भारत ने मैदान में उतार दिया है अपना नया और अचूक ब्रह्मास्त्रस शत्रुंज। अब आसमान से आए हर हमले का पूरा-पूरा हिसाब होगा। पाकिस्तान, चीन और उनकी हर नापाक ड्रोन साजिश को अब हवा में ही नस्तनाबूत कर दिया जाएगा बल्कि दुश्मन के मंसूबे वहीं के वहीं राख कर दिए जाएंगे। हर उड़ते हुए खतरे का पीछा करेगा शत्रुंजय क्योंकि इसके प्रहार से अब बचना मुश्किल ही नहीं बल्कि पूरी तरह नामुमकिन है। पिछले कुछ सालों में सरहद पर मंडराते ड्रोन आतंकवाद और जासूसी का सबसे बड़ा यह जरिया बन चुके हैं। चाहे हथियारों की तस्करी हो, नशे की खेप पहुंचाने की साजिश हो। दुश्मन ने कई बार भारत को अस्थिर करने की कोशिश की है। लेकिन अब पूरी तरह से खेल जो है बदल चुका है, पलट चुका है। मैदान में वो उतर चुका है जो दुश्मनों के लिए अकेला ही काफी है। जिसका नाम है शत्रुंजय। शत्रु यानी दुश्मन और जय यानी विजय। जिसके नाम में ही विजय का हुंकार हो वो दुश्मनों से कैसे डर सकता है? यह स्वदेशी एंट्री ड्रोन सिस्टम ना सिर्फ पाकिस्तान और चीन बल्कि भारत की तरफ बुरी नजर उठाने वाले हर शत्रु की नींद उड़ाने के लिए काफी है।
सूत्रों के अनुसार दिल्ली स्थित रक्षा कंपनी भूमि एंड द्वारा विकसित यह काउंटर अनमेड एरियल सिस्टम यानी कि सीयूएएस सीधे तौर पर भारतीय सेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य हमारे सीमावर्ती इलाकों, संवेदनशील सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रतिष्ठानों को दुश्मन के ड्रोन हमलों से पूरी तरह सुरक्षित करना है। शत्रुंजय रेडियो फ्रीक्वेंसी यानी कि आरएफ डिटेक्शन तकनीक का इस्तेमाल करता है। यह लगभग 4 कि.मी. की दूरी तक दुश्मन के ड्रोन की मौजूदगी का सटीक पता लगा सकता है। सिस्टम की एंटीना आधारित सिग्नेचर डिटेक्शन और डायरेक्शन फाइंडिंग तकनीक पलक झपकते ही यह पहचान लेती है कि ड्रोन किस दिशा से संचालित किया जा रहा है। सबसे बड़ी और घातक बात यह है कि यह बिना एक भी गोली चलाए दुश्मन के ड्रोन को नेस्तनाबूत कर सकता है। यह सॉफ्ट किल तकनीक पर आधारित है। यानी ड्रोन को हवा में नष्ट करने के बजाय यह उसके कंट्रोल सिग्नल को पूरी तरह से जाम कर देता है। इसके अलावा जीपीएस, स्पूफिंग और जीएसएस डिरप्शन तकनीक की मदद से यह दुश्मन के नेविगेशन सिस्टम को भटका भी देता है। जिससे ड्रोन अपने तय लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही हवा में लाचार होकर बेकार हो जाता है।
शत्रुंजय की अजय क्षमता क्या है?
डिटेक्शन रेंज 4 कि.मी. की है। आरएफ सिग्नेचर आधारित है। बता दें कि इसमें ओमनी डायरेक्शनल जैमिंग भी है। दूसरी खासियत यह 5 कि.मी. या 4 कि.मी. तक की मुख्य तकनीक पर काम करता है। दुश्मन चाहे तुर्की के ड्रोन ले आए या फिर चीन के शत्रुंजय के चक्रव्यूह से बच पाना अब असंभव है। इसमें दो तरह की अचूक जैमिंग क्षमताएं दी गई हैं। ओमनी डायरेक्शनल जैमि लगभग 2 कि.मी. तक यह प्रभावी है और दूसरा डायरेक्शनल जैमि सीधे 5 कि.मी. तक दुश्मन के तंत्र को तहस-नहस करने में यह सक्षम है। यह सिस्टम सिर्फ ताकतवर नहीं बल्कि बेहद लचीला भी है। इसे भारीभरकम सैन्य वाहनों पर आसानी से माउंट किया जा सकता है। या फिर जरूरत पड़ने पर सैनिक खुद इसे उठाकर सीधे मोर्चे पर पैदल ही दुश्मन के मुहाने तक पहुंचा सकते हैं। यह स्टैंड अलोन और मोबाइल दोनों तरह की रणनीतिक तैनाती के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है। मौसम चाहे कितना भी चरम पर क्यों ना हो शत्रुंजय कभी नहीं थकता। यह लगभग 3000 मीटर की ऊंचाई तक पूरी ताकत से काम कर सकता है।
सियाचीन जैसी -20° सेल्सियस की भयंकर ठंड हो या फिर रेगिस्तान का 55 डिग्री सेल्सियस झुलसा देने वाला तापमान इसकी कार्य क्षमता पर कभी आंच नहीं आने देता। इतना ही नहीं इसमें एआई आधारित इलेक्ट्रो आर्टिफिशियल ट्रैकिंग सब सिक्स जीएच जेड आरएफ स्पेक्ट्रम सर्िलंस और एईएस 256 इंक्रिप्शन पर आधारित सुरक्षित संचार जैसी अत्याधुनिक तकनीकें भी इसमें जोड़ी गई हैं जो निगरानी को अचूक बनाती है। दुश्मन के लिए कैसे शत्रुंजय काल है उसे समझिए। पाकिस्तान और चीन की तरफ से आते ड्रोन शत्रुंजय के बीम से हवा में ही ढेर हो जाते हैं। मुख्य इसकी टैगलाइन जो है हवा में ही भस्म होना है। नो एंट्री और एआई बेस्ड ट्रैकिंग। सेना ने भले ही आधिकारिक तौर पर इसकी तादाद का खुलासा ना किया हो। लेकिन शत्रुंजय का भारतीय सेना के बेड़े में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि अब भारत हमला होने का इंतजार नहीं करता बल्कि खतरे को हवा में ही भस्म कर देता है।