कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी (KCNA) ने बताया कि गुरुवार को जिस हथियार का परीक्षण किया गया, वह ज़ैम-2.0 (Zam-2.0) नाम का एक बेहद तेज़ गति वाला और सटीक निशाना लगाने वाला टॉरपीडो सिस्टम है। हालांकि, इसमें यह नहीं बताया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से उनका क्या तात्पर्य है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि परीक्षणों से हथियार के प्रोपल्शन सिस्टम (आगे बढ़ाने वाली प्रणाली) की पुष्टि हुई है, जिसे पिछले पांच वर्षों में 180 से अधिक परीक्षणों के ज़रिए विकसित किया गया था। दक्षिण कोरिया की सेना, जो अक्सर उत्तर कोरिया पर अपनी सैन्य तकनीकों को बढ़ा-चढ़ाकर बताने का आरोप लगाती है, उसने KCNA की इस रिपोर्ट पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की।
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उत्तर कोरिया ने हाल के हफ्तों में हथियारों के प्रदर्शन को तेज़ कर दिया है। इसमें लगभग तीन वर्षों में पहली बार पानी के भीतर से मिसाइल लॉन्च करने का परीक्षण भी शामिल है। ऐसा लगता है कि नेता किम जोंग-उन ने वर्षों तक बैलिस्टिक मिसाइलों को विकसित करने के बाद, अब अपना ध्यान नौसैनिक क्षमताओं की ओर केंद्रित कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुधवार को किए गए मिसाइल परीक्षणों में संभवतः एक ऐसी पनडुब्बी शामिल थी जिसे अभी तैनात नहीं किया गया है; प्योंगयांग के अनुसार, इसे परमाणु हथियार लॉन्च करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
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खबर के अनुसार, परीक्षण में टॉरपीडो की प्रणोदन प्रणाली की क्षमता की भी पुष्टि हुई। इस प्रणाली को पिछले पांच वर्ष में 180 से अधिक परीक्षणों के जरिए विकसित किया गया है। उत्तर कोरिया पर अक्सर अपनी सैन्य प्रौद्योगिकी की क्षमताओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाने वाली दक्षिण कोरिया की सेना ने केसीएनए की रिपोर्ट पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की।
