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Author: Siddhbhoomi Team
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
भविष्य में लड़ाई लड़ने के तरीके बदलने वाले हैं। पावरफुल मुल्क बंदूक, तोप, तलवारों या अन्य हथियारों से नहीं, बल्कि मिसाइलो से अतंरिक्ष में बनें ‘स्पेस स्टेशनों’ से योजना बना रहे हैं। सुखद ख़बर यहां ये है कि भारत भी इस योजना से पीछे नहीं हैं। अन्य देशों की ‘मिसाइल अटैक’ वाली मंशाओं की संभावनाओं के बीच भारत ने भी अतंरिक्ष में अपना पैर जमा दिया है। ज्यादा नहीं सिर्फ दशक भर बाद किसी पराए नहीं, स्वयं के स्वनिर्मित ‘अतंराष्टीय स्पेस सेंटर’ में उतरा करेंगे हमारे भारतीय अंतरिक्ष यात्री। इसके लिए भारतीय वैज्ञानिकों की कोशिशें अंतिम चरण में हैं। कुल…
आज की डिजिटल दुनिया में लैपटॉप, स्मार्टफोन और टैबलेट हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग इन स्क्रीन्स पर अपना अधिकतर समय बिताने लगे हैं। पहले के समय में बच्चे कम से कम आउटडोर गेम्स खेलते थे। लेकिन अब मनोरंजन से लेकर काम तक हर चीज स्क्रीन पर सिमट गई है। लेकिन इस सुविधा का एक निगेटिव पहलू भी है। लंबे समय तक स्क्रीन पर समय बिताने से हमारी आंखों पर ज्यादा दबाव पड़ता है। इसको मेडिकल की भाषा में डिजिटल आई स्ट्रेन या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम भी कहा जाता है।हालांकि यह सिर्फ आंखों…
सैमसंग ने इस साल की दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी किए हैं और साथ ही 2025 के दूसरे क्वार्टर के प्लान्स का भी ऐलान किया है। इस साउथ कोरियन टेक कंपनी ने पुष्टि की है कि हाल के बाकी महीनों में कई नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए जाएंगे। इनमें ब्रांड का लंबे समय से चर्चित ट्रिपल फोल्ड स्मार्टफोन और इसका Project Moohan XR हेडसेट शामिल है। कंपनी ने गैलेक्सी एस15 एफई के लॉन्च टाइमलाइन को भी टीज किया है। Q2 2025 की अर्निंग कॉल में, सैमसंग के मोबाइल एक्सपीरियंस डिविजन के वीपी डैनियल अराउजो ने कहा कि गैलेक्सी S25 FE…
प्रतिरूप फोटोSocial MediaKusum । Aug 1 2025 6:36PMअमेरिका में गूगल ने अपने नए Age Assurace Technology की सीमित शुरुआत कर दी है। जिससे अब 18 साल से कम उम्र वाले यूजर्स को ऑनलाइन अनुचित कंटेंट और विज्ञापनों से बचाना होगा। कंपनी ने साल की शुरुआत में इस योजना का ऐलान किया था जिसे अब सीमित यूजर्स के बीच परीक्षण के तौर पर लागू किया गया है।गूगल ने अमेरिका में अपने नए Age Assurace Technology की सीमित शुरुआत कर दी है। जिससे अब 18 साल से कम उम्र वाले यूजर्स को ऑनलाइन अनुचित कंटेंट और विज्ञापनों से बचाना होगा। कंपनी ने…
तीज-त्योहार के मौके पर हर लड़की खुद को खूबसूरत बनाने का मौका नहीं छोड़ती हैं। ऐसे में आपने देखा होगा कि फेस्टिवल से पहले पार्लर के बाहर लंबी लाइने लगी रहती हैं। वहीं पार्लर जाकर ब्यूटी ट्रीटमेंट लेने के लिए अच्छी-खासी रकम चुकानी पड़ती है। वहीं कई बार केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स लगाने से हमारी स्किन पर इसका इफेक्ट होने लगता है। साथ ही पार्लर में समय और पैसा दोनों खर्च हो जाते हैं। ऐसे में अगर आपके चेहरे पर कोई स्पॉट भी आ जाए, तो पूरा फेस्टिव लुक ही खराब हो जाता है।ऐसे में अगर आप भी रक्षाबंधन पर ग्लोइंग…
जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया की चौथी सबसे बड़ी और तेजी से मजबूत होती जा रही ‘समाजवादी अर्थव्यवस्था’ यानी भारतीय अर्थव्यवस्था को डेड इकॉनमी करार दिया है, तो एक भारतीय होने के नाते उनसे मेरा सीधा सवाल है कि आखिर उनकी अमेरिकी अर्थव्यवस्था क्या है- ‘कैपिटलिस्ट इकॉनमी’ या ‘टेररिस्ट इकॉनमी!’ मुझे पता है कि वो मेरे इस सवाल का जवाब नहीं देंगे, इसलिए आज उनकी डॉलर डिप्लोमेसी, मिलिट्री डिप्लोमेसी और घृणित कूटनीति को आईना दिखलाना अपना राष्ट्रघर्म/बुद्धिजीवी धर्म समझता हूं। वहीं, अमेरिका को यह भी स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि रूस के साथ भारत गर्त में नहीं,…
जब किसी वैश्विक ताक़त के शिखर पर बैठा नेता ‘व्यापार’ को भी ‘सौदेबाज़ी’ और ‘दबाव नीति’ का औज़ार बना ले, तब यह न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर देता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों के आधारभूत सिद्धांतों को भी चुनौती देता है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाकर ऐसा ही एक आर्थिक आघात पहुँचाया है। इस टैरिफ का लक्ष्य स्पष्ट है, भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा को बाधित करना और अमेरिकी वर्चस्व की पुनः स्थापना करना। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य एवं भारत की उभरती अर्थव्यवस्था में अमेरिका की…
अजय देवगन अपनी हिट फ्रेंचाइज़ी सन ऑफ सरदार के सीक्वल में फिर जसविंदर “जस्सी” सिंह रंधावा बनकर लौटे हैं। इस बार निर्देशक विजय कुमार अरोड़ा ने लंदन की पृष्ठभूमि में हंसी, इमोशन और देसी कल्चर का मिक्स तैयार किया है। कहानी सीधी है, लेकिन पेशकश रंगीन और मज़ेदार।विदेश में टूटा सपनाफिल्म की शुरुआत होती है जस्सी के लंदन आने से, जहां वह पत्नी डिंपल (नीरू बाजवा) को वापस पाना चाहता है। लेकिन उसे झटका तब लगता है जब डिंपल कहती है कि वह किसी और से प्यार करती है और तलाक चाहती है। यही से जस्सी की ज़िंदगी में नया…
माइक्रोसॉफ्ट की एक स्टडी में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इसमें बताया गया है कि इंटरप्रेटर्स और ट्रांसलेटर्स के साथ कई और भी ऐसी नौकरियां हैं, जिन पर एआई का खतरा मंडरा रहा है। इनमें इतिहासकार, सेल्स रिप्रेजेंटेटिव, पैसेंजर अटेनडेंट जैसे कामों पर एआई का ज्यादा असर पड़ने की संभावना है। आमतौर पर जब भी एआई का जिक्र आता है तो लोगों का लगता है इसके चलते आगे आने वाले समय में आईटी, कंसल्टेंसी, रिसर्च, राइटिंग जैसी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। जबकि माइक्रोसॉफ्ट की रिसर्च में खुलासा किया गया है कि हकीकत में इससे क्या उम्मीद की जानी चाहिए। माइक्रोसॉफ्ट…
लीजिए, अंततोगत्वा अमेरिका ने भारत पर अपना टैरिफ बम फोड़ ही दिया। लेकिन अब भारत क्या जवाबी कार्रवाई करता है, इसपर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। उल्लेखनीय है कि गत बुद्धवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारतीय चीजों पर 25% जवाबी टैरिफ लगाने का पुनः ऐलान किया। हालांकि, चतुराई पूर्वक ट्रंप ने भारत को ‘दोस्त’ बताते हुए निज सोशल मीडिया साइट ‘सोशल ट्रूथ’ पर किये गए अपने पोस्ट में लिखा है कि यह टैरिफ 1 अगस्त से लागू होगा।वहीं, अभी तक यह भी साफ नहीं हुआ है कि ट्रंप का यह टैरिफ पहले से लागू 10% शुल्क के…
सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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