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चिट्ठी में सिसोदिया ने कहा है कि जस्टिस शर्मा पर से उनका भरोसा उठ गया है और उनके पास सत्याग्रह का सहारा लेने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा है। उन्होंने यह भी लिखा कि उन्हें जस्टिस शर्मा से न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने दावा किया कि ‘उनके बच्चों का भविष्य सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के हाथों में है।
दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल के सत्याग्रह वाले रास्ते पर चलते हुए दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को एक चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने कहा है कि आबकारी नीति मामले में अपने केस की पैरवी के लिए न तो वह और न ही उनके वकील कोर्ट में पेश होंगे। इस चिट्ठी में सिसोदिया ने कहा है कि जस्टिस शर्मा पर से उनका भरोसा उठ गया है और उनके पास सत्याग्रह का सहारा लेने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा है। उन्होंने यह भी लिखा कि उन्हें जस्टिस शर्मा से न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने दावा किया कि “उनके बच्चों का भविष्य सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के हाथों में है।
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सोमवार को जस्टिस शर्मा को लिखी अपनी चिट्ठी में केजरीवाल ने ‘हितों के टकराव’ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनके बच्चे, जो केंद्र सरकार के लिए पैनल वकील के तौर पर काम करते हैं, उनके सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ पेशेवर संबंध हैं। तुषार मेहता ही इस मामले में उनके खिलाफ पेश हो रहे हैं। उन्होंने लिखा कि मैंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को यह पत्र लिखा है, जिसमें उन्हें सूचित किया है कि सत्याग्रह के गांधीवादी सिद्धांतों का पालन करते हुए, मेरे लिए उनके न्यायालय में इस मामले को आगे बढ़ाना संभव नहीं होगा। चाहे वह स्वयं उपस्थित होकर हो या किसी वकील के माध्यम से। केजरीवाल ने कहा कि वह आबकारी नीति मामले में जस्टिस शर्मा के सामने पेश नहीं होंगे; उन्होंने कहा कि इस मामले की सुनवाई जारी रखने का उनका फ़ैसला न्याय का गंभीर हनन है।
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केजरीवाल और सिसोदिया के ये दोनों पत्र जस्टिस शर्मा के उस फ़ैसले के कुछ ही दिन बाद आए, जिसमें उन्होंने इस मामले से खुद को अलग करने की उनकी अपील को ठुकरा दिया था। केजरीवाल ने कहा कि वह इस मामले में न तो खुद और न ही किसी वकील के ज़रिए जज के सामने पेश होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने कानूनी विकल्प खुले रख रहे हैं और जस्टिस शर्मा के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखते हैं। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि उनके पेश न होने पर उनके खिलाफ सख़्त कदम उठाए जा सकते हैं, जिनमें वारंट जारी करना भी शामिल है।
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