इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बृहस्पतिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए ईरान पर हमला करने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह उनके लिए आसान फैसलों में से एक था। इस बीच, हमास ने कहा कि वह गाजा शांति समझौते को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है और यूरोपीय संघ (ईयू) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण के लिए जरूरी धनराशि का अब तक केवल एक छोटा हिस्सा ही जुटाया जा सका है। नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनियाभर के नेताओं को संबोधित करते हुए गाजा में इजराइल द्वारा नरसंहार किए जाने के आरोपों को ‘‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’’ बताया।
नेतन्याहू के सभागार में पहुंचने पर कुछ नेताओं ने उनका स्वागत किया तो कुछ ने विरोध जताया। कई प्रतिनिधि बाहर निकल गए और उनके भाषण के दौरान ज्यादातर सीट खाली दिखाई दीं। नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि ईरान पर हमला करना उनके लिए ‘‘अब तक के सबसे आसान फैसलों में से एक था’’ और उन्होंने सभागार से बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों को ‘‘नैतिक रूप से कायर’’ करार दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर नैतिक रूप से कोई और कायर अब भी सभागार में मौजूद है और बाहर नहीं गया है तो कृपया अभी चला जाए।’’
इस बीच, फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास को संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने के लिए अमेरिका द्वारा एक बार फिर वीजा नहीं दिए जाने के कारण उन्हें पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो संदेश के जरिए महासभा को संबोधित करना पड़ा। अब्बास (90) की उनके देश में लोकप्रियता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रभाव में कमी आई है, लेकिन अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह खुद को दरकिनार किए जाने को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगे। अब्बास ने कहा, ‘‘हम अपनी मातृभूमि नहीं छोड़ेंगे।
हम विस्थापन स्वीकार नहीं करेंगे और हम किसी को भी अपनी ओर से हमारे भविष्य का फैसला नहीं करने देंगे।’’
पूरे सप्ताह विश्व के कई नेताओं ने अपने भाषणों में फलस्तीनियों की स्थिति का उल्लेख किया और अब्बास ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इजराइल के खिलाफ अधिक ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। इस बीच, हमास के एक प्रवक्ता ने कहा कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ द्वारा गाजा के पुनर्निर्माण के लिए छह महीने की 2.45 अरब डॉलर की योजना पेश किए जाने के बाद संगठन शांति समझौते के अगले चरणों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। हमास के प्रवक्ता हाजेम कासिम ने कहा कि उनका संगठन ‘‘बोर्ड ऑफ पीस की रूपरेखा को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार’’ है, हालांकि उन्होंने हथियार डालने की किसी योजना का उल्लेख नहीं किया।
इजराइल ने कहा है कि जब तक हमास हथियार नहीं डालता, वह पुनर्निर्माण की अनुमति नहीं देगा। ईयू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ के अनुमान के अनुसार गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 71 अरब यूरो (80.8 अरब डॉलर) की जरूरत है, लेकिन अब तक केवल एक अरब यूरो (1.1 अरब डॉलर) ही जुटाए जा सके हैं। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एक ‘‘संवेदनशील लक्ष्य’’ और बंदरगाह शहर यानबू में अरामको तेल कंपनी से जुड़े परिसरों पर हमला करने का दावा किया, लेकिन उन्होंने इसके समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं दिया।
हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने एक बयान में कहा कि इन हमलों में क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों तथा ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि हमले कब किए गए। हूतियों ने पिछले कुछ दिनों में सऊदी अरब की राजधानी को निशाना बनाने का दूसरी बार दावा किया है। विद्रोहियों ने यह भी कहा कि उन्होंने सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत जजान पर कई मिसाइल और ड्रोन दागे
‘एसोसिएटेड प्रेस’ इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका।
सऊदी सरकार और अरामको ने इस संबंध में अभी कोई टिप्पणी नहीं की है। सऊदी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने इससे पहले कहा था कि लाल सागर के बंदरगाह यानबू और दक्षिण-पश्चिमी शहर ताइफ को निशाना बनाकर दागी गई छह बैलिस्टिक मिसाइल को उनके लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया। सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि उन्हें यमन के कुछ हिस्सों पर हूतियों के कब्जे की आशंका को लेकर चिंता नहीं है और सरकार ‘‘अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है।’’
हूतियों के खिलाफ सैन्य रूप से शामिल नहीं होने के अमेरिका के फैसले के बारे में पूछे जाने पर प्रिंस फैसल ने सीधा जवाब नहीं दिया।
उन्होंने यह बताने से भी इनकार किया कि सऊदी अरब ‘अब्राहम समझौते’ में शामिल होगा या नहीं। उन्होंने कहा कि इससे पहले गाजा शांति योजना को पूरी तरह लागू किया जाना जरूरी है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने यमन में मानवीय सहायता तेजी से पहुंचाने का आग्रह किया है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा कि हिंसा के कारण घर छोड़ने वाले लोगों को भोजन, आश्रय और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
