अमेरिका में हाल ही में संपन्न हुए 2026 के मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) के नतीजों ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए एक और नया इतिहास रच दिया है। भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट पिया डंडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से US हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव जीतकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बेहद कड़े और कांटे के मुकाबले में पिया डंडिया ने अपने प्रतिद्वंद्वी रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को मात दी।मंगलवार को घोषित आधिकारिक परिणामों के अनुसार, हाई स्कूल की पूर्व प्रिंसिपल रहीं पिया डंडिया को कुल 51.9 प्रतिशत वोट मिले, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवार असकर को 49.1 प्रतिशत वोटों से ही संतोष करना पड़ा।
फ्लोरिडा से चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी बनीं पिया डंडिया
इस जीत के साथ, डंडिया US कांग्रेस के लिए चुनी जाने वाली सबसे नई भारतीय-अमेरिकी महिला बन गई हैं।
गौरतलब है कि डंडिया की जीत भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए एक अहम पड़ाव है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह फ्लोरिडा से US हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी हैं और US कांग्रेस में सेवा देने वाली 10वीं भारतीय-अमेरिकी बन गई हैं।
डंडिया के माता-पिता भारत से आकर US में बस गए थे। शुरुआत में, डंडिया ने फ्लोरिडा के 21वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन ब्रायन मास्ट (जो हाउस फॉरेन अफेयर्स कमिटी के चेयरमैन हैं) को चुनौती देने की योजना बनाई थी।
हालांकि, हाई स्कूल की पूर्व प्रिंसिपल रहीं डंडिया ने बाद में अपना प्रचार फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में स्थानांतरित कर लिया। यह निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन (रीडिस्ट्रिक्टिंग) के बाद बना एक नया क्षेत्र था, जहां कोई मौजूदा प्रतिनिधि चुनाव नहीं लड़ रहा था।
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, ‘इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट’ के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने एक बयान में कहा, “फ्लोरिडा का 22वां डिस्ट्रिक्ट डेमोक्रेट्स के लिए सबसे कड़े मुकाबले वाले क्षेत्रों में से एक था, और पिया ने इसे ‘ब्लू’ (डेमोक्रेटिक) बना दिया।”
उन्होंने आगे कहा, “‘इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट’ को शुरुआत से ही उनका समर्थन करने पर गर्व है, और हम आज रात उनकी जीत पर उन्हें बधाई देते हैं।”
कौन हैं पिया डंडिया?
उनकी प्रचार वेबसाइट के अनुसार, डंडिया पहली पीढ़ी की अमेरिकी हैं। उन्होंने अपने करियर में हाई स्कूल प्रिंसिपल, नीति निर्माता (पॉलिसी लीडर) और टेक्नोलॉजी इनोवेटर के रूप में काम करते हुए समुदायों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है।
फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में जन्मी और पली-बढ़ीं डंडिया ने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क के हार्लेम में एक हाई स्कूल की प्रिंसिपल के तौर पर काम किया। बाद में उन्होंने एक हाई स्कूल की स्थापना की, जिसका उद्देश्य कम आय वाले छात्रों के लिए अवसरों को बेहतर बनाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद करना था।
अभियान की वेबसाइट के अनुसार, स्कूल के सभी ग्रेजुएट्स को कॉलेज में दाखिला मिला, जबकि यहाँ के 86 प्रतिशत छात्र कम आय वाले परिवारों से आते हैं। 28 साल की उम्र में डांडिया इस स्कूल की संस्थापक प्रिंसिपल बनीं, जिससे वह देश की सबसे कम उम्र की हाई स्कूल प्रिंसिपलों में से एक बन गईं।
सुहास सुब्रमण्यम वर्जीनिया से अमेरिकी कांग्रेस सदस्य के रूप में फिर से चुने गए
इस बीच, भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट सुहास सुब्रमण्यम को वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (अमेरिकी प्रतिनिधि सभा) के लिए फिर से चुना गया है। 40 वर्षीय सुब्रमण्यम ने 61.5 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किए और रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को हराया, जिन्हें 36.4 प्रतिशत वोट मिले। सुब्रमण्यम इससे पहले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार के रूप में काम कर चुके हैं।
कौन हैं सुहास सुब्रमण्यम?
ह्यूस्टन में भारतीय माता-पिता के घर जन्मे सुहास की रुचि सार्वजनिक सेवा में तब जगी, जब वे न्यू ऑरलियन्स की ट्यूलेन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे। वहाँ उन्होंने ‘हरिकेन कैटरीना’ से प्रभावित समुदायों के पुनर्निर्माण के लिए स्वयंसेवकों को संगठित करने में मदद की।
सुब्रमण्यम ने कैपिटल हिल में एक नीति सहायक (पॉलिसी एड) के रूप में काम किया। वहाँ उन्होंने लाखों अमेरिकियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बढ़ाने और उसे बेहतर बनाने का काम किया, आव्रजन सुधार (इमिग्रेशन रिफॉर्म) के समर्थन में दोनों दलों का गठबंधन बनाने में मदद की, और पूर्व सैनिकों, वरिष्ठ नागरिकों तथा कामकाजी परिवारों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और फंडिंग जुटाने से जुड़े कानून का मसौदा तैयार किया। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से ऑनर्स के साथ लॉ की डिग्री हासिल करने के बाद, सुब्रमण्यम ने राष्ट्रपति ओबामा के लिए व्हाइट हाउस में टेक्नोलॉजी पॉलिसी एडवाइजर (प्रौद्योगिकी नीति सलाहकार) के रूप में काम किया।
व्हाइट हाउस में अपने कार्यकाल के बाद, सुब्रमण्यम ने लाउडन काउंटी में अपना छोटा व्यवसाय शुरू किया और साथ ही एक स्वयंसेवक EMT (आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन) और फायरफाइटर के रूप में भी सेवाएं दीं। 2019 में वे वर्जीनिया जनरल असेंबली के लिए चुने गए और दो कार्यकाल तक सेवा दी। 2024 में अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए चुने जाने से पहले, सुब्रमण्यम वर्जीनिया स्टेट सीनेट के सदस्य भी रह चुके हैं।
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