डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना लेकर कोटा आने वाले देश भर के लाखों स्टूडेंट्स के लिए इस बार राहत भरी खबर है। नया सेशन शुरू होते ही स्टूडेंट्स का कोटा पहुंचना शुरू हो गया है, लेकिन इस बार उन्हें न तो महंगे कमरों की चिंता है और न ही बढ़ती फीस की। कोचिंग संस्थान इस बार 50 फीसदी तक स्कॉलरशिप दे रहे हैं। करीब 3 साल पहले तक जिस कोटा में स्टूडेंट्स को 15 हजार रुपए में भी कमरा मिलना मुश्किल हो रहा था, वहां अब 9 से 11 हजार रुपए में एसी, खाना और लॉन्ड्री जैसी सुविधां के साथ बेहतरीन विकल्प उपलब्ध हैं। कोटा में हॉस्टलों के अलावा कई पीजी भी हैं। पीजी में पहले किराया 5 से 6 हजार रुपए था। वर्तमान में 2 से 4 हजार रुपए लिए जा रहे हैं। 4 हजार रुपए भी बड़े हॉलनुमा कमरे का किराया है, जिसमें बिजली-पानी भी शामिल है। हॉस्टल एसोसिएशन का फैसला- 11 हजार से ज्यादा किराया नहीं
हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल ने बताया कि कोरोना के बाद अचानक स्टूडेंट्स की संख्या 1.90 लाख तक पहुंच गई थी, जिससे डिमांड बढ़ने पर रेट 15 हजार तक चले गए थे। अब स्थिति नियंत्रण में है। हॉस्टल संचालकों को 9 हजार से 11 हजार रुपए तक किराया रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें रूम, एसी, खाना, लॉन्ड्री और सफाई शामिल है। कभी सबसे महंगा रहने वाले राजीव गांधी नगर इलाके में अब 3 हजार रुपए तक में कमरे उपलब्ध हैं। कोचिंग संस्थानों ने भी बढ़ाया हाथ, नहीं बढ़ेगी फीस
मिडिल क्लास परिवारों को राहत देने के लिए इस साल कोचिंग संस्थानों ने अपनी फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं करने का निर्णय लिया है। साथ ही, अब हॉस्टलों में महीनों का एडवांस किराया लेने की प्रथा पर भी रोक लगा दी गई है। स्टूडेंट्स की काउंसिलिंग से लेकर 24 घंटे की हेल्पलाइन सेवा भी दी जा रही है। टेस्ट में अच्छे नंबर लाइए, फीस में छूट पाइए
कोटा में 50 से ज्यादा छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान हैं। इनमें NEET और JEE की तैयारी करवाई जाती है। स्टूडेंट्स को राहत देते हुए इंस्टीट्यूट्स ने इस बार फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। इसके अलावा स्टूडेंट्स के लिए स्कॉलरशिप टेस्ट भी करवाए जा रहे हैं। इसमें बच्चों को 50 प्रतिशत तक स्कॉलरशिप दी जा रही है। सामाजिक सारोकार के तहत चुनिंदा बच्चों को फ्री में रहने, खाने और पढ़ाने की सुविधा भी दी जा रही है। कोचिंग इंस्टीट्यूट्स में कोर्स के हिसाब से अलग-अलग फीस है, जो 80 हजार से लेकर 1.50 लाख रुपए तक है। सामान्यत: बड़े कोचिंग इंस्टीट्यूट में NEET स्टूडेंट्स से एक लाख 35 हजार और IIT की तैयारी करवाने के लिए डेढ़ लाख की फीस ली जा रही है। तीन साल पहले 15 हजार में भी नहीं मिलते थे कमरे
कोटा में 3 साल पहले ऐसा समय आया था, जब स्टूडेंट्स को हॉस्टलों में 15 हजार रुपए तक में भी कमरे नहीं मिल रहे थे। अब स्टूडेंटस के लिए हॉस्टल में कमरों के कई विकल्प (ऑपशन) मौजूद हैं। स्टूडेंट अपने बजट के अनुसार कमरा ले सकता है। हॉस्टल एसोसिएशन अध्यक्ष नवीन मित्तल ने बताया कि कोटा में वर्तमान में स्टूडेंट्स के बजट में हॉस्टल में कमरे मिल रहे है। उन्होंने बताया कि कोरोना के बाद स्टूडेंट्स की संख्या काफी बढ़ गई थी। उस समय करीब 1 लाख 90 हजार स्टूडेंट्स कोटा में थे। काफी डिमांड होने की वजह से कई हॉस्टल काफी महंगे हो गए थे। स्टूडेंट्स से 15 हजार रुपए तक वसूले जा रहे थे। अब जब स्टूडेंट्स की संख्या कम हुई है तो उनकी सहूलियत को ध्यान में रखते हुए हॉस्टल संचालकों को कहा गया है कि हॉस्टल में 9 हजार से लेकर 11 हजार रुपए तक किराया ही तय रखें। राजीव गांधी नगर एरिया में कई हॉस्टलों में 3 हजार रुपए तक में कमरा किराए पर लेने के बोर्ड लगे हुए हैं। पहले यहां कमरे के लिए 11 हजार रुपए तक वसूले जाते थे। हॉस्टल्स में बायोमीट्रिक अटेंडेंस, सुरक्षा का पूरा ध्यान
हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल बताते हैं- बच्चों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। ज्यादातर हॉस्टल्स में बायोमीट्रिक अटेडेंस सिस्टम है। यहां हॉस्टल में आने और जाने का समय रिकॉर्ड रहता है। इसके अलावा इसकी सूचना बच्चों के माता-पिता को भी दी जाती है। कमरों में एंटी हैंगिग डिवाइस पहले से ही इंस्टॉल है। रात 10 बजे बाद बच्चों को बाहर जाने की अनुमति नहीं रहती है। हर स्टूडेंटस से वार्डन रोज संपर्क करते हैं। कॉशन (सिक्योरिटी) मनी लेना बंद कर दिया गया है। मेस में मेन्यू के आधार पर कीमत
कोटा में हॉस्टल मेस के अलावा ओपन मेस भी चलते हैं। इनमें 3 हजार से 3500 रुपए तक में बच्चों को आसानी से खाना मिल रहा है। मेस की रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मेन्यू के आधार पर अलग-अलग मेस का अलग-अलग रेट है। बच्चे मेस में आकर खाना खा सकते हैं या उनके पीजी रूम तक मेस की तरफ से टिफिन भिजवाया जाता है। बच्चों के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन कोचिंग स्टूडेंट्स के लिए ASWS (ऑल स्टूडेंटस वेलफेयर सोसायटी) भी काम कर रही है, जिसमें कोचिंग संस्थानों के मेंटर्स काम करते है। जैसे- एमपी–हरियाणा से आए स्टूडेंट्स
कोटा में पिछले एक साल से NEET की तैयारी कर रहे हरियाणा के हर्ष मलिक ने अपने छोटे भाई रक्षित को भी कोचिंग के लिए कोटा बुलाया है। हर्ष ने बताया यहां पर फैकल्टी दूसरी जगह से काफी अच्छी है। टीचर्स का सपोर्ट रहता है ताकि बच्चा अपना बेस्ट दे सके। हरियाणा में इतनी अच्छी व्यवस्था नहीं है, जितनी यहां है। निगेटिव बातों को लेकर हर्ष ने कहा- ऐसी बात तब आती है, जब स्टूडेंट अपना 100 फीसदी नहीं दे रहा होता है। रीवा (मध्य प्रदेश) के नमन ने भी इसी साल कोटा में एडमिशन लिया है। उसके साथ दोस्त श्रीकांत भी कोटा पहली बार आया है। नमन ने बताया कि कोटा का रिव्यू बहुत अच्छा है। यहां पढ़ाई का माहौल है। यहां हॉस्टल के ऑप्शन हैं और खाने की भी कोई दिक्कत नहीं है। एक स्टूडेंट साल में साढ़े 3 से 4 लाख रुपए खर्च करता है। पेरेंट्स बोले– कोटा में अच्छा माहौल, रिजल्ट बेहतर
प्रतापगढ़ (यूपी) से आए राजेंद्र सरकारी टीचर हैं। उन्होंने बताया कि जेईई की तैयारी के लिए बेटे का एडमिशन करवाने कोटा आए हैं। हमारी तरफ के कई बच्चे कोटा में पढे़ हैं। उन्होंने बेटे को कोटा पढ़ाने की सलाह दी थी। हमने पटना भी जाकर पता किया था, लेकिन वहां वैसा माहौल नहीं था। हनुमानगढ़ से आए नरेश कुमार ने बताया- उनकी बेटी कोलकाता रहती है। वह अपने बच्चे का एडमिशन करवाने के लिए कोटा आई है। उसके साथ कोटा आया हूं। कोटा का ऑल ओवर सिनेरियो बहुत अच्छा है। पिछले सालों के रिजल्ट देखे हैं। उनका आउटपुट देखने के बाद ये निर्णय लिया है।
कोटा में स्टूडेंट्स के लिए हॉस्टल का किराया घटाया:2 से 4 हजार में मिल रहे PG, कोचिंग संस्थान दे रहे 50% तक स्कॉलरशिप
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
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सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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