केंद्र ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने कैंसर-रोधी दवाओं के व्यापार ‘मार्जिन’ को नियंत्रित करने का फैसला किया है, जिसके तहत दवाओं का ‘मार्जिन’ अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के 30 प्रतिशत तक सीमित रहेगा और इससे मरीजों को सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपये की बचत होगी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि इस फैसले पर आठ अक्टूबर को राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) की 151वीं बैठक में विचार किया गया। केंद्र ने 551 पन्नों के विस्तृत हलफनामे में कहा, ‘‘देश में दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक वैधानिक और नीतिगत ढांचा मौजूद है।
सरकार ने जनहित में दवाओं की उपलब्धता से समझौता किए बिना व्यापार ‘मार्जिन’ में अत्यधिक वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए सोच-समझकर और विचार-विमर्श के बाद कदम उठाए हैं। इनमें औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ), 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत प्राप्त विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करना भी शामिल है।’’
हलफनामे में कहा गया, ‘‘विशेष रूप से, सरकार ने कैंसर-रोधी दवाओं पर व्यापार मार्जिन को एमआरपी के 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया है और इसे लागू करने की प्रक्रिया फिलहाल जारी है।’’
अदालत औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश (डीपीसीओ), 2013 के तहत दवाओं की कीमतों के नियमन, जेनेरिक दवाएं लिखने और चिकित्सा उपकरणों पर नियंत्रण से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। किशन चंद जैन की याचिका सहित दो याचिकाओं में इस बात को रेखांकित किया गया है कि अधिसूचित दवाओं की कीमतें अधिकतम सीमा के अधीन हैं, जबकि बाजार में उपलब्ध गैर-अधिसूचित दवाओं के अधिकांश फॉर्मूलेशन की कीमतें तय करने में निर्माताओं को अधिक स्वतंत्रता है।
बाजार में संख्या और मूल्य, दोनों के लिहाज से ऐसी दवाओं की हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत या इससे अधिक आंकी गई है। हालांकि, इन दवाओं की कीमतों में सालाना वृद्धि 10 प्रतिशत तक सीमित है। हलफनामे में कहा गया कि केंद्र ने देश में कैंसर के इलाज के लिए मंजूर दवाओं की एक सूची जारी करने का फैसला किया है, जिससे इन दवाओं पर व्यापार ‘मार्जिन’ की तय सीमा लागू होगी।
सरकार ने कहा, ‘‘बाजार में होने वाले बदलावों और जनस्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस सूची में समय-समय पर कैंसर-रोधी दवाओं को शामिल कर इसे अद्यतन किया जा सकता है।’’
सरकार ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नौ अक्टूबर को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति गठित की। समिति को व्यापार ‘मार्जिन’ की सीमा के दायरे में आने वाली कैंसर-रोधी दवाओं की सूची तैयार करने और इसे 10 से 15 दिन के भीतर सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है। सरकार ने कहा कि इसमें कैंसर के इलाज के लिए मंजूर सभी दवाओं को शामिल किया जाएगा, सिवाय उन दवाओं के जो कम कीमत वाली हैं।
विशेषज्ञ समिति से सूची मिलने के बाद एनपीपीए इस पर विचार-विमर्श और गैर-अधिसूचित कैंसर-रोधी दवाओं के व्यापार ‘मार्जिन’ को तर्कसंगत बनाने की प्रक्रिया लागू करने के लिए उचित निर्देश देने के वास्ते इसे प्राधिकरण के समक्ष रखेगा। इसके बाद एनपीपीए कीमतों से संबंधित अधिसूचना जारी करेगा। साथ ही, दवा निर्माताओं के लिए निर्देश और प्रक्रियाएं भी तय की जाएंगी, ताकि इस फैसले का लाभ मरीजों तक पहुंचना सुनिश्चित हो सके।
सरकार ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार मार्जिन युक्तिकरण (टीएमआर) से कैंसर-रोधी दवाओं के एमआरपी में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। अनुमान है कि इन दवाओं की कीमतों में करीब 20 से 70 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है।
