केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि अगले तीन साल यह तय करने में अहम होंगे कि क्या ड्रग्स देश पर हावी हो जाएंगे या भारत नशीले पदार्थों के कारोबार को निर्णायक रूप से हराने में सफल होगा। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए, गृह मंत्री ने ड्रग कंट्रोल (2026–2029) पर विज़न डॉक्यूमेंट जारी किया। यह डॉक्यूमेंट ड्रग की समस्या से निपटने के लिए “मांग में कमी, आपूर्ति में कमी और नुकसान में कमी” जैसे पहलुओं पर एक साझा रोडमैप पेश करता है। शाह ने कहा कि 2026 से 2029 के बीच का समय देश की ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई के नतीजे तय करेगा।
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उन्होंने NCB की 2025 की सालाना रिपोर्ट भी जारी की और जम्मू और गुवाहाटी में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के नए ज़ोनल ऑफिस का वर्चुअल उद्घाटन किया। इसके अलावा, शाह ने ‘ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन’ (ऑनलाइन नशीले पदार्थों के निपटान का पखवाड़ा अभियान) भी शुरू किया, जिसके तहत 6,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा कीमत के 2,09,500 किलोग्राम से ज़्यादा नशीले पदार्थों को नष्ट किया जाएगा। इस साल की शुरुआत में, शाह ने ड्रग्स के दुरुपयोग के खिलाफ तीन साल के देशव्यापी अभियान से पहले, सभी केंद्रीय और राज्य सरकारी विभागों को 31 मार्च, 2026 तक एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया था।
तीन साल अहम होंगे
शाह ने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई सिर्फ़ पुलिस या किसी एक एजेंसी की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे देश की सामूहिक लड़ाई है। उन्होंने राज्य सरकारों, केंद्रीय एजेंसियों, सुरक्षा बलों, समाज, शिक्षकों, युवाओं, धार्मिक नेताओं और महिलाओं से इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर भारत को 2047 तक एक विकसित देश बनना है, तो उसे सबसे पहले अपने युवाओं को ड्रग्स से बचाना होगा। इसलिए, ड्रग-मुक्त भारत सिर्फ़ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता और आर्थिक विकास का भी मामला है।
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नार्को-टेररिज्म: सबसे बड़ा खतरा
गृह मंत्री ने कहा कि ड्रग तस्करी अब सिर्फ़ एक गैर-कानूनी धंधा नहीं रह गया है, बल्कि यह नार्को-टेररिज्म (नशीले पदार्थों के व्यापार से जुड़ा आतंकवाद) में बदल गया है। उन्होंने कहा कि ड्रग के व्यापार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल आतंकवादी संगठनों, संगठित अपराध सिंडिकेट और सीमा-पार आतंकी नेटवर्क को फंड देने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत “डेथ ट्रायंगल” और “डेथ क्रिसेंट” के बीच स्थित है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के प्रति बहुत ज़्यादा संवेदनशील हो जाता है।
शाह ने कहा कि तस्कर नशीले पदार्थों को गिराने के लिए ड्रोन जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, शिपिंग कंटेनर, डार्क वेब, क्रिप्टोकरेंसी, ऑनलाइन ऑर्डर और पार्सल डिलीवरी सर्विस का तेज़ी से इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
