जापान की अर्थव्यवस्था ने वर्ष 2025 के समापन पर मिश्रित संकेत दिए हैं। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक जापान ने अक्टूबर-दिसंबर 2025 की तिमाही में वार्षिक आधार पर मात्र 0.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। हालांकि यह वृद्धि दर बहुत मामूली है, लेकिन इसने देश को ‘तकनीकी मंदी’ (Technical Recession) के जाल में फंसने से बचा लिया है।
इसे भी पढ़ें: Lucknow Civil Court में बम की धमकी से हड़कंप, Bomb Squad और डॉग स्क्वॉड ने संभाला मोर्चा
सोमवार को जारी एक सरकारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
नवीनतम मौसमी रूप से समायोजित प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर में निजी उपभोग में 0.4 प्रतिशत की वार्षिक दर से वृद्धि दर्ज की गई हालांकि निर्यात में 1.1 प्रतिशत की गिरावट ने इसे बेअसर कर दिया।
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून में 0.5 प्रतिशत की वृद्धि के बाद, जुलाई-सितंबर में जापान की सकल घरेल उत्पाद (जीडीपी) में तिमाही आधार पर 0.7 प्रतिशत की गिरावट आई।
इसे भी पढ़ें: भारत का चीनी निर्यात बढ़ा! फरवरी तक 2 लाख टन का आंकड़ा पार, UAE बना सबसे बड़ा खरीदार
चूंकि अर्थव्यवस्था ने पिछली तिमाही में फिर से वृद्धि दर्ज की इसलिए देश तकनीकी मंदी से बाल-बाल बच गया। लगातार दो तिमाहियों में संकुचन से तकनीकी मंदी की स्थिति उत्पन्न होती है।
मंत्रिमंडल कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर में तिमाही आधार पर अर्थव्यवस्था में 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2025 की 1.1 प्रतिशत की वृद्धि 2022 के बाद सबसे अधिक है जब जापान कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण हुए व्यवधानों से उबर रहा था।
2025 का प्रदर्शन: 2022 के बाद सबसे बेहतर वर्ष
भले ही अंतिम तिमाही सुस्त रही हो, लेकिन पूरे वर्ष 2025 के लिए जापान की कुल वृद्धि दर 1.1 प्रतिशत रही। यह 2022 के बाद से जापान की सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि दर है। 2022 में जापान कोविड-19 महामारी के कारण हुए आर्थिक व्यवधानों से उबरने की कोशिश कर रहा था।
भविष्य का अनुमान
जापान के मंत्रिमंडल कार्यालय (Cabinet Office) की रिपोर्ट के अनुसार, निकट भविष्य में अर्थव्यवस्था में बहुत तेज उछाल की उम्मीद नहीं है। सरकार का अनुमान है कि आने वाले समय में जापानी अर्थव्यवस्था औसतन 0.6 प्रतिशत की धीमी लेकिन स्थिर दर से आगे बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जापान के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने निर्यात को फिर से पटरी पर लाना और घरेलू उपभोग को लंबे समय तक बनाए रखना होगा, ताकि आर्थिक रिकवरी को मजबूती मिल सके।
