पटना, पांच नवंबर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बृहस्पतिवार को कहा कि बिहार में पर्यावरणीय मंजूरी के अभाव में लंबित विकास एवं बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के प्रस्तावों पर उनका मंत्रालय गौर करेगा और इनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। ‘पीटीआई-भाषा’ द्वारा बिहार की उन विभिन्न परियोजनाओं के बारे में पूछे जाने पर, जिनका काम पर्यावरणीय मंजूरी नहीं मिलने के कारण अटका हुआ है, यादव ने कहा, “हम इन पर ध्यान देंगे। मेरे निजी सचिव बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी हैं।
मैं उनसे इस मामले को देखने के लिए कहूंगा।”
अधिकारियों के अनुसार, बिहार में पांच हजार एकड़ से अधिक वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग से जुड़े प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रालय में लंबित हैं। राज्य की करीब 5,778.62 एकड़ वन भूमि के अपवर्तन की मंजूरी नहीं मिलने के कारण कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इस सिलसिले में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस सप्ताह की शुरुआत में नयी दिल्ली में भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर विभिन्न विकास एवं बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से संबंधित लंबित प्रस्तावों को जल्द मंजूरी देने का अनुरोध किया था।
लंबित प्रस्तावों में गया जी में चिड़ियाघर का निर्माण, जमुई में सौर ऊर्जा परियोजनाओं एवं इस्पात उद्योगों का विकास, डोभी में औद्योगिक विनिर्माण क्लस्टर की स्थापना और भीमबांध सहित विभिन्न पर्यटन स्थलों पर ईको-टूरिज्म सुविधाओं का विकास शामिल है। गया जी में करीब 45.9 हेक्टेयर वन भूमि पर चिड़ियाघर बनाने की योजना है। इसके लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) और पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार है।
वहीं, जमुई में सौर ऊर्जा एवं इस्पात उद्योगों के विकास के लिए वन भूमि के उपयोग संबंधी प्रस्ताव भी लंबित हैं। इसके अलावा, डोभी में औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से प्रस्तावित विनिर्माण क्लस्टर तथा भीमबांध समेत अन्य पर्यटन स्थलों पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत ईको-टूरिज्म सुविधाएं विकसित करने की योजनाओं को भी मंजूरी मिलनी बाकी है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भी वन भूमि के अपवर्तन की आवश्यकता है।
इनसे संबंधित प्रस्ताव मंत्रालय में जांच और समीक्षा के विभिन्न चरणों में हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन परियोजनाओं को मंजूरी मिलने से औद्योगिक विकास, निवेश, पर्यटन और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, सड़क एवं अन्य बुनियादी ढांचे के विस्तार में भी तेजी आएगी।
