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दिल्ली और एलएसआर से जुड़ी अपनी यादें भी कीं साझा
तिलोत्तमा की पोस्ट में दिल्ली का जिक्र भी खास है। वह लेडी श्रीराम कॉलेज की पूर्व छात्रा हैं और उन्होंने बताया कि दिल्ली में 17 साल रहने के दौरान उन्होंने सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल किया था।
उनकी यह पोस्ट ऐसे समय आई है जब आस्था कुंज की घटना के बाद एलएसआर की छात्राएं सुरक्षा को लेकर विरोध कर रही हैं। छात्राओं ने कॉलेज के पास करीब 500 मीटर लंबे उस रास्ते को लेकर चिंता जताई है, जहां अंधेरा होने के बाद आना-जाना मुश्किल हो जाता है।
डर के साथ जीने पर तिलोत्तमा ने उठाए सवाल
तिलोत्तमा ने अपनी पोस्ट में अस्पतालों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने लिखा, “कुछ रात पहले मेरी जान-पहचान का एक व्यक्ति अस्पताल में था। आज सुबह मैं एक बुरे सपने से उठी। क्या अस्पताल हमारे लिए सुरक्षित हैं? अस्पताल के बिस्तर पर बेहोश पड़ी महिला, क्या वह सुरक्षित है?”
यह सवाल पानीपत के सिविल अस्पताल से जुड़े अगस्त के एक मामले की पृष्ठभूमि में भी आया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने खुद संज्ञान लेते हुए उन आरोपों पर ध्यान दिया था, जिनमें 57 साल की एक महिला के साथ जांच के दौरान रेप किए जाने की बात कही गई थी। महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
तिलोत्तमा ने अपनी सोच में मौजूद विरोधाभास को भी स्वीकार किया। उन्होंने लिखा, “लेकिन कुछ हुआ नहीं।” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भले ही यहां कुछ न हो, देश के किसी दूसरे हिस्से में किसी और के साथ ऐसा हो रहा होता है।
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भरोसा बनाए रखने की उम्मीद भी जताई
अपनी पोस्ट के आखिर में तिलोत्तमा ने डर के बावजूद भरोसा बनाए रखने की बात कही। उन्होंने लिखा, “हम बार-बार टूटते हैं और फिर बार-बार एक साथ आते हैं, क्योंकि हम अब भी एक अविश्वसनीय भारत की उम्मीद कर सकते हैं।” तिलोत्तमा शोम को आखिरी बार सनी देओल की फिल्म ‘इक्का’ में देखा गया था।
