राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से लेक्चरर-कोच (माध्यमिक शिक्षा विभाग) परीक्षा-2025 की जारी की गई जनरल अवेयरनेस एंड जनरल साइंस (ग्रुप – बी), पॉलिटिकल साइंस, ज्योग्राफी, बायोलॉजी, संस्कृत, फिजिक्स एवं मैथमैटिक्स की मॉडल आंसर की पर कल से आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आयोग के मुख्य परीक्षा नियंत्रक आशुतोष गुप्ता ने बताया कि यदि किसी अभ्यर्थी को इन मॉडल आंसर-की पर कोई आपत्ति हो तो निर्धारित शुल्क के साथ 17 से 19 जून 2026 को रात्रि 12:00 बजे तक अपनी आपत्ति ऑनलाईन दर्ज करवा सकता है। इस संबंध में विस्तृत सूचना आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है। बिना प्रमाण आपत्ति पर विचार नहीं मॉडल प्रश्न-पत्र आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। आपत्तियां केवल इन मॉडल प्रश्न-पत्रों के क्रम के अनुसार ही दर्ज की जा सकती हैं। हर आपत्ति के साथ प्रामाणिक (स्टैंडर्ड और ऑथेंटिक) पुस्तकों से प्रमाण अटैच करना जरूरी है। बिना प्रमाण के आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा। आपत्ति केवल अभ्यर्थी स्वयं ही दर्ज कर सकते हैं; कोई अन्य व्यक्ति इसमें शामिल नहीं हो सकता। फीस और पेमेंट की प्रोसेस यहां करें कॉन्टेक्ट ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करने में किसी प्रकार की तकनीकी कठिनाई होने पर अभ्यर्थी recruitmenthelpdesk@rajasthan.gov.in पर ईमेल से अथवा फोन नम्बर 9352323625 और 7340557555 पर संपर्क कर सकते हैं।
लेक्चरर-कोच एग्जाम-कल से दर्ज कराएं ऑब्जेक्शन:RPSC ने जारी की थी 7 सब्जेक्ट की मॉडल आंसर-की, 19 जून लास्ट डेट
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
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सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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