युद्ध के मैदान में सिकंदर खड़ा है। सामने एक रथ पड़ी है और उस पर एक लाश पड़ी है। ये लाश उस राजा की होती है जो धरती पर सबसे बड़े साम्राज्य का अधिनायक था। सिकंदर अपने दुश्मन की मौत से दुखी था। उसे जिंदा पकड़ना चाहता था। निराशा से भरा सिकंदर राजा के मृत शरीर के पास जाता है। उसकी ऊंगली में से अंगूठी उतारकर खुद पहन लेता है। इसी के साथ मिसिडोनिया का सिकंदर पर्शिया का सुल्तान बन जाता है। सिकंदर ने जब पर्शिया पर आक्रमण किया तो वहां डेरियस III का शासन था। सिकंदर की जीत के बाद, फारसी साम्राज्य का पतन हो गया, और सिकंदर ने एक विशाल साम्राज्य पर शासन करना शुरू कर दिया। सिकंदर की मौत के बाद 200 सालों तक फारस सामंतों के कब्जे में रहा। सातवीं सदी में ईरान में इस्लाम आया। इससे पहले ईरान में जरदोश्त के धर्म के अनुयायी रहते थे। ईरान के इतिहास को मोटा माटी हम तीन हिस्सों में बांट सकते हैं। 630 ईसवी से पहले, 630 ईसवी के बाद और 1800 के बाद। एक-एक कर इन्हें समझते हैं। शुरुआत ईसा से 2000 साल पहले से करते हैं।
ईरान को पहले पर्शिया कहा जाता था या फारस भी कहते थे। 2000 साल पहले यूरेशिया यानी यूरोप और एशिया के बीच बड़े-बड़े मैदानों में रहने वाले कबीलाई लोग उस इलाके में आए जिसे आज ईरान कहा जाता है ईरान में सबसे पहले जिन लोगों का निवास था उन्हें एलेमाइट कहते थे धीरे-धीरे राजशाही की शुरुआत हुई और ईरान में जो साम्राज्य उपजा उसे कहा गया असीरियन साम्राज्य। असीरियन के बाद मेडियन नाम का एंपायर स्थापित हुआ इन लोगों की राजधानी थी। हमदान राजाओं की बात करें तो ईरान के इतिहास में एक बड़े महान राजा का नाम था सायरस द ग्रेट जिसने मेडियन साम्राज्य को हराकर एकमेनड एंपायर की स्थापना की। सायरस ने ईरान का साम्राज्य पूर्वी यूरोप तक फैलाया और उन्हीं के दौर में हिंदुस्तान का उत्तरी हिस्सा मसलन अफगानिस्तान और सिंधु नदी के पश्चिम का इलाका ईरान के कब्जे में चला गया। सायरस को ग्रेट सिर्फ इसीलिए नहीं कहा जाता। सायरस एक उदारवादी राजा थे। क्षत्रप यह शब्द सायरस के दौर से निकला है उनके राज्य में अलग-अलग इलाकों में क्षत्रप नियुक्त किए गए जो जनता की भलाई के लिए काम करते थे। इसके अलावा सायरस ने जब बेबीलोन को जीता तो वहां के गुलाम यहूदियों को आजाद कर उन्हें वापस जेरूसलम जाने की इजाजत दी। इसी के चलते यहूदी लोग भी सायरस का बड़ा सम्मान करते हैं।
इसी के चलते यहूदी लोग भी सायरस का बड़ा सम्मान करते हैं यहूदी इतिहास के अनुसार इस घटना के बाद यहूदी वापस जेरूसलम गए और वहां अपना मंदिर बनाया। सायरस के बाद डेरियस जर्क्स नाम के राजा हुए जिनके समय में फारस का साम्राज्य और फला फूला। टेरिस के समय तो फारस का साम्राज्य इस कदर फैल चुका था कि दुनिया की 44 प्रतिशत जनता पर फारस रूल करता था। फारस पर 331 बीसी तक एकमेनड एंपायर का राज रहा। इस दौरान उनके राजाओं से कुछ गलतियां भी हुई इनमें सबसे बड़ी गलती थी। ग्रीस और मेसेडोनिया पर आक्रमण इस आक्रमण का बदला लेने के लिए मेसेडोनिया के राजा सिकंदर ने फारस पर आक्रमण किया। सैन्य बल में कमजोर होने के बावजूद सिकंदर ने फारस के राजा डेरियस को हरा दिया। कहानी कहती है कि सिकंदर से संधि के लिए डेरियस ने कई खत लिखे। सिकंदर ने जवाब दिया आगे से जब भी खत लिखोगे मुझे अपने बराबर संबोधित नहीं करोगे तुम्हारे लिए मैं किंग ऑफ एशिया हूं। फारस पर कब्जे के बाद सिकंदर भारत आया, लेकिन विश्व विजय का सपना लेकर उसे लौटना पड़ा।
सिकंदर की असमय मृत्यु के बाद फारस पर सैल्युकेट वंश ने शासन किया उनके बाद पार्थियन वंश आया 200 साल तक फारस सामंतों के कब्जे में रहा। फिर एक और ताकतवर साम्राज्य ससानियन का उदय हुआ जिसके फाउंडर का नाम अर्धशीर था। अर्धशीर के बाद शाहपुर राजा बने। शाहपुर को ईरान में शाहों के शाह शहंशाह के तौर पर जाना जाता है क्योंकि इनके पाले में अनोखा रिकॉर्ड है। शाहपुर वो पहले राजा थे जिन्होंने महान रोमन साम्राज्य के एक राजा वैलेरियन को युद्ध बंदी बना लिया था। इस्लाम के आगमन के बाद लगभग दो सदी तक फारस पर अरबों का रूल रहा। इस दौरान तुर्क कबीलों का भी पर्शिया में आगमन हुआ अब्बासी खिलाफत के समय तुर्क लड़ाकों को गुलामों की तरह फौज में भर्ती किया जाता था। कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली पर राज किया था। वहीं गजनवी वंश जिनके एक शासक महमूद गजनवी ने भारत पर आक्रमण किया। इस वंश ने भी कुछ वक्त के ईरान पर शासन किया था।
11वीं सदी में फारस पर सेलजुक वंश का राज हो गया यह दौर इस्लाम के गोल्डन पीरियड के तौर पर जाना जाता है जब पर्शिया में एक बार फिर फारसी भाषा का उदय हुआ।