उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कर्नाटक सरकार को निर्देश दिया कि वह गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामलों की रोजाना सुनवाई के लिए एक अतिरिक्त विशेष अदालत के वास्ते बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराए। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने शाहिद खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए। शाहिद खान पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) साजिश मामले में आरोपी है, जिसमें अभियोजन पक्ष 707 गवाहों से पूछताछ करना चाहता है।
प्रधान न्यायाधीश ने आदेश में कहा, ‘‘हम कर्नाटक राज्य को निर्देश देते हैं कि वह तुरंत आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराए। इसमें कर्नाटक उच्च न्यायिक सेवा में एक अतिरिक्त पद सृजित करना और उच्च न्यायालय के तय नियमों के अनुसार जरूरी कर्मचारी एवं अन्य संबंधित सुविधाएं देना शामिल है। इसके लिए आवश्यक मंजूरी दो हफ्ते के अंदर दी जाए।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि जब राज्य सरकार आवश्यक बुनियादी ढांचा, कर्मचारी और पदों को मंजूरी दे देगी, तो कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एक न्यायिक अधिकारी को विशेष अदालत की अध्यक्षता करने के लिए नियुक्त करेंगे।
यह विशेष अदालत सिर्फ यूएपीए से जुड़े मामलों की रोजाना सुनवाई करेगी। पीठ ने आदेश दिया, ‘‘यह मामला भी विशेष अदालत को सौंपा जाएगा। पीठासीन अधिकारी सबसे पहले तीन सुरक्षित गवाहों और उसके बाद अन्य महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अभियोजन पक्ष के लिए जरूरी सबूत तीन महीने के भीतर रिकॉर्ड में शामिल हो जाएं।’’
पीठ ने विशेष अदालत पर काम के मौजूदा बोझ पर भी ध्यान दिया।
राज्य सरकार ने पीठ को बताया कि मौजूदा अदालत में लगभग 97 मुकदमों की सुनवाई लंबित हैं और अलग-अलग आरोपियों की बार-बार अंतरिम जमानत अर्जियों में भी अदालत का काफी समय लग रहा है। पीठ ने कहा कि उसके पहले के आदेश के बाद, कर्नाटक में यूएपीए मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित की गई हैं, और प्रत्येक अदालत 12-15 से अधिक मामलों की सुनवाई नहीं करेगा। शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘अगर ऐसा नहीं किया गया है, तो हमारे पूर्व के आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए।
ऐसी स्थिति में, विशेष अदालत के पीठासीन अधिकारी से उम्मीद की जाती है कि वह सिर्फ 12-15 मामलों की सुनवाई करेंगे, जिसमें मौजूदा मामला भी शामिल है।’’
पीठ ने विलंब का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘राज्य के पास इस मुकदमे को वर्षों तक खींचने की छूट नहीं हो सकती।
