गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पेपर लीक रोधी कानून में संशोधन के प्रावधान वाले विधेयक के पारित होने का शुक्रवार को स्वागत किया। इस विधेयक में सजा को और कड़ा करने का प्रावधान है। उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य और उनकी उम्मीदों की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।
पटेल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ से परीक्षा प्रणाली में पूरा भरोसा बहाल होगा और यह सुनिश्चित होगा कि हर समर्पित छात्र को सफलता का उचित अवसर मिले। उन्होंने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में, ये कड़े कदम और टेक्नोलॉजी पर आधारित सुधार हमारी परीक्षा प्रणाली में पूरा भरोसा बहाल करेंगे, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि हर समर्पित छात्र को सफलता का निष्पक्ष अवसर मिले।”
राज्यसभा में बृहस्पतिवार को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से मंज़ूरी दे दी गई। इस दौरान विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के कई घटक दलों ने सदन से बहिर्गमन किया।
लोकसभा ने इस विधेयक को बुधवार को ही पारित कर दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा, यह विधेयक “देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। पूरा गुजरात इस सुधार का स्वागत करता है।”
एक वीडियो बयान में उन्होंने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि युवाओं के भविष्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
यह कानून उसी संकल्प का जीवंत प्रमाण है। पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ कड़ी सज़ा, भारी जुर्माना, त्वरित अदालत और प्रौद्योगिकी-आधारित सुरक्षा व्यवस्था से परीक्षा प्रणाली और अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी।”
पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी युवाओं को ‘नए भारत’ का असली निर्माता मानते हैं और ‘अमृत काल’ में योग्यता के आधार पर युवा शक्ति को समान अवसर देकर ‘विकसित भारत 2047’ के नजरिये को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि उनके मार्गदर्शन में गुजरात सरकार ‘मेधा प्रथम’ के सिद्धांत का पालन करते हुए युवाओं का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए भी दृढ़ संकल्पित है।
