जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा में राज्य का दर्जा (Statehood) बहाल करने का औपचारिक प्रस्ताव पेश किया है। प्रस्ताव पेश करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार को उसके उन पुराने वादों की याद दिलाई, जिनमें परिसीमन और चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने का आश्वासन दिया गया था। विधानसभा के पटल पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार और सर्वोच्च न्यायालय सहित विभिन्न मंचों से जम्मू-कश्मीर की जनता को तीन चरणों वाली प्रक्रिया की प्रतिबद्धता जताई गई थी।
विधानसभा में बोलते हुए, उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों से तीन चरणों वाली प्रक्रिया का वादा किया गया था – परिसीमन, चुनाव और फिर राज्य का दर्जा बहाल करना – और उन्होंने तर्क दिया कि पहले दो चरण पहले ही पूरे हो चुके हैं।
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प्रस्ताव पेश करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा, “संसद, सुप्रीम कोर्ट और अन्य मंचों पर हमसे तीन चरणों – परिसीमन, चुनाव और राज्य का दर्जा – के बारे में वादा किया गया था।” उन्होंने कहा कि लोगों ने बड़ी संख्या में चुनावों में हिस्सा लिया और अब तीसरा चरण – राज्य का दर्जा बहाल करना – बाकी है। उमर अब्दुल्ला ने कहा, “भारी मतदान हुआ। लोगों को मजबूर नहीं किया गया, लोगों ने तीसरे चरण के लिए वोट दिया। हम इंतजार करते रहे। हमने भारत सरकार को जम्मू-कश्मीर के लोगों से किए गए वादे की याद दिलाई।”
उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी इस वादे से जुड़ाव का ज़िक्र किया और कहा कि केंद्र को अब लोगों को दिए गए आश्वासन पर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हमने सोचा कि इस सदन के माध्यम से हम भारत सरकार को याद दिलाएं कि आपके वादे पर कुछ होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इस वादे को अपने नाम से जोड़ा था – ‘मोदी का वादा’।”
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यह मांग उमर अब्दुल्ला द्वारा जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की बार-बार की गई अपीलों के बाद आई है। इस साल जून में, उमर अब्दुल्ला ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी और विशेष रूप से राज्य का दर्जा “जल्द बहाल” करने का मुद्दा उठाया था। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, उमर अब्दुल्ला ने पीएम मोदी से कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने से लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत होंगी, लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और जम्मू-कश्मीर में विकास का अगला चरण आगे बढ़ेगा।
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने इससे पहले अक्टूबर 2024 में राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव पारित किया था, जिसके बाद उमर अब्दुल्ला की सरकार ने यह मांग केंद्र तक पहुंचाई थी।
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