दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट एफजेड1073 में हुई कथित हाईजैकिंग की कोशिश पर आतंकी संगठन अल-कायदा ने प्रतिक्रिया दी है। यमन स्थित अल-कायदा की शाखा एक्यूएपी से जुड़े समर्थक प्रकाशन ‘अल बयान’ ने इस घटना पर एक संपादकीय प्रकाशित किया है। इसमें हमले की कोशिश का समर्थन किया गया है। हालांकि, संगठन ने इस घटना की सीधे तौर पर जिम्मेदारी नहीं ली है।
प्रकाशन ने अमेरिकी और इजरायली विमानों पर 9/11 जैसे हमले करने की अपील की है। इसमें फ्लाईदुबई की घटना का जिक्र करते हुए विमान को गिराने की कोशिश करने वाले सह-पायलट की तारीफ भी की गई है। यह अपील शुक्रवार को ‘अल बयान’ के ताजा अंक में की गई। यह एक साप्ताहिक प्रकाशन है, जिसे इसी साल जुलाई में अल-कायदा के समर्थकों ने शुरू किया था।
9/11 का भी किया गया जिक्र
रिपोर्ट के अनुसार, ‘अल बयान’ के संपादकीय का शीर्षक ‘बिटवीन सितंबर 11 एंड सितंबर 30’ है। इसमें 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों और 30 सितंबर को फ्लाईदुबई विमान में हुई घटना के बीच समानता दिखाने की कोशिश की गई है।
प्रकाशन ने 9/11 से जुड़ी तस्वीरों के साथ फ्लाइट एफजेड1073 की तस्वीर भी प्रकाशित की है।
रिपोर्टों के मुताबिक, प्रकाशन ने इस घटना को इजरायल और अमेरिका के खिलाफ हिंसा के संदर्भ में पेश किया और भविष्य में इस तरह के हमलों को बढ़ावा देने वाला संदेश दिया। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय सामने आई है, जब सुरक्षा एजेंसियां फ्लाईदुबई घटना में शामिल ओमानी सह-पायलट के मकसद और संभावित चरमपंथी संबंधों की जांच कर रही हैं।
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फ्लाईदुबई की फ्लाइट में क्या हुआ था?
30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट एफजेड1073 दुबई से तेल अवीव के लिए रवाना हुई थी। उड़ान के दौरान कॉकपिट में पायलटों के बीच हिंसक घटना हुई। यूएई के अधिकारियों के मुताबिक, सह-पायलट ने क्रैश एक्स से हमला किया और इस घटना की आतंकी कृत्य के प्रयास के तौर पर जांच की जा रही है।
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में मदद की। इसके बाद चालक दल और यात्रियों ने हमलावर को काबू कर लिया। विमान को बाद में सऊदी अरब के तबुक में आपात स्थिति में उतारा गया। मामले की जांच अभी जारी है।
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घटना के बाद विमानन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी
फ्लाईदुबई की इस घटना ने विमानन सुरक्षा में ‘इनसाइडर थ्रेट’ यानी विमान के भीतर मौजूद व्यक्ति से पैदा होने वाले खतरे को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। इस मामले में खतरा किसी बाहरी व्यक्ति से नहीं, बल्कि कॉकपिट में मौजूद चालक दल के सदस्य से जुड़ा था। विशेषज्ञों के मुताबिक, घटना के बाद पायलटों की स्क्रीनिंग, कॉकपिट की सुरक्षा और चालक दल के सदस्यों की पृष्ठभूमि की जांच जैसे मुद्दों पर फिर से चर्चा तेज हो सकती है।
