तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी के प्रबल समर्थक पार्टी विधायक कुणाल घोष ने शनिवार को पार्टी के दोनों गुटों द्वारा आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, जिसके बाद उनके भावी राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें शुरू हो गईं। घोष ने पहले ममता बनर्जी गुट की ओर से कालीघाट स्थित पुराने टीएमसी कार्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया और पार्टी प्रमुख के निर्देश पर राष्ट्रध्वज फहराया। इसके बाद उन्होंने पार्टी के दूसरे गुट, ऋतब्रत बनर्जी गुट की ओर से बेलेघाटा के मेट्रोपॉलिटन इलाके में पार्टी के किराए के कार्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में भी भाग लिया।
यह क्षेत्र उनके विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। घोष ने एक शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और वहां मौजूद लोगों को संक्षिप्त रूप से संबोधित किया। इस कार्यक्रम में चंद्रिमा भट्टाचार्य, अरूप रॉय और बिप्लब मित्रा समेत ऋतब्रत गुट के कई प्रमुख नेता मौजूद थे।
विरोधी गुट के कार्यक्रम में घोष की मौजूदगी के बाद तुरंत यह अटकलें लगने लगीं कि वह तृणमूल कांग्रेस के दूसरे गुट से संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। टीएमसी के ऋतब्रत गुट के प्रवक्ता कोहिनूर मजूमदार ने संकेत दिया कि घोष का वहां जाना उनके गुट में शामिल होने की शुरुआत हो सकती है। मजूमदार ने कहा,“ कुणाल घोष यहां आए हैं।
उन्होंने दरवाजे की घंटी बजाई है। कुछ समय बाद वह अपना सामान लेकर आएंगे।”
हालांकि, घोष ने इस बात को खारिज कर दिया और कहा कि विरोधी गुट के कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी का मतलब यह नहीं है कि वह गुट बदल रहे हैं। खुद के वहां जाने की वजह बताते हुए घोष ने कहा कि वह कालीघाट में अपने मुख्य स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम से लौट रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि उनके रास्ते में स्थित पार्टी कार्यालय में कुछ लोग टीएमसी के नाम पर राष्ट्रध्वज फहरा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “मैं इसलिए रुका क्योंकि यह मेरा विधानसभा क्षेत्र है और मैंने देखा कि लोग हमारी पार्टी के नाम पर राष्ट्रध्वज फहरा रहे हैं।
