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16 मिनट पहले
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नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (NEET) PG 2026 की काउंसलिंग प्रोसेस जारी है। पहले राउंड में सीट पाने वाले उम्मीदवारों के लिए 2 नवंबर 2026 तक रिपोर्टिंग की तारीख तय की गई थी। वहीं दूसरे राउंड का रजिस्ट्रेशन 6 से 11 नवंबर तक होगा।
इसी बीच 3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने NEET-PG और NEET SS के लिए रैंक बेस्ड मेरिट सिस्टम अपनाने का प्रस्ताव दिया है। इससे फिलहाल जारी परसेंटाइल फॉर्मेट को हटा दिया जाएगा।
परसेंटाइल कम करने को लेकर दायर याचिका
NBEMS ने ये जानकारी जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच को एक याचिका के दौरान दी। इसमें NEET-PG 2025-26 के लिए कट-ऑफ परसेंटाइल कम करने को लेकर चैलेंज किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित करते हुए यह कहा कि कोर्ट ने रिपोर्ट की स्टडी करने और पक्षों को समिति के सुझावों पर अपना जवाब दाखिल करने का मौका देने के लिए ये फैसला लिया है।
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने परसेंटाइल बेस्ड एलिजिबिलिटी लिमिट हटाकर रैंक-बेस्ड मेरिट सिस्टम अपनाने को भी मंजूरी दे दी है।
इसके लिए स्टेकहोल्डर्स की राय मिलने के बाद, इस संबंध में एक ड्राफ्ट रेगुलेशन जारी किया जाएगा। NMC के सेक्रेटरी ने इस प्रस्ताव के बारे में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज को एक लेटर लिखकर जानकारी भी दी है।
NMC के सेक्रेटरी ने अपने बयान में यह भी कहा कि रैंक बेस्ड मेरिट सिस्टम लागू होने से पीजी काउंसलिंग के राउंड 2 और राउंड 3 के बीच का टाइम गैप कम हो जाएगा।

प्रपोजल में काउंसलिंग को डिजिटल बनाने की बात
इसके साथ ही ये प्रपोजल भी दिया गया कि परसेंटाइल में इतनी कमी नहीं की जानी चाहिए जिससे NEET एग्जाम की प्रायोरिटी पर असर हो। ऐसे उम्मीदवारों को एडमिशन न दिया जाए जिनका प्रदर्शन बहुत खराब रहा हो। इसके अलावा, MCC पूरी काउंसलिंग प्रोसेस को डिजिटल बनाने का काम कर रही है।
उम्मीदवार दो कैटेगरी में बांटे जाएंगे
मेडिकल काउंसलिंग कमिटी के पोर्टल से जुड़े बदलावों के अनुसार, इस एकेडमिक सेशन से उम्मीदवारों को फ्रीज’ और फ्लोट दो कैटेगरी में बांटा जाएगा। फ्रिज कैटेगरी में उम्मीदवारों को एडमिशन या अपग्रेडेशन के लिए अलॉट किए संस्थानों में खुद जाकर रिपोर्ट करना होगा।
फ्लोट कैटेगरी में उम्मीदवारों को अपनी सीट ऑनलाइन मंजूर करना होगी। अपग्रेडेशन होने पर, पिछली सीट से रिलीव होने की प्रोसेस भी ऑनलाइन कर दी गई है। इस पूरी प्रोसेस में उम्मीदवारों को फीस तब देना होगी जब उनका एडमिशन फाइनली पूरी तरह से तय हो जाता है।

