जल शक्ति मंत्रालय ने बुधवार को जल जीवन मिशन के दूसरे संस्करण और विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) कार्यक्रम के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर दिया तथा मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्राथमिकता वाले पांच क्षेत्र तय किए हैं, जिनमें पेयजल के स्रोतों की वैज्ञानिक पहचान करना भी शामिल है। अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में जल जीवन मिशन योजनाओं को ग्राम पंचायत की योजनाओं के साथ जोड़ना, तकनीकी जांच और मंजूरी की व्यवस्था बनाना, विभागों के बीच आसानी से डेटा साझाकरण सुनिश्चित करना, और भौतिक प्रगति तथा जल सुरक्षा के नतीजों पर नजर रखने के लिए संयुक्त निगरानी प्रणाली बनाना शामिल है। जल शक्ति मंत्रालय ने बताया कि एक और दो सितंबर को आयोजित विभागीय सम्मेलन 2026 के बाद की बातचीत के तहत, पेयजल और स्वच्छता विभाग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ तीसरी वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में प्राथमिकताओं की पहचान की।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के.के. मीणा ने कहा कि एक ओर जहां जल जीवन मिशन ने देश भर में व्यापक स्तर पर ग्रामीण पेयजल बुनियादी ढांचे का विस्तार किया है, वहीं अब जल जीवन मिशन के दूसरे संस्करण का मुख्य जोर इन परिसंपत्तियों की दीर्घकालिक कार्यशीलता, विश्वसनीयता और स्थायित्व को सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि बुनियादी अवसंरचनाओं के नियमित रखरखाव के साथ ही पेयजल स्रोतों के योजनाबद्ध संरक्षण, पुनर्भरण और उचित प्रबंधन द्वारा स्थायी पेयजल सेवाएं सुनिश्चित की जा सकती हैं। वीबी-जी राम जी के तहत उपलब्ध अवसरों का उल्लेख करते हुए मीणा ने कहा कि यह कार्यक्रम जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, स्रोत स्थिरता और रखरखाव से जुड़े उन तमाम कार्यों के लिए सुदृढ़ ढांचा प्रदान करता है जो सीधे तौर पर पेयजल के संरक्षण में सहायक है।
