विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार बातचीत की गति और जटिलता, टैरिफ को लेकर अनिश्चितता और पाकिस्तान से पनपने वाले आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताओं पर मतभेदों के कारण उतार-चढ़ाव आए हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताओं को ठीक से न समझने या उनकी अहमियत न आंकने से उसके साझेदारों के साथ रिश्तों पर असर पड़ सकता है। साथ ही, उन्होंने नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच बदलते रिश्तों पर भी बात की। न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में पूर्व अमेरिकी राजनयिक डैनियल रसेल के साथ बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत के आर्थिक ढांचे की वजह से व्यापार वार्ता शुरू में सोचे गए मुकाबले ज़्यादा पेचीदा हो गई है, जबकि अमेरिकी टैरिफ ढांचे में बदलाव ने अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।
जयशंकर ने कहा इस रिश्ते में कुछ उतार-चढ़ाव आए हैं, और इसकी मुख्य वजह ट्रेड बातचीत की रफ़्तार और उसमें शामिल पेचीदगियां रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत में छोटे उत्पादकों, किसानों और कारखानों का बड़ा आधार होने के कारण, ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत में कई तरह के हितों को ध्यान में रखना पड़ता है। जयशंकर ने कहा कि अब ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर काफी हद तक सहमति बन गई है, लेकिन मुख्य सवाल यह है कि अमेरिकी पक्ष में क्या बदलाव आया है। उन्होंने कहा आज मैं कहूंगा कि ट्रेड एग्रीमेंट पर काफी हद तक सहमति बन गई है। लेकिन असल सवाल यह है कि अमेरिकी पक्ष में क्या बदलाव आया है। जयशंकर ने रेसिप्रोकल टैरिफ (आपसी टैरिफ) को हटाए जाने के बाद अमेरिकी टैरिफ ढांचे में आए बदलावों की ओर इशारा करते हुए कहा कि सेक्शन 301 के तहत एक नई प्रक्रिया अभी भी चल रही है।
आतंकवाद भारत के लिए एक बड़ी चिंता बना हुआ है।
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद भारत की मुख्य चिंताओं में से एक बना हुआ है, खासकर इसलिए क्योंकि पाकिस्तान से कई दशकों से हमले हो रहे हैं। जयशंकर ने कहा भारत के लिए आतंकवाद का मुद्दा खास तौर पर अहम है। हमारा मानना है कि शायद ही कोई ऐसा देश हो, जिसे दशकों से किसी पड़ोसी देश की सोची-समझी और जान-बूझकर अपनाई गई नीति के तहत उस तरह के आतंकवाद का सामना करना पड़ा हो, जैसा हमने किया है।
