तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव अपने चरम पर पहुंच गया है। सत्तारुढ़ तमिलगा वेत्रि कषगम और विपक्षी द्रविड मुनेत्र कषगम के बीच विधायकों की खरीद फरोख्त, सरकार गिराने की साजिश और दल बदल को लेकर आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इसी बीच द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन ने यह कहकर राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया कि विजय की सरकार कभी भी गिर सकती है और राज्य में जल्द ही दोबारा चुनाव हो सकते हैं। दूसरी ओर सत्तारुढ़ दल टीवीके ने द्रमुक पर धनबल के जरिए विधायकों को तोड़कर सरकार अस्थिर करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। पूरे घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति में अस्थिरता, अविश्वास और सत्ता संघर्ष का नया दौर शुरू कर दिया है।
हम आपको बता दें कि पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब तमिलगा वेत्रि कषगम के उथंगरै विधायक एन इलैयाराजा ने चेन्नै पुलिस आयुक्त से शिकायत दर्ज कराई। विधायक ने आरोप लगाया कि तिरुनावुक्करासु नामक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और खुद को एक राजनीतिक सलाहकार संस्था से जुड़ा बताया। विधायक के अनुसार आरोपी ने दावा किया कि विधानसभा में जल्द ही विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा और उसमें समर्थन देने के बदले उन्हें पैंतीस करोड़ रुपये की पेशकश की गई। विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि प्रस्ताव ठुकराने पर उन्हें और उनके परिवार को धमकी दी गई। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें तिरुनावुक्करासु, त्रिचि के नरेश और चेन्नै के त्यागराजन शामिल हैं।
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी नरेश ने हाल ही में द्रमुक नेता वी सेंथिल बालाजी के भाई वी अशोक कुमार से मुलाकात की थी। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने दावा किया कि विधायक से संपर्क सेंथिल बालाजी और अशोक कुमार के निर्देश पर किया गया था। इसके बाद सत्तारुढ़ दल ने द्रमुक पर सरकार गिराने की साजिश रचने का आरोप तेज कर दिया। राज्य के मंत्री आर निर्मल कुमार ने कहा कि पिछले चालीस दिनों से द्रमुक लगातार तमिलगा वेत्रि कषगम के विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विधायकों को पचास करोड़ रुपये तक की पेशकश की गई और पूरी योजना विपक्षी नेताओं के इशारे पर चल रही थी।
तमिलगा वेत्रि कषगम ने इसे लोकतांत्रिक जनादेश के खिलाफ षड्यंत्र करार दिया। पार्टी का कहना है कि चुनाव में जनता ने जिस सरकार को चुना है, उसे अस्थिर करने की कोशिश हो रही है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि विपक्ष विधानसभा में संख्या बल हासिल करने के लिए धनबल और दबाव की राजनीति कर रहा है। पार्टी ने यह भी दावा किया कि केवल एक विधायक ही नहीं बल्कि कई अन्य विधायकों से भी संपर्क साधा गया था।
दूसरी ओर द्रमुक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। द्रमुक नेताओं ने कहा कि तमिलगा वेत्रि कषगम अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए झूठे आरोप लगा रही है। द्रमुक संगठन सचिव आरएस भारती ने राज्यपाल आरवी आर्लेकर को शिकायत देकर मुख्यमंत्री विजय पर दो विपक्षी विधायकों को तोड़ने की कोशिश का आरोप लगाया है। यह दोनों विधायक मरुमलार्चि द्रविड मुनेत्र कषगम से संबंधित हैं, जिन्होंने चुनाव द्रमुक के चुनाव चिन्ह पर जीता था। भारती ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री विजय ने इन विधायकों को इस्तीफा देने और बाद के उपचुनाव में दोबारा जीत दिलाने का आश्वासन दिया था। साथ ही आर्थिक सहायता का भी वादा किया गया। द्रमुक ने इस पूरे मामले की सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक विभाग से जांच कराने की मांग की है।
इसके अलावा द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन के हालिया बयान ने भी तमिलनाडु की राजनीति को और अधिक गर्मा दिया है। चेन्नै में आयोजित एक कार्यक्रम में स्टालिन ने दावा किया कि तमिलगा वेत्रि कषगम की सरकार एक कमजोर अल्पमत सरकार है, जो केवल सहयोगी दलों के सहारे चल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है और यह किसी भी समय गिर सकती है। स्टालिन ने यहां तक कहा कि राज्य में तीन महीने या छह महीने के भीतर फिर से चुनाव हो सकते हैं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से तुरंत चुनावी मोड़ में आने का आह्वान किया। स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय की सरकार पर विकास कार्यों में सुस्ती, कानून व्यवस्था की गिरती स्थिति, बिजली संकट और निवेशकों के राज्य से बाहर जाने जैसे आरोप भी लगाए। वहीं विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता अब पुराने शासन को याद कर रही है और वर्तमान सरकार केवल दिखावे की राजनीति में लगी हुई है। इन बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विपक्ष अब केवल आरोप प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि समय से पहले चुनाव की संभावनाओं को भी राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
उधर, इस विवाद में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड मुनेत्र कषगम भी कूद पड़ी है। पार्टी प्रमुख एडप्पडी के. पलानीस्वामी ने आरोप लगाया कि तमिलगा वेत्रि कषगम खुद अन्य दलों के विधायकों को अपने पक्ष में लाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दों से ध्यान हटाकर सभी दल केवल राजनीतिक गणित में लगे हुए हैं। वहीं कांग्रेस और विदुथलाई चिरुथैगल कषगम जैसे सहयोगी दलों ने सरकार का समर्थन करते हुए द्रमुक पर जनादेश का अनादर करने का आरोप लगाया है।
देखा जाये तो राजनीतिक दृष्टि से यह घटनाक्रम तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। अभिनेता से नेता बने मुख्यमंत्री विजय की सरकार अभी नई है और विपक्ष लगातार उसकी स्थिरता पर सवाल उठा रहा है। ऐसे समय में विधायकों की खरीद फरोख्त के आरोप यह संकेत देते हैं कि राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण तेजी से बढ़ रहा है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो इससे द्रमुक की छवि को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। दूसरी ओर यदि आरोप राजनीतिक हथकंडा साबित होते हैं तो सरकार की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न उठेंगे।
बहरहाल, यह पूरा प्रकरण इस बात का भी संकेत है कि तमिलनाडु की राजनीति अब परंपरागत द्रमुक और अन्नाद्रमुक की सीमाओं से आगे निकल चुकी है। तमिलगा वेत्रि कषगम के उभार ने राज्य की राजनीतिक संरचना को बदल दिया है। नई सत्ता व्यवस्था में दल बदल, गठबंधन राजनीति और विधायकों की निष्ठा को लेकर संघर्ष बढ़ता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच, राजनीतिक बयानबाजी और विधानसभा की गतिविधियां इस विवाद को और अधिक गहरा सकती हैं। फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति में सत्ता बचाने और सत्ता पाने की जंग खुलकर सामने आ चुकी है।