कानपुर में बैंक प्रबंधक के खिलाफ दर्ज फर्जी शिकायतों की जांच के दौरान 2.66 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इसकी जानकारी दी। पुलिस ने मामले में बीसीए स्नातक अखिल सिंह चौहान और सत्येंद्र यादव उर्फ टोनी को गिरफ्तार किया है।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने शुक्रवार को बताया कि देशभर में धोखाधड़ी से जुड़े 89 बैंक खातों का पता चला है और आरोपियों से जुड़े खातों में मौजूद 30 लाख रुपये फ्रीज कराए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, जाजमऊ की डिफेंस कॉलोनी निवासी निर्यातक मोहम्मद अहमद लारी को फेसबुक पर निवेश संबंधी विज्ञापन के जरिए जाल में फंसाया गया। खुद को अनन्या कुलकर्णी बताने वाली महिला ने फिनसोल प्राइवेट लिमिटेड का प्रतिनिधि होने का दावा किया।
पुलिस ने बताया कि 18 जून से 10 अगस्त के बीच लारी ने एक ऐप के जरिए 2.66 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। ऐप पर उनका निवेश बढ़कर 9.74 करोड़ रुपये दिखाया गया, लेकिन रकम निकालने के लिए 30 लाख रुपये अतिरिक्त टैक्स मांगा गया। चार्टर्ड अकाउंटेंट की जांच में पता चला कि अनन्या कुलकर्णी उस कंपनी से जुड़ी नहीं थीं।
जांच में सामने आया कि चौहान ने जना स्मॉल फाइनेंस बैंक से कॉर्पोरेट एवं निवेश बैंकिंग सुविधाएं लेने के लिए 100-200 करोड़ रुपये की जमा राशि लाने का दावा किया था। इसमें कहा गया है कि उसने पतंजलि से जुड़े 1.5 करोड़ रुपये के सरसों तेल के ऑर्डर का फर्जी इनवॉइस भी पेश किया, बैंक प्रबंधक के इनकार पर उसने आईजीआरएस पोर्टल के जरिए शिकायतें दर्ज कराईं। इसी जांच से पुलिस चौहान की फर्म सद्भावना सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड और साइबर अपराध नेटवर्क तक पहुंची।
चौहान के परिवार के नाम पर खोले गए 31 संदिग्ध म्यूल खातों की भी पहचान हुई है। पुलिस के अनुसार, धोखाधड़ी के मुख्य आरोपी कैली और विवेक रॉय मुंबई में थे, जबकि चौहान और यादव स्थानीय स्तर पर मदद कर रहे थे। चौहान के संदिग्ध खातों का संबंध राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 38 शिकायतों से मिला है।
पुलिस ने बताया कि महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली और ओडिशा में भी इस नेटवर्क से जुड़ी सात प्राथमिकी दर्ज हैं और पुलिस 10 से अधिक लोगों की संलिप्तता की जांच कर रही है और धन के लेन-देन का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।
