुभव कर…
2025 साल अपने अंत की ओर बढ़ रहा है, और यह साल भारतीय सिनेमा के लिए देशभक्ति के जज्बे के साथ याद रहेगा। आदित्य धर की धुरंधर इस साल के अंत को एक गर्व और रोमांच के अनुभव से भर देती है। फिल्म अब सिनेमाघरों में है और हर सीन आपको देशभक्ति की भावना के साथ रोमांच और थ्रिल का अहसास कराता है।धुरंधर की कहानी केवल जासूसी और एक्शन तक सीमित नहीं है। यह फिल्म दर्शाती है कि कैसे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने कठिन और जोखिम भरे मिशनों में देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाई। कहानी…
भारत का लोकतंत्र आज जिस निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, वहां उसकी विश्वसनीयता और मजबूती का सवाल पहले से कहीं अधिक गंभीर हो गया है। चुनावों की पारदर्शिता, मतदाता सूची की शुचिता और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से मतदाता पहचान की सत्यता को बनाए रखना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को सुरक्षित रखने का मूल तत्व है। विशेष गहन पुनरीक्षण अर्थात एसआईआर इसी उद्देश्य से प्रारंभ की गई वह अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से मतदाता सूची में मौजूद संदिग्ध, दोहरे या अवैध प्रविष्टियों की पहचान और सत्यापन किया जा सके। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस कार्य…
केंद्र सरकार में पिछले लगभग 12 वर्षों से सत्तारूढ़ नरेंद्र मोदी सरकार की सुनियोजित आर्थिक रणनीति का सकारात्मक परिणाम जब जीडीपी के मौजूदा उछाल के रूप में सामने आया तो देश-दुनिया के आर्थिक पंडित भी चौंक गए, क्योंकि यह उनकी आकलित उम्मीदों से भी ज्यादा है। यह बात अलग है कि मोदी सरकार का लक्ष्य 4.0 सरकार बनने से पहले ही भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार को 5 ट्रिलियन प्रदान करना है, जिस दिशा में वह मजबूती से सधे पांव रखकर अग्रसर है। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ कि भारत की वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2025) में जीडीपी…
कर्नाटक में सत्ता के लिए मचा संग्राम कांग्रेस की जगहसाई का कारण बन गया है। मुख्यमंत्री पद के लिए चल रही मारामारी से जाहिर है कि कांग्रेस का अनुशासन से कोई वास्ता नहीं रह गया है। सत्ता की कमजोरी कांग्रेस के बिखराव का कारण बनी हुई है। शिवकुमार धड़ा 2023 में सरकार बनाने के समय तय फॉर्म्युला को लागू करने की मांग कर रहा है। यह निश्चित है कि यदि शिवकुमार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री का पद नहीं मिला तो पार्टी में विद्रोह के हालात पैदा होंगे। पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस में सत्ता को लेकर घमासान मचा हुआ…
पाकिस्तान की भारत-निंदा की आदत कोई नई नहीं है; यह उसकी कूटनीति एवं संकीर्ण सोच का स्थायी चरित्र बन चुकी है। ऐसा शायद ही कोई अवसर हो जब भारत की बढ़ती शक्ति, बढ़ती साख और सांस्कृतिक उन्नयन का प्रभावी दृश्य उभरे और पाकिस्तान उसमें संकुचित मानसिकता से भरी त्रासद टिप्पणियां न करे, विरोध का वातावरण न बनाए या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अनर्गल आरोपों का पुलिंदा न खोले। हाल ही में अयोध्याजी में श्रीराम मंदिर पर हुए ध्वजारोहण समारोह को लेकर उसकी बौखलाहट इसी मानसिक दिवालियापन का ताज़ा उदाहरण है। भारतीयता के स्वाभाविक सद्भाव में सेंध लगाने का कोई अवसर पाकिस्तान…
धनुष और कृति सेनन की जोड़ी सच में एक यूनिक कास्टिंग चॉइस है। लेकिन क्या यह एक बहुत लंबी फिल्म को बनाए रखने के लिए काफी है? फर्स्ट हाफ में दिखाया गया है कि कैसे दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों का एक एंग्री यंग मैन शंकर (धनुष) साउथ दिल्ली की एक लड़की मुक्ति (कृति सेनन) से प्यार करने लगता है, जिसके पिता एक IAS ऑफिसर हैं। फिल्ममेकर्स से मेरी बस यही रिक्वेस्ट है कि हैरेसमेंट को नॉर्मल बनाना और हिंसा को ग्लोरीफाई करना बंद करें। पहली नज़र में, यह इमोशन और थ्रिल से बुनी हुई एक लव स्टोरी लगती है। लेकिन जैसे…
भले ही भारतीय संविधान ने देश-काल-पात्र के परिप्रेक्ष्य में हम भारतीयों को बहुत कुछ दिया है, फिर भी इससे और अधिक लेने की अपेक्षा रखना लाजिमी है। इस दिशा में सुलगता हुआ सवाल यही है कि आखिर सिस्टम पर विगत लगभग आठ दशकों से कुंडली मार कर बैठने वाले लोगों या उनके उत्तराधिकारियों-परिजनों ने, जिसमें संविधान की आरक्षण व्यवस्था द्वारा पैदा किये हुए राजनीतिक, प्रशासनिक, न्यायिक और मीडियागत के ‘अभिजात्य वर्गों’ के विधिक शोषण से उनके ही वर्ग या समाज के संघर्षरत अन्य लोगों को आखिर मुक्ति कब तक मिलेगी!इतना ही नहीं, नियम कानून द्वारा इस देश में असली समाजवाद,…
लंबे समय के इंतज़ार के बाद, मनोज बाजपेयी आखिरकार ‘द फैमिली मैन’ के तीसरे सीज़न में श्रीकांत तिवारी के रूप में वापस आ गए हैं। यह पॉपुलर वेब सीरीज़ अमेज़न प्राइम पर स्ट्रीम होगी। शो में, श्रीकांत को एक मिडिल-क्लास आदमी के रूप में दिखाया गया है जो एक टॉप-सीक्रेट TASC ऑफिसर होने के साथ-साथ दोहरी ज़िंदगी भी जीता है। लेकिन इस सीज़न में, बाजपेयी का किरदार भाग रहा है, क्योंकि उसे चुनौतियों और खतरों से बचना है। शो के लेटेस्ट सीज़न को क्रिटिक्स के साथ-साथ दर्शकों से भी काफी चर्चा और तारीफ़ मिली है।मनोज बाजपेयी और प्रियामणि के लीड…
सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
हमसे संपर्क करने और जुड़ने के लिए मेल करें -
siddhbhoomi@gmail.com Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.