दिल्ली की एक अदालत ने 2018 में कनॉट प्लेस स्थित एक अस्पताल के बाहर अपनी पत्नी के पेट में गोली मारकर उसकी हत्या का प्रयास करने के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराते हुए कहा कि घायल महिला की गवाही भरोसेमंद है तथा आरोपी का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने 13 अक्टूबर को सुनाए गए फैसले में सुशांत को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) और शस्त्र अधिनियम की धारा 27 (हथियारों का इस्तेमाल) के तहत दोषी ठहराया। हालांकि, अदालत ने उसे शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत लगे अवैध रूप से आग्नेयास्त्र रखने के आरोप से बरी कर दिया।
अदालत ने कहा कि पिस्तौल रखने के मामले में सीलमपुर थाने में अलग प्राथमिकी दर्ज की गई थी और उस मामले की सुनवाई दूसरी अदालत में लंबित है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 24 नवंबर 2018 को कनॉट प्लेस स्थित कलावती अस्पताल के गेट नंबर पांच के बाहर हुई थी। पीड़िता पिंकी अस्पताल में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम करती थी।
वर्ष 2015 में एक अन्य मामले में उसके पति को जेल भेजे जाने के बाद से वह अपने मायके में रह रही थी। पिंकी ने अदालत को बताया कि जेल से रिहा हुआ सुशांत शाम के समय अस्पताल आया और उसे बाहर बुलाया। जब वह सड़क के दूसरी ओर खड़े एक ऑटो रिक्शे में बैठी, तो सुशांत ने उससे पूछा कि क्या वह अपने ससुराल लौटेगी और इनकार करने पर उसने पिंकी के पेट में गोली मार दी और फरार हो गया।
पीड़िता ने बताया कि उसी दिन उसका ऑपरेशन किया गया और करीब एक महीने तक अस्पताल में भर्ती रही तथा उसकी चार सर्जरी हुईं। अदालत ने कहा कि अस्पताल के कर्मचारियों की गवाही और सीसीटीवी फुटेज से साबित होता है कि आरोपी अस्पताल आया था और पीड़िता के घायल होने से कुछ समय पहले उसके साथ वहां से गया था। इसने यह भी कहा कि एक ऑटो रिक्शा के मालिक ने गवाही दी थी कि उसने घटना वाले दिन अपना वाहन सुशांत को दिया था, जो बाद में घटनास्थल के पास लावारिस हालत में मिला, जिस पर खून के धब्बे थे।
फॉरेंसिक जांच में वाहन से लिए गए खून के नमूने का पीड़िता के डीएनए से मिलान हुआ। उच्चतम न्यायालय के कई फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि घायल गवाह की गवाही को काफी महत्व दिया जाता है और विश्वसनीय गवाह की गवाही के आधार पर भी दोषसिद्धि की जा सकती है। अदालत ने कहा कि बचाव पक्ष ऐसा कोई कारण नहीं बता सका, जिससे यह लगे कि पिंकी अपने पति को झूठे मामले में फंसा सकती है।
इसने कहा कि वैवाहिक विवाद के कारण झूठा फंसाने का सामान्य आरोप लगाने के अलावा बचाव पक्ष ने कोई ठोस आधार नहीं दिया। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आरोपी ने पीड़िता के शरीर के एक महत्वपूर्ण अंग पर गोली चलाई। इसमें कोई संदेह नहीं है कि उसका इरादा पीड़िता की जान लेने का था, क्योंकि वह उसके साथ रहने के लिए तैयार नहीं थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए अभियोजन पक्ष यह संदेह से परे साबित करने में सफल रहा है कि आरोपी ने अपनी पत्नी पिंकी की हत्या का प्रयास किया था।
उसे भादंसं की धारा 307 के तहत दोषी ठहराया जाता है।’’
सजा पर दलीलें अगली तारीख पर सुनी जाएंगी।
