भारत में गर्मियों के मौसम में तापमान कई बार 40 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच जाता है। ऐसे में कार का एयर कंडीशनर केवल आराम का साधन नहीं बल्कि एक जरूरत बन जाता है। लंबी दूरी तय करते समय अगर कार का एसी सही से काम न करे तो सफर काफी असहज हो सकता है। अक्सर देखा जाता है कि कुछ साल पुरानी कारों में एसी की कूलिंग धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसके पीछे कई तकनीकी कारण हो सकते हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि समय रहते इन कारणों को पहचान लिया जाए तो बिना ज्यादा खर्च किए समस्या का समाधान किया जा सकता है।
गर्मियों में क्यों कम हो जाती है एसी की कूलिंग
गर्मियों में सड़कों पर धूल, प्रदूषण और ज्यादा तापमान के कारण कार के एयर कंडीशनिंग सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यदि समय-समय पर इसकी सर्विसिंग नहीं करवाई जाती, तो एसी की कार्यक्षमता कम होने लगती है।
कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिनसे आप समझ सकते हैं कि एसी में समस्या आ रही है। जैसे कि एसी वेंट से हवा कम आना, केबिन को ठंडा होने में ज्यादा समय लगना या फिर ठंडी हवा की जगह हल्की गर्म हवा आना। ये सभी संकेत बताते हैं कि एसी सिस्टम को जांचने की जरूरत है।
एयर फिल्टर गंदा होने से घट सकती है कूलिंग
कार के एसी सिस्टम में लगा एयर फिल्टर धूल और गंदगी को रोकने का काम करता है। लेकिन समय के साथ इसमें धूल-मिट्टी जमा हो जाती है, जिससे हवा का फ्लो कम हो जाता है।
अगर फिल्टर काफी ज्यादा गंदा हो जाए तो एसी से ठंडी हवा बाहर नहीं आ पाती। इसलिए समय-समय पर एयर फिल्टर की सफाई करवाना जरूरी है। अगर फिल्टर ज्यादा खराब हो गया हो तो उसे बदल देना ही बेहतर विकल्प होता है।
एयर फिल्टर कहां होता है और इसकी कीमत कितनी है
अधिकतर कारों में एसी फिल्टर ग्लव बॉक्स के पीछे की तरफ लगा होता है। कई मामलों में इसे आप खुद भी निकालकर साफ कर सकते हैं, लेकिन अगर जानकारी न हो तो मैकेनिक की मदद लेना ही सुरक्षित रहता है।
एसी फिल्टर की कीमत कार के मॉडल के अनुसार अलग-अलग होती है। आम तौर पर इसकी कीमत लगभग 200 रुपये से शुरू होकर 1000 रुपये या उससे अधिक तक हो सकती है। वहीं महंगी और लग्जरी कारों में यह कीमत इससे ज्यादा भी हो सकती है।
रेफ्रिजरेंट गैस कम होने से भी घटती है कूलिंग
एसी सिस्टम में मौजूद रेफ्रिजरेंट गैस केबिन की गर्मी को बाहर निकालने का काम करती है। समय के साथ पाइप या जॉइंट में हल्के लीक की वजह से इसकी मात्रा कम हो सकती है।
जब गैस कम हो जाती है तो एसी चलता तो रहता है, लेकिन उसकी कूलिंग क्षमता काफी घट जाती है। ऐसी स्थिति में सर्विस सेंटर पर जाकर पहले लीक की जांच करवानी चाहिए और फिर जरूरत होने पर गैस भरवानी चाहिए।
कंडेंसर पर जमा गंदगी भी बनती है कारण
कार के आगे रेडिएटर के पास एसी कंडेंसर लगा होता है, जो सिस्टम से निकलने वाली गर्मी को बाहर निकालने में मदद करता है। लेकिन समय के साथ इस पर धूल, कीचड़ और छोटे-छोटे कचरे जमा हो सकते हैं।
अगर कंडेंसर ब्लॉक हो जाए तो गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और एसी की कूलिंग कम हो जाती है। इसलिए सर्विसिंग के दौरान कंडेंसर की सफाई भी जरूरी होती है।
कंप्रेसर की खराबी से भी आ सकती है समस्या
एसी का कंप्रेसर पूरे सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यह रेफ्रिजरेंट को पूरे सिस्टम में घुमाने और आवश्यक दबाव बनाए रखने का काम करता है।
अगर कंप्रेसर या उसका क्लच खराब हो जाए तो एसी की कूलिंग प्रभावित हो सकती है। इस तरह की समस्या आमतौर पर तकनीकी जांच के बाद ही ठीक की जा सकती है।
इलेक्ट्रिकल समस्या भी हो सकती है वजह
आधुनिक कारों में एसी सिस्टम कई इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स पर निर्भर करता है, जैसे सेंसर, रिले और कंट्रोल मॉड्यूल। यदि इनमें से किसी हिस्से में खराबी आ जाए तो एसी सही तरह से काम नहीं करता। ऐसी समस्याएं आमतौर पर डायग्नोस्टिक टेस्ट के जरिए आसानी से पता लगाई जा सकती हैं।
एसी जल्दी ठंडा करने के आसान टिप्स
कुछ छोटी-छोटी आदतें अपनाकर भी आप एसी की कूलिंग बेहतर बना सकते हैं।
– कार में बैठते ही तुरंत एसी ऑन न करें।
– पहले 1-2 मिनट के लिए खिड़कियां खोलकर गर्म हवा बाहर निकालें।
– इसके बाद एसी चालू करें और कुछ समय बाद रीसर्कुलेशन मोड ऑन करें।
इससे केबिन जल्दी ठंडा हो जाता है और एसी पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ता।
समय पर सर्विसिंग क्यों है जरूरी
कार के एसी की नियमित सर्विसिंग करवाने से उसकी कूलिंग बेहतर बनी रहती है। इसके अलावा इससे ईंधन की खपत भी कम होती है और महंगे रिपेयर से बचाव होता है। इसलिए गर्मियों की शुरुआत से पहले एसी सिस्टम की जांच करवाना हमेशा समझदारी भरा कदम माना जाता है।
– डॉ. अनिमेष शर्मा