ईटानगर, सात नवंबर अरुणाचल प्रदेश में 11,200 मेगावाट की प्रस्तावित सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (एसयूएमपी) के विरोध में हिरासत में लिए गए चार प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तारी के लगभग एक महीने बाद शनिवार को ईटानगर के पास जूली केंद्रीय कारागार से रिहा कर दिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रिहा किए गए लोगों की पहचान अदुम तायोम, ओमक पारोन, ओकुट पालोह और ओसोन पारोन के रूप में हुई है।
उन्हें नौ अक्टूबर को अरुणाचल प्रदेश गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 2014 के तहत हिरासत में लिया गया था। राज्य सरकार द्वारा सियांग स्वदेशी किसान मंच (एसआईएफएफ) की मांगों पर विचार करते हुए सद्भावना के तौर पर उन्हें रिहा करने पर सहमति जताने के एक दिन बाद यह रिहाई हुई। यह मंच प्रस्तावित विशाल बांध परियोजना के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है।
इस घटनाक्रम को सियांग घाटी में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हाल के महीनों में इस परियोजना के विरोध में प्रदर्शन और झड़पें हुई हैं। हालांकि, सरकार ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने की प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का पालन करना होगा।
सरकार ने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) के जवानों को क्षेत्र से हटाने की मांग पर एसआईएफएफ के प्रतिनिधियों के साथ प्रस्तावित बैठक में मौजूदा सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए चर्चा की जाएगी। सरकार ने एसआईएफएफ से बातचीत फिर शुरू करने और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के साथ प्रस्तावित बैठक के लिए अपनी सुविधानुसार तारीख तथा प्रतिनिधियों की सूची भेजने का आग्रह किया है। सरकार ने संगठन से सियांग और अपर सियांग जिलों के निवासियों को शांति बनाए रखने तथा हिंसा, धमकी और हमलों से दूर रहने के लिए प्रेरित करने की भी अपील की है।
मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव शिबू थॉमस के हस्ताक्षर वाले सीएमओ के पत्र में आदि समुदाय की चिंताओं का पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान निकालने के लिए रूपरेखा तैयार करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई गई है। सरकार से बातचीत में शामिल होने पर सहमति जताने से पहले चारों प्रदर्शनकारियों की रिहाई एसआईएफएफ की प्रमुख मांगों में शामिल थी। मंच ने इससे पहले खांडू के बातचीत के निमंत्रण को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई और सुरक्षा बलों की वापसी सहित उसकी मांगों पर पहले कार्रवाई की जाए।
हालांकि, सरकार के नये जवाब में निलंबित या बर्खास्त सरकारी कर्मचारियों की बहाली की घोषणा नहीं की गई है। यह भी मंच की एक प्रमुख मांग है। प्रस्तावित परियोजना को लेकर आदि समुदाय के कुछ वर्गों में लगातार विरोध हो रहा है।
उन्हें आशंका है कि इससे लोगों को विस्थापित होना पड़ेगा, उनके पैतृक गांव जलमग्न हो सकते हैं और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। सितंबर और अक्टूबर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए थे, जिसके कारण हिंसक झड़पें हुईं, गिरफ्तारियां की गईं और क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। खांडू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार ने परियोजना के निर्माण को मंजूरी दी है।
फिलहाल केवल पूर्व व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। सरकार की ताजा पहल पर एसआईएफएफ की प्रतिक्रिया का इंतजार है। इस बीच अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) ने चारों प्रदर्शनकारियों की रिहाई का स्वागत किया है।
हालांकि, पार्टी ने बाकी सभी मामले वापस लेने और अन्य लंबित मांगों को पूरा करने की मांग की है। एपीसीसी अध्यक्ष बोसिराम सिरम ने कहा कि चारों प्रदर्शनकारियों की रिहाई सियांग क्षेत्र में शांति और विश्वास बहाल करने की दिशा में एक कदम है। पार्टी ने एक बयान में प्रदर्शनकारियों और सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने तथा प्रभावित गांवों से सुरक्षाबलों को हटाने की भी मांग की।
उसने राज्य सरकार से प्रभावित समुदायों के साथ समावेशी बातचीत शुरू करने, उनके मूल निवासियों के अधिकारों का सम्मान करने और प्रस्तावित बांध को लेकर उनकी चिंताओं का समाधान करने का आग्रह किया। प्रस्तावित परियोजना के विरोध में हुए प्रदर्शनों के सिलसिले में हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई और सियांग क्षेत्र में तैनात सुरक्षाबलों को हटाने की मांग को लेकर सात लोग अपर सियांग जिले के गेकू से ईटानगर तक पदयात्रा कर रहे हैं। शनिवार को रिहा किए गए चार प्रदर्शनकारियों के अलावा छह अन्य लोग अब भी हिरासत में हैं।
आदि गालो वेलफेयर सोसाइटी (एजीडब्ल्यूएस) की ओर से आयोजित 300 किलोमीटर लंबी यह पदयात्रा चार नवंबर को शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य प्रस्तावित बांध का विरोध कर रहे आदि समुदाय के कुछ वर्गों की मांगों की ओर ध्यान आकर्षित करना है। एजीडब्ल्यूएस के महासचिव और पदयात्रा के आयोजन अध्यक्ष संजू तालोह के अनुसार, प्रतिभागी छह नवंबर को पूर्वी सियांग जिले पहुंचे थे और वहां से राज्य की राजधानी ईटानगर की ओर अपनी यात्रा जारी रखी।
तालोह की निगरानी में पदयात्रा कर रहे प्रतिभागी हाथों में भारतीय ध्वज लेकर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य सरकार पर प्रदर्शनकारियों की चिंताओं का समाधान करने और आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाना है।