सीट मैट्रिक्स का पूरा केलकुलेशन
इससे पहले सीट मैट्रिक्स की जानकारी सीधे संस्थानों द्वारा दी जाती थी और NMC इसे वेरिफाई नहीं कर पाता था। अब, NMC को काउंसलिंग सॉफ्टवेयर में स्टेकहोल्डर के रूप में शामिल कर लिया गया है। चूंकि सीट मैट्रिक्स की प्रोसेस अब NMC के जरिये होगी, इसलिए MCC काउंसलिंग के लिए एक तय टाइम टेबल फॉलो करेगा।
0 पर्सेंटाइल वाले कैंडिडेट्स को काउंसलिंग में मौका
24 सितंबर को जारी हुए NEET-PG 2026 रिजल्ट में इस बार कुल 2,63,535 कैंडिडेट्स ने क्वालिफाई किया है। लेकिन एग्जाम देने वाले 258 कैंडिडेट्स के 0 या उससे भी कम नंबर हैं। साथ ही लास्ट रैंक यानी 0 पर्सेंटाइल लाने वाले कैंडिडेट का स्कोर -59 है।
बीते 3 सालों का पैटर्न देखें तो 0 पर्सेंटाइल स्कोर करने वाले कैंडिडेट्स को काउंसलिंग में मौका मिल सकता है। इससे एक बार फिर ये बहस तेज गई है कि क्या फिर 0 परसेंटाइल वाले कैंडिडेट्स को MD, MS करने का मौका दिया जाएगा?

कोविड-19 के बाद पहली बार घटाया गया पर्सेंटाइल
नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस यानी NBEMS ने साल 2023 में कोविड-19 के बाद पहली बार NEET-PG का क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल घटाकर 0 किया था। इससे बहुत कम या नेगेटिव स्कोर करने वाले कैंडिडेट्स भी काउंसलिंग के लिए एलिजिबल हो गए थे।
सुप्रीम कोर्ट में कहा गया- इससे डॉक्टर्स की क्वालिटी गिरेगी
फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने NEET-PG 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल को कम करने से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई की थी। कोर्ट ने कम परसेंटाइल को लेकर सरकार और NBEMS दोनों से ही जवाब मांगा था।
ये याचिका सोशल वर्कर हरिशरण देवगन, डॉ. सौरव कुमार, डॉ. लक्ष्य मित्तल और डॉ. आकाश सोनी ने लगाई थी। इस याचिका में 2025-26 की काउंसलिंग में दो राउंड के बाद NEET PG-2025 कट-ऑफ कम करने को लेकर सवाल किया गया था। याचिका के मुताबिक, कट-ऑफ कम करना आर्टिकल 14 और आर्टिकल 21 का उल्लंघन था।

यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट एसोसिएशन ने किया विरोध
देश में यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट एसोसिएशन (UDF) ने पिछले साल NEET PG का कट-ऑफ 0 पर्सेंटाइल किए जाने का कड़ा विरोध किया था।
UDFA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल और अन्य पदाधिकारियों ने इस नोटिफिकेशन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की थी। UDF ने कहा था कि बेहद कम या नेगेटिव स्कोर पाने वाले कैंडिडेट्स का पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल ट्रेनिंग (MD/MS) लेना पब्लिक हेल्थ के साथ बड़ा समझौता होगा।
बार-बार एलिजिबिलिटी रूल कम करने से भविष्य में स्पेशलिस्ट डॉक्टर की क्वालिटी पर बुरा असर होगा। इसके साथ ही जब कम योग्यता वाले डॉक्टर हाई रिस्क वाले मेडिकल फील्ड (जैसे सर्जरी या ऑर्थोपेडिक्स) में स्पेशलिस्ट बनेंगे, तो इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ेगा। इससे ट्रेनिंग की खराब क्वालिटी, अच्छी फैकल्टी की कमी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी असर होगा।
NBEMS की सफाई- सीटें भरना जरूरी
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद, NBEMS ने अपने पक्ष में कहा था कि देश भर में 18,000 से ज्यादा पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटें खाली हैं। इस वजह से बोर्ड ने NEET-PG 2025 एडमिशन के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में बदलाव किया है। 2025 में ही कटऑफ पर्सेंटाइल घटाने से -40 स्कोर करने वाले उम्मीदवार भी काउंसलिंग के तीसरे राउंड में शामिल हो गए थे।
नेशनल मेडिकल कमीशन वेबसाइट लिंक
मेडिकल काउंसलिंग कमेटी वेबसाइट लिंक
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