शिक्षा पुस्तकालय विभाग और समाज कार्य पुस्तकालय विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय पुस्तकालय मण्डल (DULS), दिल्ली विश्वविद्यालय ने द एनर्जी एंड रिसोर्सेज़ इंस्टीट्यूट (TERI) के सहयोग से संयुक्त रूप से कार्यशाला का आयोजन किया।
कार्यशाला का शुभारंभ समाज कार्य पुस्तकालय विभाग, DULS की सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष सुश्री ज्योति शर्मा के उद्घाटन संबोधन से हुआ। अपने संबोधन में उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्यों एवं उसकी प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कार्यशाला की रूपरेखा सभी के साथ साझा की। इसके पश्चात कार्यशाला की संरक्षक/Patron की भूमिका में प्रो. सुस्मिता लख्यानी, विभागाध्यक्ष एवं डीन, शिक्षा विभाग तथा प्रो. संजय रॉय, विभागाध्यक्ष, समाज कार्य विभाग एवं डीन, सामाजिक विज्ञान संकाय ने संबोधित किया। उन्होंने सतत विकास को बढ़ावा देने में उच्च शिक्षा संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।
मुख्य अतिथि डॉ. राजेश सिंह, विश्वविद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष, दिल्ली विश्वविद्यालय पुस्तकालय मण्डल ने इस पहल की सराहना की और सतत अकादमिक प्रथाओं को समर्थन देने में पुस्तकालयों की निरंतर विकसित हो रही भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने DULS द्वारा की गई विभिन्न हरित पहलों, जैसे ई-पुस्तकों की बढ़ती खरीद, डीयू ई-लाइब्रेरी तथा शोध सहायता सेवा ‘शोधसार्थी’ का उल्लेख किया, जिन्हें हरित अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मुख्य वक्ता डॉ. पी. के. भट्टाचार्य, निदेशक, नॉलेज रिसोर्स सेंटर एवं EIACP समन्वयक, TERI ने बढ़ती CO₂ उत्सर्जन दरों का अवलोकन प्रस्तुत किया और COP-26 में भारत द्वारा 2070 तक नेट ज़ीरो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन प्राप्त करने की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। उन्होंने मिशन LiFE (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट) की अवधारणा, उसके महत्व तथा हरित अनुसंधान के लिए उपलब्ध अवसरों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही उन्होंने सतत अनुसंधान प्रक्रियाओं, सामाजिक विज्ञानों में हरित अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों, सरकारी पहलों तथा सततता को समर्थन देने वाले संस्थागत तंत्रों पर भी प्रकाश डाला।
डॉ. रीता शर्मा, फेलो, TERI, ने सतत् शोध प्रथाओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने डिजिटल उपकरणों के उपयोग से पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने, ऊर्जा-कुशल तकनीकों, ई-कचरा प्रबंधन, और अकादमिक शोध में भौतिक एवं ऊर्जा संसाधनों के न्यूनतम उपयोग की रणनीतियों पर चर्चा की।
एक अन्य वक्ता, तारु मेहता, वरिष्ठ फेलो एवं एसोसिएट डायरेक्टर, पर्यावरण शिक्षा एवं जागरूकता प्रभाग, TERI ने सतत विकास के लिए शिक्षा विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने ESD से संबंधित वैश्विक एवं राष्ट्रीय ढाँचों और नीतियों, शिक्षा एवं सामाजिक कार्य में हरित अनुसंधान के महत्व, तथा अनुसंधान में सततता, पर्यावरणीय न्याय और सामाजिक उत्तरदायित्व के समावेशन पर चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों को TERI के अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रमों से भी अवगत कराया और सततता के एकीकरण में आने वाली चुनौतियों एवं बाधाओं को रेखांकित किया।
कार्यशाला में दिल्ली विश्वविद्यालय के दोनों विभागों के संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम का समापन शिक्षा पुस्तकालय (DULS) की सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. मनप्रीत कौर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने अतिथियों, वक्ताओं, आयोजकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
दिल्ली विश्वविद्यालय में “ग्रीनिंग योर रिसर्च: अकादमिक क्षेत्र में सतत् प्रथाएँ” पर जागरूकता कार्यशाला
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
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सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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