महाराष्ट्र में स्वयंभू धर्मगुरु अशोक खरात से जुड़ा मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। बलात्कार, काला जादू, ठगी और आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों के बीच अब इस प्रकरण ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। एक ओर जहां विशेष जांच दल इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है, वहीं दूसरी ओर संवेदनशील जानकारी के लीक होने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुणे में राज्य के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने इस मामले में सामने आए फोन कॉल के आरोपों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामले से जुड़ी जानकारी का बाहर आना बेहद चिंताजनक है और इसकी जांच होना जरूरी है। उनका कहना है कि इस डेटा का लीक होना खुद में एक बड़ा अपराध है और सरकार इस दिशा में कड़ी कार्रवाई करेगी।
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हम आपको बता दें कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने दावा किया कि कई बड़े नेताओं का संपर्क अशोक खरात से था। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना प्रमुख और राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और खरात के बीच सत्रह बार बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि इसके अलावा अन्य नेताओं के साथ भी कई बार खरात का फोन पर संपर्क हुआ। अंजलि दमानिया के अनुसार यह कॉल विवरण उन्हें एक अज्ञात स्रोत से प्राप्त हुआ है।
हालांकि इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उदय सामंत ने इसे राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर नेताओं की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल फोन कॉल होने से किसी भी तरह का गलत संबंध साबित नहीं होता।
इधर, नासिक में अदालत ने अशोक खरात को एक अन्य बलात्कार मामले में आठ अप्रैल 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। विशेष जांच दल ने अदालत को बताया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। पुलिस के अनुसार खरात पर एक महिला के साथ लंबे समय तक शारीरिक शोषण करने का आरोप है। यह भी आरोप है कि उसने महिला को गर्भपात की दवाएं दीं और उसे मानसिक रूप से डराया धमकाया।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि पीड़िता का 2020 से 2026 के बीच कई बार शोषण किया गया। आरोपी ने पीड़िता और उसके परिवार के दस्तावेज भी अपने पास रखे और उसे नशीली दवाएं देकर नियंत्रण में रखा। जांच अधिकारियों का कहना है कि खरात का तरीका एक जैसा था और उसने कई महिलाओं के साथ इसी तरह अपराध किया।
वहीं बचाव पक्ष ने इन आरोपों को चुनौती देते हुए कहा कि मामले में सहमति का पहलू भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने काला जादू कानून का सहारा लिया है क्योंकि बिना इसके आरोप सिद्ध करना कठिन होगा। हालांकि अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पुलिस हिरासत मंजूर कर ली।
इस बीच, जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार अशोक खरात ने महाराष्ट्र के दो सहकारी संस्थानों में एक सौ तीस से अधिक खाते अलग अलग नामों से खोल रखे थे। इन खातों के माध्यम से करीब 63 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। यह रकम उन लोगों से प्राप्त बताई जा रही है जो उससे ज्योतिष परामर्श के लिए संपर्क करते थे।
जांच में यह भी सामने आया कि इन खातों में से एक खाता एक महिला के नाम पर खोला गया था जो एक पूर्व महिला आयोग प्रमुख की बहन बताई जा रही है। इस खुलासे के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल और तेज हो गई है।
शिर्डी में दर्ज एक ठगी मामले में भी खरात और उसकी पत्नी पर जमीन हड़पने की कोशिश का आरोप है। पुलिस ने इस मामले में दो बिचौलियों को गिरफ्तार किया है जबकि उसकी पत्नी की तलाश जारी है। उसके खिलाफ देश छोड़ने से रोकने के लिए लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।
हम आपको बता दें कि फिलहाल अशोक खरात के खिलाफ दस मामले दर्ज हो चुके हैं जिनमें से आठ महिलाओं के शोषण से जुड़े हैं और दो ठगी के हैं। प्रवर्तन निदेशालय भी अब इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर सकता है।
बहरहाल, कुल मिलाकर यह मामला केवल एक व्यक्ति के अपराध तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि इसमें राजनीतिक संपर्क, प्रशासनिक लापरवाही और आर्थिक घोटाले जैसे कई गंभीर पहलू जुड़ गए हैं। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष इस पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
