राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से डिप्टी कमांडेंट (गृह रक्षा विभाग) भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया। ये इस साल की पहली परीक्षा है, जो दोपहर 12 बजे से शुरू हुई। एक घंटे पहले यानि 11 बजे तक सभी सेंटर पर चेकिंग कर प्रवेश दिया गया। अजमेर जिला मुख्यालय पर हुई इस परीक्षा के लिए 17 सेंटर बनाए गए। चार पदों पर हो रही इस परीक्षा में करीब चार हजार 221 कैंडिडेट्स रजिस्टर्ड थे। इनमें से 255 शामिल हुए। 4 में से 3 बैकलॉग के पद थे। 2 एससी एवं 1 एसटी श्रेणी का है। केवल एक पद ओबीसी सामान्य श्रेणी का है। ये बैकलॉग के पद 2014 की भर्ती के हैं, जिन्हें दूसरी बार केरी फॉरवर्ड किया गया है। निशुल्क आवेदन के कारण फॉर्म तो जनरल केटेगरी वालों ने भी भर दिया होगा। बाद में एग्जाम देने नहीं आए। इसीलिए उपस्थिति इतनी कम रही। परीक्षा में ओएमआर शीट के पांचवें विकल्प को भरने के लिए 10 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर मूल आधार कार्ड (रंगीन प्रिंट) से एन्ट्री दी गई। मूल आधार कार्ड पर पुरानी अथवा अस्पष्ट फोटो होने पर मूल मतदाता पहचान-पत्र, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस दिखाना पड़ा। आयोग की ओर से सभी कैंडिडेट्स से अपील की गई कि किसी दलाल, मीडिएटर, समाजकंटक या अपराधी के बहकावे में न आएं। यदि कोई परीक्षा में पास कराने के नाम पर रिश्वत की मांग या अन्य कोई प्रलोभन व झांसा देता है तो प्रमाण सहित इस संबंध में जांच एजेंसी एवं आयोग कंट्रोल रूम नंबर 0145-2635200, 2635212 एवं 2635255 पर सूचित करें। परीक्षा में अनुचित साधन अपनाए जाने एवं अनुचित कृत्यों में संलिप्त होने पर राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम के अध्युपाय) अधिनियम, 2022 के तहत आजीवन कारावास, 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने से दण्डित एवं चल अचल संपत्ति कुर्क कर जब्त की जा सकती है।
डिप्टी कमांडेंट के लिए केवल 255 ने दिया एग्जाम:RPSC का इस साल का पहला एग्जाम, चेकिंग कर दी एन्ट्री, 4 पदों पर होनी है भर्ती
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सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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