बाजार नियामक सेबी ने बॉन्ड की ऑनलाइन खरीद-बिक्री की सुविधा देने वाले मंचों (ओबीपीपी) के लिए शुक्रवार को नियामकीय ढांचे में ढील दी। अब ये मंच अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) द्वारा विनियमित उत्पादों और प्रतिभूतियों के साथ कुछ कर-बचत बॉन्ड भी पेश कर पाएंगे। संशोधित ढांचे के तहत ऑनलाइन बॉन्ड मंच प्रदाता सेबी, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई), आईएफएससीए और पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) जैसे वित्तीय नियामकों द्वारा विनियमित उत्पाद या प्रतिभूतियां पेश कर सकेंगे।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक परिपत्र में कहा कि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 54ईसी या आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 85 के तहत जारी बॉन्ड को भी ओबीपीपी अपने मंच पर पेश कर सकेंगे। आईएफएससीए द्वारा विनियमित उत्पादों के मामले में ओबीपीपी को गिफ्ट-आईएफएससी में सक्रिय सेबी-पंजीकृत शेयर ब्रोकरों पर लागू नियमों का पालन करना होगा। साथ ही उदारीकृत धनप्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत लागू नियमों और सीमाओं सहित विदेशी मुद्रा संबंधी नियमों का अनुपालन करना होगा।
इन वित्तीय उत्पादों पर घरेलू ऋण प्रतिभूतियों से अलग पहचान के लिए स्पष्ट रूप से ‘अंतरराष्ट्रीय’ या ‘विदेशी’ साधन का उल्लेख करना होगा। ओबीपीपी को 54ईसी बॉन्ड के मामले में पात्र जारीकर्ताओं, लॉक-इन अवधि, निवेश सीमा, हस्तांतरण न किए जा सकने की स्थिति और कर लाभ जैसी विशेषताओं से संबंधित जानकारी देनी होगी। इसके अलावा, उन्हें यह भी बताना होगा कि ऐसे निवेश कर लाभ हासिल करने के इच्छुक निवेशकों के लिए हैं और इसके लिए आयकर अधिनियम के तहत लागू पात्रता मानदंड और शर्तें पूरी करनी होंगी।
सेबी ने ओबीपीपी के अनुपालन अधिकारी से जुड़ी शर्त में भी बदलाव किया है। अब कंपनी सचिव की नियुक्ति अनिवार्य करने के बजाय इकाई को सेबी (स्टॉक ब्रोकर) विनियमन, 2026 के अनुसार अनुपालन अधिकारी नियुक्त करना होगा। सेबी ने कहा कि कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए ये बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
