अदिवि शेष और मृणाल ठाकुर स्टारर फिल्म ‘Dacoit: ओका प्रेमा कथा’ रोमांस और बदले की एक गहन कहानी पेश करती है, जो आंध्र-कर्नाटक सीमा की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म एक पूर्व डकैत हरि के इर्द-गिर्द घूमती है, जो जेल से छूटने के बाद अपनी पूर्व प्रेमिका से बदला लेना चाहता है, जिसे वह अपनी बर्बादी का जिम्मेदार मानता है। हालाँकि फिल्म का पहला हाफ सस्पेंस और सधी हुई पटकथा के साथ दर्शकों को बांधने में सफल रहता है, लेकिन दूसरे हाफ में एक्शन और इमोशन के बीच संतुलन बिठाने में यह थोड़ी कमजोर पड़ जाती है। धनुष भास्कर की शानदार सिनेमैटोग्राफी और मुख्य कलाकारों के दमदार अभिनय के बावजूद, कहानी की दुनिया का शहरी अहसास और डकैती के दृश्यों का फीकापन इसे एक बेहतरीन फिल्म बनने से रोक देता है। कुल मिलाकर, यह एक ऐसी फिल्म है जो अपनी महत्वाकांक्षी कहानी को पूरी तरह से पर्दे पर उतारने में थोड़ी पीछे रह जाती है।
कहानी: जेल, बदला और पुरानी मोहब्बत
फिल्म की कहानी हरिदास उर्फ हरि (अदिवि शेष) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो 13 साल जेल में काटने के बाद बाहर आता है। उसके दिल में अपनी पूर्व प्रेमिका जूलियट उर्फ सरस्वती (मृणाल ठाकुर) के लिए नफरत और बदले की आग है, जिसे वह अपनी बर्बादी का ज़िम्मेदार मानता है। आखिर हरि जेल क्यों गया और क्या वह अपना बदला ले पाएगा? यही फिल्म का मुख्य आधार है। कागज पर यह कहानी दिलचस्प लगती है और पहला हाफ सधी हुई पटकथा के साथ दर्शकों को बांधे रखता है।
कमियां: कमजोर परिवेश और फीका दूसरा हाफ
फिल्म की सबसे बड़ी समस्या इसका वातावरण है। कहानी आंध्र-कर्नाटक सीमा की है, लेकिन फिल्म के सेट, किरदारों का पहनावा और माहौल शहरी हैदराबाद जैसा लगता है।
एग्जीक्यूशन में कमी: फिल्म के दूसरे हाफ में आने वाले ट्विस्ट कागज पर तो अच्छे हैं, लेकिन पर्दे पर वे दर्शकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने में विफल रहते हैं।
असरहीन एक्शन: ‘Dacoit’ नाम होने के बावजूद, फिल्म में दिखाई गई डकैतियां और लूटपाट के दृश्य काफी फीके और जोखिम-मुक्त लगते हैं।
असंतुलन: जैसे थलपति विजय की ‘लियो’ में देखा गया, यहाँ भी प्यार और एक्शन को एक साथ दिखाने के चक्कर में फिल्म अपना संतुलन खो देती है।
अभिनय: शेष और मृणाल का दमदार प्रदर्शन
पूरी फिल्म का बोझ अदिवि शेष और मृणाल ठाकुर ने अपने कंधों पर बखूबी उठाया है।
अदिवि शेष: शेष ने भावनात्मक दृश्यों में शानदार काम किया है, हालांकि एक ‘डकैत’ के रूप में वे कुछ ज़्यादा ही सभ्य (पॉलिश) नज़र आते हैं।
मृणाल ठाकुर: सरस्वती के रूप में मृणाल इस फिल्म की सबसे विश्वसनीय कड़ी हैं। उन्होंने अपने किरदार के उतार-चढ़ाव को बड़ी सहजता से निभाया है।
अन्य कलाकार: अनुराग कश्यप का काम ठीक है, लेकिन प्रकाश राज और सुनील जैसे दिग्गज कलाकारों के टैलेंट का सही इस्तेमाल नहीं हो पाया।
तकनीकी पक्ष: सिनेमैटोग्राफी और निर्देशन
डेब्यू डायरेक्टर शेनिल देव ने आत्मविश्वास के साथ निर्देशन किया है और कुछ दिलचस्प पल बुनने में कामयाब रहे हैं।
सिनेमैटोग्राफी: धनुष भास्कर की सिनेमैटोग्राफी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। चेज़ और एक्शन दृश्यों को उन्होंने खूबसूरती से कैमरे में कैद किया है।
संगीत: ज्ञान का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को मजबूती देता है, लेकिन भीम सिसिरोलियो का संगीत थोड़ा फीका है। फिल्म में एक दमदार प्रेम गीत की कमी खलती है जो किरदारों के दर्द को बयां कर सके।
निष्कर्ष
‘Dacoit’ एक ऐसी फिल्म है जो कुछ अलग करने की कोशिश तो करती है, लेकिन तकनीकी और भावनात्मक तालमेल की कमी के कारण यह एक औसत थ्रिलर बनकर रह जाती है। अगर आप अदिवि शेष और मृणाल ठाकुर के अभिनय के प्रशंसक हैं, तो इसे एक बार देखा जा सकता है।
