केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लंबे समय से अटके किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना से जुड़े समझौते को “ऐतिहासिक करार” बताते हुए कहा कि मंगलवार को इस पर हस्ताक्षर किए गए। शाह ने बताया कि यह नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पानी से जुड़े 10वें विवाद का समाधान है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों-योगी आदित्यनाथ, पुष्कर सिंह धामी, सुखविंदर सिंह सुक्खू, भजनलाल शर्मा, रेखा गुप्ता और नायब सिंह सैनी-ने शाह और जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर किए।”
शाह ने कहा कि इस समझौते से सभी छह राज्यों को किसी न किसी तरह फायदा होगा और उन्होंने इस परियोजना को इस चरण तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने के लिए उनके मुख्यमंत्रियों और पाटिल को बधाई दी।
शाह ने कहा कि भारत सरकार और यमुना घाटी वाले छह राज्यों के मुख्यमंत्री इस परियोजना को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते के तहत उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनेगा, जहां 1,56.2 करोड़ घन मीटर जल संग्रहण होगा। शाह ने कहा कि परियोजना के तहत 97 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी, 1,47.6 करोड़ यूनिट स्वच्छ जलविद्युत भी प्राप्त होगी तथा दिल्ली को इसका सबसे ज्यादा लाभ होगा।
यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब छह राज्यों ने जून में 422 मेगावाट की इस परियोजना के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने पर सहमति जताई थी, जिससे इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल के विचार के लिए भेजे जाने का रास्ता साफ हुआ। इस परियोजना की अनुमानित लागत पहले करीब 15,000 करोड़ रुपये थी और यह आठ साल से अधिक समय से लंबित थी। शाह ने कहा कि किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है और 1994 के समझौते के तहत इसका लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय भार भारत सरकार और शेष 10 प्रतिशत राशि भागीदार राज्यों द्वारा वहन की जाएगी।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि आगामी किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना से दिल्ली को करीब 11 करोड़ घन मीटर (एमसीएम) पानी मिलेगा, जिससे शहर में जल आपूर्ति बढ़ेगी और यमुना में पर्यावरणीय प्रवाह में सुधार होगा। गुप्ता ने कहा कि यह परियोजना दिल्ली की जल जरूरतों के लिए दीर्घकालिक सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना ऊपरी यमुना घाटी की महत्वपूर्ण जल भंडारण परियोजनाओं में से एक है।
टोंस नदी पर बनने वाले इस परियोजना के बांध की उपयोगी जल भंडारण क्षमता करीब 1,32.4 करोड़ घन मीटर (एमसीएम) होगी।
