आज के डिजिटल दौर में हमारी लगभग हर गतिविधि इंटरनेट से जुड़ी हुई है। बैंकिंग से लेकर सोशल मीडिया और ऑनलाइन शॉपिंग तक, हम कई प्लेटफॉर्म पर अपना निजी डेटा साझा करते हैं। ऐसे में डेटा ब्रीच (Data Breach) की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे ईमेल, पासवर्ड और बैंकिंग डिटेल्स जैसी संवेदनशील जानकारी खतरे में पड़ सकती है। अगर आपको कभी ईमेल में “Notice of Data Breach” जैसा संदेश मिले तो उसे हल्के में लेना बड़ी गलती हो सकती है। कई लोग ऐसे ईमेल पढ़कर सोचते हैं कि अभी कोई नुकसान नहीं हुआ है, इसलिए चिंता की बात नहीं है। लेकिन सच्चाई यह है कि साइबर अपराधी चोरी किए गए डेटा का इस्तेमाल कभी भी कर सकते हैं। खासकर भारत जैसे देश में, जहां UPI, नेट बैंकिंग और डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, वहां डेटा ब्रीच का खतरा और भी गंभीर हो जाता है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय कुछ जरूरी सुरक्षा कदम उठाकर आप अपने अकाउंट और व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रख सकते हैं।
भारत में बढ़ते डेटा ब्रीच के मामले
पिछले कुछ वर्षों में भारत में साइबर हमलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2025 और 2026 की शुरुआत में कई बड़ी कंपनियां और संस्थान डेटा ब्रीच का शिकार हुए। अक्टूबर 2025 में एक बड़े ग्रोसरी रिटेल नेटवर्क पर हुए साइबर हमले में करीब 6 लाख ग्राहकों और 1000 कर्मचारियों का डेटा लीक हो गया। इसमें आधार कार्ड और बैंकिंग डिटेल्स जैसी संवेदनशील जानकारी भी शामिल थी। इसी तरह जनवरी 2025 में टाटा टेक्नोलॉजीज को रैंसमवेयर हमले का सामना करना पड़ा, जिससे उनके कुछ आईटी सिस्टम प्रभावित हुए। वहीं एक प्रमुख भारतीय पेमेंट सिस्टम के प्रोडक्शन डेटाबेस और सोर्स कोड तक भी अनधिकृत पहुंच मिलने की खबर सामने आई थी, जिसे बाद में डार्क वेब पर बेचने की कोशिश की गई। फरवरी 2025 में एंजेल वन के क्लाउड संसाधनों से छेड़छाड़ की रिपोर्ट आई, जबकि हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी निवा बुपा को भी ग्राहकों के डेटा लीक की जांच करनी पड़ी। इसके अलावा क्लाउड स्टोरेज की गलत सेटिंग के कारण 22 टेराबाइट से अधिक संवेदनशील डेटा सार्वजनिक हो गया था।
साइबर हमलों के डराने वाले आंकड़े
साइबर सुरक्षा से जुड़े आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2026 में भारत के संगठनों पर औसतन हर सप्ताह लगभग 3,195 साइबर हमले हो रहे हैं। सबसे ज्यादा निशाने पर शिक्षा क्षेत्र, सरकारी संस्थान और व्यावसायिक सेवाएं रही हैं। वहीं 2025 के दौरान भारत में 26.5 करोड़ से अधिक साइबर हमले दर्ज किए गए। भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) ने 2025 में करीब 29.44 लाख साइबर घटनाओं को संभाला। इनमें ट्रोजन और मालवेयर सबसे बड़े खतरे के रूप में सामने आए।
इसे भी पढ़ें: Future of Computing: 11.2-इंच 3.2K डिस्प्ले और 9200mAh बैटरी, Xiaomi Pad 8 बनेगा गेम चेंजर
1. सबसे पहले अपना ईमेल अकाउंट सुरक्षित करें
ईमेल अकाउंट को अक्सर सभी डिजिटल सेवाओं की “मास्टर की” कहा जाता है। अगर किसी को आपके ईमेल का एक्सेस मिल गया, तो वह आसानी से आपके बैंकिंग ऐप, सोशल मीडिया और अन्य अकाउंट्स के पासवर्ड रीसेट कर सकता है। अगर आपको लगता है कि आपका ईमेल पासवर्ड लीक हो गया है, तो उसे तुरंत बदलें। नया पासवर्ड लंबा और यूनिक होना चाहिए, जिसे आपने पहले कहीं इस्तेमाल न किया हो।
2. टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूर चालू करें
सिर्फ पासवर्ड पर निर्भर रहना आज के समय में सुरक्षित नहीं है। इसलिए अपने ईमेल और अन्य महत्वपूर्ण अकाउंट्स पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) जरूर सक्रिय करें। इसमें लॉगिन करते समय पासवर्ड के साथ एक अतिरिक्त कोड या बायोमेट्रिक पहचान की जरूरत होती है। यह सुरक्षा की दूसरी परत बनाता है और हैकिंग के खतरे को काफी कम कर देता है।
3. सभी महत्वपूर्ण पासवर्ड तुरंत बदलें
अगर किसी वेबसाइट या सेवा में डेटा ब्रीच हुआ है, तो वहां इस्तेमाल किया गया पासवर्ड तुरंत बदल दें। एक ही पासवर्ड को कई वेबसाइट्स पर इस्तेमाल करना सबसे बड़ी गलती होती है। हैकर्स लीक हुए पासवर्ड को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर टेस्ट करके आपके अन्य अकाउंट्स तक भी पहुंच सकते हैं। मजबूत पासवर्ड कम से कम 14 कैरेक्टर का होना चाहिए और उसमें अक्षर, अंक और विशेष चिन्ह शामिल होने चाहिए।
4. संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखें
डेटा ब्रीच के बाद यह जरूरी है कि आप अपने अकाउंट्स की गतिविधियों पर नजर रखें। अपने बैंक और यूपीआई ट्रांजेक्शन हिस्ट्री को ध्यान से देखें। अगर कोई अनजान ट्रांजेक्शन दिखाई दे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। साथ ही ईमेल सेटिंग्स में जाकर यह भी जांच लें कि कहीं कोई अनजान ईमेल फॉरवर्डिंग नियम तो नहीं बना दिया गया है।
5. गैर-जरूरी एप्स और डिवाइस का एक्सेस हटाएं
समय के साथ हम कई ऐप्स और डिवाइस को अपने अकाउंट से जोड़ देते हैं। लेकिन पुराने या इस्तेमाल न होने वाले एप्स सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। इसलिए अकाउंट सेटिंग्स में जाकर सभी थर्ड-पार्टी ऐप्स और पुराने डिवाइस का एक्सेस हटा दें।
6. भविष्य में भी सतर्क रहना जरूरी
साइबर अपराधी हमेशा नए तरीके खोजते रहते हैं। कई बार वे चोरी किए गए डेटा का इस्तेमाल महीनों बाद करते हैं। इसलिए पासवर्ड मैनेजर और सिक्योरिटी अलर्ट जैसी सेवाओं का उपयोग करें ताकि आपको किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत जानकारी मिल सके। याद रखें, डेटा ब्रीच परेशान करने वाला जरूर हो सकता है, लेकिन अगर आप समय रहते सही कदम उठाते हैं तो अपने डिजिटल जीवन को सुरक्षित रख सकते हैं।
– डॉ. अनिमेष शर्मा
