नियति का खेल भी कितना क्रूर हो सकता है, इसका अंदाज़ा झारखंड के लातेहार जिले के चंदवा के रहने वाले एक परिवार की कहानी से लगाया जा सकता है। जिस परिवार ने अपने मुखिया की जान बचाने के लिए पाई-पाई जोड़ी, रिश्तेदारों से कर्ज लिया और ज़मीन बेचने तक की तैयारी कर ली थी, उसी परिवार के तीन सदस्यों सहित सात लोगों की एक विमान हादसे में दर्दनाक मौत हो गई।
जिस घर की देहरी पर अपनों को बचाने की आखिरी उम्मीद में प्रार्थनाएं की जा रही थीं, आज वहां सिसकियों का सैलाब उमड़ पड़ा है। लातेहार के चंदवा में रहने वाले एक छोटे से होटल संचालक संजय के परिवार ने सोचा भी न था कि वे मौत को मात देने के लिए जो 8 लाख रुपये का कर्ज अपनों से मांगकर लाए हैं, वही रकम उनके कफ़न की कीमत बन जाएगी।
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झुलसे हुए पति की उखड़ती सांसों को बचाने के लिए पत्नी अर्चना ने अपनी ममता और भविष्य की जमापूंजी तक दांव पर लगा दी थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस एयर एंबुलेंस को वे ‘जीवनदायिनी’ समझकर आसमान की ओर भेज रहे थे, वह चंद मिनटों में काल का ग्रास बन गई और एक पूरे परिवार के अस्तित्व को चतरा के घने जंगलों की आग में हमेशा-हमेशा के लिए भस्म कर दिया। अब न वह कर्ज चुकाने वाला कोई बचा है, न ही वह उम्मीद जिसे बचाने के लिए एक गरीब ने अपनी ज़मीन तक बेचने की कसम खाई थी।
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मृतक के भाई अजय ने इंडिया टुडे को बताया कि कैसे परिवार ने संजय के इलाज के लिए अपनी प्रॉपर्टी और ज़मीन बेचने के बारे में भी सोचा था। फिर परिवार ने दिल्ली के प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज का खर्च उठाने के लिए दोस्तों और शुभचिंतकों से लोन लिया और पैसे उधार लिए, साथ ही एयर एम्बुलेंस का किराया भी दिया। झारखंड के लातेहार में मृतक के घर पर दोस्त और रिश्तेदार इकट्ठा हुए।
संजय पिछले सोमवार को चंदवा में अपने मामूली होटल में बिजली के शॉर्ट सर्किट से आग लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे। परिवार का अकेला कमाने वाला, काम के दौरान वह बुरी तरह जल गया। उसकी हालत बिगड़ने और लोकल इलाज के ऑप्शन खत्म होने पर, परिवार ने उसे बेहतर इलाज के लिए नई दिल्ली के सर गंगा राम हॉस्पिटल में शिफ्ट करने का फैसला किया। संजय के साथ, उसकी पत्नी अर्चना और उसका रिश्तेदार ध्रुव भी उस बुरी एयर एम्बुलेंस में सवार हुए।
सोमवार को, एयर एम्बुलेंस रांची से संजय, उसकी पत्नी अर्चना, रिश्तेदार ध्रुव, मेडिकल स्टाफ और क्रू मेंबर्स को लेकर निकली थी। टेकऑफ के कुछ ही देर बाद, एयरक्राफ्ट चतरा जिले में क्रैश हो गया। उसमें सवार सात लोगों में से कोई भी नहीं बचा।
मरने वालों की पहचान कैप्टन विवेक विकास भगत, पायलट-इन-कमांड, और कैप्टन सवराजदीप सिंह, को-पायलट के तौर पर हुई है। मेडिकल टीम और पैसेंजर्स की पहचान मरीज़ संजय कुमार (41); अटेंडेंट अर्चना देवी और धुरु कुमार; डॉ. विकास कुमार गुप्ता; और पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा के तौर पर हुई।
VIDEO | Jharkhand air ambulance crash: A relative of one of the victims, says, “Sanjay Prasad had suffered severe burns. He was admitted to a hospital. There was no improvement in his condition during treatment, so we wanted to shift him to Delhi. In that process, we arranged a… pic.twitter.com/v22xhSR6KC
— Press Trust of India (@PTI_News) February 24, 2026
#WATCH | Air Ambulance crash in Jharkhand | Jharkhand Health Minister Irfan Ansari visits Sadar Hospital Chatra, where the bodies of the deceased in the air ambulance crash in Chatra late last night are kept.
A total of 7 people lost their lives in the air crash. pic.twitter.com/MGrqcEN2PC
— ANI (@ANI) February 24, 2026
