राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में कुख्यात चंबल डकैत जगन गुर्जर की हत्या ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में आतंक का पर्याय रहा पचास वर्षीय जगन गुर्जर सोमवार दोपहर जेल की बैरक में मृत पाया गया। इस घटना ने एक बार फिर राजस्थान की जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि प्रारंभिक जांच में मामला हत्या का माना जा रहा है लेकिन पुलिस और जेल प्रशासन की जांच के साथ ही न्यायिक जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं।
बताया जा रहा है कि धौलपुर जिले के सोने का गुर्जा थाना क्षेत्र के भवूतिपुरा गांव निवासी जगन गुर्जर को दोपहर करीब तीन बजे बैरक में अचेत अवस्था में पाया गया। जेल कर्मियों ने कई बार आवाज लगाई और जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो बैरक खोली गई। बाद में जेल चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला ने बताया कि घटनास्थल के प्रारंभिक निरीक्षण से मामला हत्या का प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल गैंगवार जैसी कोई बात सामने नहीं आई है, बल्कि यह व्यक्तिगत विवाद का परिणाम लगता है क्योंकि बैरक में जगन के साथ केवल एक अन्य कैदी ही बंद था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि जगन गुर्जर के साथ बैरक में बंद कैदी विष्णु जाट पर हत्या का संदेह है। विष्णु वही आरोपी है जो वर्ष 2023 में भरतपुर के चर्चित कुलदीप जघीना हत्याकांड के बाद सुर्खियों में आया था। जेल सूत्रों के अनुसार दोनों के बीच लंबे समय से आपसी वर्चस्व को लेकर विवाद चलता रहता था। घटनास्थल से विष्णु का एक तौलिया बरामद किया गया है और पुलिस को आशंका है कि उसी से गला दबाकर हत्या की गई। जगन के शरीर पर बाहरी चोट के निशान नहीं मिले, लेकिन गला दबाने के संकेत जरूर पाए गए हैं।
हम आपको बता दें कि विष्णु जाट का आपराधिक इतिहास भी काफी चर्चित रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उस पर बाइक चोरी सहित छह मुकदमे दर्ज हैं। साधारण परिवार से आने वाला विष्णु पहले छोटी-मोटी चोरियों में शामिल था। सेवर सेंट्रल जेल में बंद रहने के दौरान उसकी मुलाकात गैंगस्टर पंकज से हुई और वहीं कुलदीप जघीना की हत्या की साजिश रची गई। बाद में बारह जुलाई 2023 को भरतपुर कोर्ट में पेशी पर ले जाए जा रहे कुलदीप जघीना की अमोली टोल प्लाजा पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया था कि विष्णु बस में कुलदीप के पीछे बैठा था और उसी ने पहली गोली चलाई थी। बाद में पुलिस मुठभेड़ में पैर में गोली लगने के बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
दूसरी ओर जगन गुर्जर चंबल के अंतिम कुख्यात डकैतों में गिना जाता था। उसके खिलाफ राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 128 आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें हत्या, रंगदारी, अपहरण, धमकी और लूट जैसे गंभीर अपराध शामिल थे। वर्ष 1994 में उसके खिलाफ पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। 2008 के गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के महल को उड़ाने की धमकी देकर पूरे प्रशासन को हिला दिया था। जगन तीन बार आत्मसमर्पण कर चुका था और चंबल के बीहड़ों में उसका लंबे समय तक दबदबा रहा।
उधर, जगन गुर्जर की हत्या के बाद उसके परिवार में भारी आक्रोश है। उसके पुत्र आसाराम गुर्जर ने आरोप लगाया कि तीन महीने पहले ही जगन को धौलपुर जेल से अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में स्थानांतरित किया गया था। पहले वह अपने भाई पप्पू गुर्जर के साथ एक ही बैरक में बंद था, लेकिन बाद में जेल प्रशासन ने उसे विष्णु जाट की बैरक में भेज दिया। आसाराम ने दावा किया कि उनके पिता को जेल में प्रताड़ित किया जा रहा था और इस संबंध में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म को शिकायत पत्र भी दिया गया था। उन्होंने मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। परिवार को अब पप्पू गुर्जर की सुरक्षा की भी चिंता सता रही है।
इस घटना के बाद धौलपुर और अजमेर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जगन के शव को पोस्टमार्टम के लिए जवाहरलाल नेहरू अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है। शव उसके गांव लाए जाने की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
बताया जा रहा है कि अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल वर्ष 2015 में राज्य के सबसे खतरनाक अपराधियों को रखने के लिए बनाई गई थी। यहां आनंदपाल सिंह गिरोह और लारेंस बिश्नोई गिरोह के सदस्य भी बंद रह चुके हैं। ऐसे में जेल के भीतर हुई यह पहली हत्या प्रशासन के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।
हम आपको याद दिला दें कि राजस्थान की जेलों में इससे पहले भी कई खूनी घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2014 में बीकानेर सेंट्रल जेल में आनंदपाल गिरोह के करीबी बलवीर बानूड़ा की गैंगवार में हत्या कर दी गई थी। वर्ष 2019 में जयपुर सेंट्रल जेल में पाकिस्तानी कैदी शकरुल्लाह की अन्य कैदियों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। वहीं वर्ष 2010 में जोधपुर सेंट्रल जेल में जेलर भारत भूषण भट्ट की एक कैदी ने धारदार हथियार से हत्या कर दी थी। अब अजमेर जेल में जगन गुर्जर की हत्या ने एक बार फिर जेल सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।