उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से मानवाधिकारों को तार-तार करने वाला एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। तितावी थाना क्षेत्र के मंडी गांव में चल रही एक कागज की प्लेट (पेपर प्लेट) बनाने वाली फैक्टरी पर प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर नाबालिगों सहित 12 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया है। अधिकारियों ने मंगलवार को इस बड़ी कार्रवाई की जानकारी साझा की।
अमानवीय हालात और यातना के निशान
अधिकारियों के मुताबिक, मुक्त कराए गए इन मजदूरों की स्थिति बेहद दयनीय थी। उन्हें फैक्टरी परिसर के भीतर बंधक बनाकर बेहद अमानवीय परिस्थितियों में रहने पर मजबूर किया जा रहा था।
शारीरिक प्रताड़ना: मुक्त कराए गए इन बेबस मजदूरों के शरीर पर यातना और चोटों के स्पष्ट निशान मिले हैं, जो यह बयां करने के लिए काफी हैं कि उनके साथ कितनी बर्बरता की जा रही थी।
मजदूरी का शोषण: काम कराने के बदले में इन मजदूरों को वादे के मुताबिक उनका मासिक वेतन (Salary) भी नहीं दिया जा रहा था।
खुफिया सूचना पर आधी रात एक्शन
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) संजय कुमार ने बताया कि पुलिस और प्रशासन को इस फैक्टरी में चल रहे काले कारनामे की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एक टीम का गठन किया गया।
कार्रवाई का विवरण:
कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) राधे श्याम गौड़ के नेतृत्व में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने तितावी थाना क्षेत्र के मंडी गांव स्थित फैक्टरी में अचानक छापेमारी (Raid) की। टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए फैक्टरी परिसर को चारों तरफ से घेर लिया और वहां कैद नाबालिगों सहित सभी 12 बंधुआ मजदूरों को सकुशल बाहर निकाला।
आगे की कानूनी कार्रवाई
प्रशासन ने सभी मुक्त कराए गए मजदूरों को अपनी कस्टडी में लेकर उनके पुनर्वास और इलाज की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस इस मामले में फैक्टरी मालिक और संलिप्त अन्य आरोपियों के खिलाफ बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम और बाल श्रम विरोधी कानूनों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में है।
