राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) ने 11 जनवरी को गृह रक्षा विभाग में डिप्टी कमांडेंट पदों के लिए भर्ती परीक्षा कराई थी। यह परीक्षा पहली बार इतने बड़े पैमाने पर हुई। परीक्षा में कुल 255 उम्मीदवार शामिल हुए। इसके लिए 17 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। 511 अधिकारी व कर्मचारी तैनात किए गए। इनकी व्यवस्थाओं पर 20 लाख रुपए से ज्यादा का खर्च आया। इस साल परीक्षा के लिए शुरुआत में 4,221 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन बड़ी संख्या में कैंडिडेट गैरहाजिर रहे। आयोग के नियमों के अनुसार, 255 उम्मीदवारों के लिए सिर्फ एक केंद्र पर्याप्त होता, जहां केवल 36 कर्मचारियों की जरूरत पड़ती और खर्च मात्र 1.25 लाख रुपए होता। भर्ती परीक्षाओं में आवेदन फीस न होने के कारण लोग बिना सोचे-समझे फॉर्म भर रहे हैं। इससे न सिर्फ पैसा बल्कि समय और मानव संसाधनों का भी दुरुपयोग हो रहा है। इसे रोकने के लिए आरपीएससी ने सरकार को प्रस्ताव भेजा है, लेकिन यह अभी पेंडिंग है। परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था कैसी होती है? मार्च 2025 में निकाली वैकेंसी
RPSC ने 18 मार्च 2025 को गृह रक्षा विभाग में डिप्टी कमाडेंट के 4 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। इसके लिए 24 मार्च से 22 अप्रैल 2025 तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए थे। वैकेंसी में आवेदन करने के लिए केवल सेना के कैप्टन स्तर के सेवानिवृत्त/त्यागपत्र देने वाले भूतपूर्व अधिकारी अथवा इमरजेंसी व शॉर्ट सर्विस कमीशन से मुक्त/विमुक्त कैंडिडेट्स ही योग्य थे। बिना योग्यता वालों ने बड़ी संख्या में भरे फॉर्म
बिना योग्यता वाले कई लोगों ने आवेदन किए। 10 हजार से ज्यादा आवेदन आए, जिनकी जांच में कई अयोग्य पाए गए। इन्हें फॉर्म वापस लेने का मौका दिया गया। आयोग ने फॉर्म विड्रो नहीं करने पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 217 के अन्तर्गत कार्रवाई करने की चेतावनी दी। विज्ञापन के अनुसार, योग्यताधारी अभ्यर्थियों को भी अपना सेवानिवृत्ति प्रमाण-पत्र ऑनलाइन आवेदन पत्र के साथ अपलोड करने के निर्देश दिए। इसके बाद करीब छह हजार कैंडिडेट्स ने आवेदन फॉर्म विड्रो कर लिए। सरकार को प्रस्ताव भेज चुकी RPSC
आरपीएससी ने सरकार को सलाह दी है कि हर आवेदन पर शुल्क लिया जाए, लेकिन परीक्षा में उपस्थित होने वालों का शुल्क वापस कर दिया जाए। गैरहाजिर रहने वालों का शुल्क नहीं लौटाया जाएगा। यह प्रस्ताव अभी सरकार के पास विचाराधीन है। आयोग के मुख्य परीक्षा नियंत्रक (IAS) आशुतोष गुप्ता ने बताया कि प्रत्येक उम्मीदवार पर औसतन 400-500 रुपए खर्च होते हैं। इसमें पेपर छपाई, वितरण, केंद्र व्यवस्था, पर्यवेक्षक और जांच शामिल हैं। अनुपस्थिति से यह सब व्यर्थ जाता है। राज्य सरकार की वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) व्यवस्था में एक बार शुल्क देकर बार-बार आवेदन किए जा सकते हैं, जिससे बेवजह फॉर्म भरे जा रहे हैं। जांच में पाया गया कि बिना योग्यता वाले भी बड़ी संख्या में आवेदन कर रहे हैं। आरपीएससी की अन्य परीक्षाओं, जैसे आरएएस प्री में भी औसतन आधे उम्मीदवार गैरहाजिर रहते हैं, लेकिन सभी के लिए व्यवस्था करनी पड़ती है। RAS-PRE परीक्षाओं में उपस्थिति
राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित किए जाने वाले भर्ती एग्जाम में आवेदन करने वाले कैंडिडेट्स में से औसतन आधे एग्जाम में शामिल नहीं होते। बावजूद इसके आयोग को आवेदन करने वाले सभी कैंडिडेट्स के लिए व्यवस्थाएं करनी पड़ती है। राजस्थान के सबसे बडे़ पद के लिए होने वाले एग्जाम में भी यही हाल है। मॉडल आंसर की जारी, कल से दर्ज कराएं आपत्ति
राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से डिप्टी कमांडेंट परीक्षा-2025 की मॉडल आंसर-की जिस दिन एग्जाम (11 जनवरी) हुआ उसी दिन जारी कर दी गई थी। आयोग के मुख्य परीक्षा नियंत्रक आशुतोष गुप्ता ने बताया कि यदि किसी भी अभ्यर्थी को इस मॉडल आंसर-की पर कोई आपत्ति हो तो निर्धारित शुल्क के साथ 14 से 16 जनवरी 2026 को रात 12 बजे तक ऑनलाइन दर्ज करवा सकता है। आयोग द्वारा प्रत्येक प्रश्न के लिए आपत्ति शुल्क 100 रुपए (सेवा शुल्क अतिरिक्त) निर्धारित किया गया है। इस साल होने वाले एग्जाम…(RPSC की ओर से जारी किया कैलेंडर) — ये खबर भी पढ़ें RAS सिलेबस 25% बदला, नई भर्ती से लागू होगा:आरएएस प्री में खेल-योगा का 20 अंक मॉड्यूल और मेंस में 2-2 अंक के 25 प्रश्न हटाए राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने राजस्थान एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (RAS) परीक्षा के सिलेबस में कुछ बदलाव किए हैं। अब प्री में स्पोट्र्स एवं योगा का 20 नंबर मॉड्यूल हटा दिया गया है। मुख्य परीक्षा के चौथे पेपर में भी दो-दो नंबर के 25 सवाल हटाकर निबंध का एक नया सेक्शन जोड़ा गया है। (पूरी खबर पढ़ें)
255 कैंडिडेट्स के एग्जाम के लिए 511 अफसर-कर्मचारी लगाए:RPSC को खर्च करने पड़े 20 लाख से ज्यादा रुपए, चेतावनी के बाद 6 हजार फॉर्म विड्रॉ
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
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सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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