असम में बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ अभियान अब और तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। दरअसल सीमा सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने विधानसभा में जो जानकारी दी है, उससे स्पष्ट है कि अवैध घुसपैठ रोकने के लिए चौतरफा तैयारी की जा रही है। सीमा पर कंटीली बाड़, संवेदनशील इलाकों में निगरानी, संदिग्ध घुसपैठियों की लगातार धरपकड़ और घुसपैठ कराने वाले गिरोहों की तलाश ने यह संदेश दे दिया है कि अब भारत की सीमा को हल्के में लेने वालों के लिए कोई जगह नहीं बची है। बांग्लादेशी घुसपैठियों को यह समझ लेना चाहिए कि भारत की सुरक्षा और संप्रभुता से खिलवाड़ करने की हर कोशिश का कड़ा कानूनी जवाब मिलेगा।
हम आपको बता दें कि असम और बांग्लादेश के बीच लगभग 276 किलोमीटर लंबी सीमा है। राज्य सरकार के अनुसार इसमें से 228 किलोमीटर से अधिक हिस्से में कंटीली बाड़ का निर्माण पूरा हो चुका है। श्रीभूमि, कछार, धुबरी और दक्षिण सलमारा मांकाचार जिलों में सीमा सुरक्षा को मजबूत बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ा है। हालांकि नदी वाले क्षेत्रों में लगभग 34 किलोमीटर से अधिक हिस्से में बाड़ लगाना संभव नहीं हो सका है। इसके अलावा श्रीभूमि जिले में कुशियारा नदी के किनारे 4.35 किलोमीटर क्षेत्र में बांग्लादेश सीमा सुरक्षा बल के विरोध के कारण बाड़ का निर्माण अटका हुआ है। वहां भारतीय नागरिक रहते हैं, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
सीमा सुरक्षा एवं विकास मंत्री अतुल बोरा ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि अवैध घुसपैठ रोकना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। जिन इलाकों में बाड़ लगाना संभव नहीं है, वहां आधुनिक निगरानी व्यवस्था स्थापित की गई है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी कैमरे लगाए गए हैं और सीमा सुरक्षा बल की 14 चौकियां लगातार वास्तविक समय में निगरानी कर रही हैं। राज्य सरकार का मानना है कि सीमा की हर गतिविधि पर नजर रखने से घुसपैठ की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि भारत और बांग्लादेश के बीच अब तक प्रत्यर्पण संधि नहीं होने के कारण कई मामलों में कानूनी प्रक्रिया जटिल बनी हुई है।
राज्य सरकार ने यह भी दोहराया कि असम समझौते की धारा-6 को लागू करना उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायमूर्ति बिप्लब कुमार शर्मा समिति की 40 महत्वपूर्ण सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया जारी है, जिनका उद्देश्य असम के मूल निवासियों के अधिकारों और पहचान की रक्षा करना है।
हालांकि इन सब प्रयासों के बीच असम के हैलाकांडी जिले में एक 42 वर्षीय बांग्लादेशी नागरिक की गिरफ्तारी ने सीमा सुरक्षा की चुनौती को फिर उजागर कर दिया है। पुलिस के अनुसार सिलहट निवासी यह व्यक्ति अवैध रूप से श्रीभूमि के रास्ते भारत में घुसा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि उसने भारत की एक महिला से विवाह किया था और उसकी पत्नी तथा बेटी पिछले ढाई वर्षों से हैलाकांडी में रह रही हैं। पूछताछ में उसने परिवार को बांग्लादेश ले जाने की इच्छा जताई है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि उसने किस रास्ते से सीमा पार की और किन लोगों ने उसकी मदद की। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सीमा पार कराने वाले संगठित गिरोह अब भी सक्रिय हैं।
इसके अलावा, गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल द्वारा 11 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़े जाने की घटना भी बेहद गंभीर है। सभी संदिग्ध चेन्नई जाने की तैयारी में थे। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि वे मेघालय के तुरा क्षेत्र से भारत में दाखिल हुए और उन्हें सीमा पार कराने में एक बिचौलिए की भूमिका हो सकती है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी हैं ताकि अवैध घुसपैठ के पीछे काम कर रहे एजेंटों और सहयोगियों तक पहुंचा जा सके।
देखा जाये तो असम में चल रही कार्रवाई यह स्पष्ट कर रही है कि सीमा सुरक्षा केवल बाड़ लगाने का मामला नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, जनसांख्यिक संतुलन और कानून व्यवस्था से जुड़ा विषय है। जो लोग अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करने का सपना देख रहे हैं, उन्हें अब यह समझ लेना चाहिए कि हर रास्ते पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर है। घुसपैठ कराने वाले गिरोहों, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों और सीमा पार करने वालों के लिए अब बच निकलना आसान नहीं रहेगा। भारत की सीमा का सम्मान करना ही एकमात्र विकल्प है, क्योंकि अवैध घुसपैठ करने वालों के लिए अब कानून का शिकंजा पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुका है।
हम आपको यह भी बता दें कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ सबसे कड़ा रुख अपनाने वाले नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने अवैध घुसपैठियों की पहचान, गिरफ्तारी और उन्हें भारत से बाहर भेजने की मुहिम को लगातार तेज किया है। इसी सप्ताह उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि असम में एक लाख बहत्तर हजार से अधिक अवैध घुसपैठियों की पहचान की जा चुकी है और उनमें से लगभग इकतीस हजार को उनके देश वापस भेजा जा चुका है। सीमा पर कड़ी निगरानी, आधार जारी करने के नियम सख्त करना, असम समझौते के प्रावधानों को लागू करने पर जोर और सीमा पर बाड़ निर्माण में तेजी जैसे फैसलों को भी उनकी इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरमा लगातार यह कहते रहे हैं कि असम किसी भी अवैध घुसपैठिए की शरणस्थली नहीं बन सकता और राज्य की जनसंख्या, सुरक्षा तथा मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून के दायरे में रहकर हर संभव कदम उठाया जाएगा। यही कारण है कि उनके नेतृत्व में घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और व्यापक होती दिखाई दे रही है।
-नीरज कुमार दुबे