बोर्ड एग्जाम के समय पिता का हार्ट अटैक से निधन हो गया। एग्जाम देना कैंसिल कर चुका था। लेकिन प्रिंसिपल ने हौंसला दिया। पिता के लिए तैयारी की। अब 97.67% मार्क्स आने पर घर में खुशी आई हैं। एक केस के सिलसिले में पिता से पूछताछ करने कई बार पुलिस वाले घर आते थे। मैं घबरा जाती थी। दादा ने संभाला। अब 99% मार्क्स आए तो सभी की आंखों में खुशियों के आंसू आ गए। यह कहना है उन प्रतिभाओं का, जिन्होंने चुनौतियों का डटकर सामना किया और हार नहीं मानी। मुश्किल से लड़कर खुद को निखारा और सफलता की कहानी लिख दी। बाड़मेर के गुड़ामालानी के रहने वाले भावेश गोदारा के बोर्ड एग्जाम चल रहे थे। इस बीच पिता बाबूलाल गोदारा को हार्ट अटैक आया और उनका निधन हो गया। भावेश ने कदम पीछे नहीं खींचे और 97.67% मार्क्स हासिल किए। जालोर की चंद्रिका विश्नोई के पिता की पुलिस केस के सिलसिले में जांच चल रही है। पुलिस वाले घर आते तो डिस्टर्ब हो जाती। लेकिन पिता का सपना पूरा करने की ठानी और 99 प्रतिशत मार्क्स हासिल किए। हिंडौन सिटी (करौली) की रहने वाली खुशबू शर्मा के अर्धवार्षिक एग्जाम (2025) चल रहे थे। इसी दौरान पिता की एक हादसे में मौत हो गई। मां बच्ची की ढाल बनी, जिसके बाद खुशबू 99% मार्क्स लेकर आई। पढ़िए… ऐसे ही होनहारों की कहानी पिता इंजीनियर बनाना चाहते थे, मैं बनकर दिखाऊंगा
गुड़ामालानी (बाड़मेर) के भावेश कहते हैं- 10वीं बोर्ड एग्जाम के दौरान पिता बाबूलाल गोदारा का अचानक हार्ट अटैक से निधन हो गया। उस समय हिंदी, इंग्लिश और सामाजिक विज्ञान के पेपर हो चुके थे। गणित, विज्ञान और संस्कृत के एग्जाम बाकी थे। घर में मातम था। हम सभी की आंखों में आंसू थे। मेरे स्कूल आदर्श विद्या मंदिर तेजियावास के प्रिंसिपल हुकमाराम बैरड़ ने हौसला दिया। इसके बाद मैंने पिता के सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया। पिता के दिए संस्कार, नैतिक मूल्यों के आधार पर मैंने एग्जाम दिए। उन्हें मुझसे उम्मीद थी कि मैं एक सफल इंसान बनूं। बढ़िया नंबर लेकर आऊं। उन्हीं को आदर्श मानते हुए तैयारी की। पिता मुझे इंजीनियर बनाना चाहते थे। अब बोर्ड रिजल्ट में 97.67% मार्क्स आए हैं। हिंदी, इंग्लिश और सामाजिक विज्ञान में 100 में से 100 नंबर हासिल किए हैं। मेरा पिता से वादा है कि मैं उनका सपना जरूर पूरा करूंगा। यही मेरी ओर से पिता को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। अब बनूंगी इसरो वैज्ञानिक
जालोर की चंद्रिका विश्नोई कहती हैं- क्लास 7वीं में पढ़ते-पढ़ते एक किताब लिखी, वह मेरे दसवीं क्लास में आने पर ही पब्लिश हुई है। उसका टाइटल ‘छू ले अब वो नभ, नभ दूर नहीं’। इसमें सोशल मीडिया के कारण राह से भटक रही युवा पीढ़ी को प्रेरणा देने का प्रयास किया था। लेकिन दसवीं में आते ही हालात अचानक से बदले और मैं खुद डिस्टर्ब रहने लगी। एक केस के सिलसिले में पुलिस ने पापा से पूछताछ शुरू कर दी। उन्हें जांच के दायरे में ले लिया। पुलिस वाले बार-बार घर में आते थे और पापा से पूछताछ करते थे। मैं घबरा जाती थी। लेकिन दादा पाबूराम ने मुझे हमेशा सपोर्ट किया। उन्होंने मुझे संभाला। इसके कारण मैंने पूरा ध्यान पढ़ाई पर लगाया। मैं अलग कमरे में रहकर पढ़ाई करने लगी। टाइम टेबल के अनुसार, रोजाना 2 से 4 घंटे तक का शेड्यूल बनाया। मेरा लक्ष्य था कि परिवार और जिले का नाम रोशन करूं। टीचर्स ने भी इसे समझा और सपोर्ट किया। मेहनत में कोई कमी नहीं छोड़ी, इसी कारण दसवीं बोर्ड रिजल्ट में 99 प्रतिशत मार्क्स आए। मेरा सपना है पायलट या इसरो वैज्ञानिक बनूं, इसके लिए पूरी मेहनत करूंगी। मेरे 99% मार्क्स ही मेरी तरफ से पिता को श्रद्धांजलि
हिंडौन सिटी (करौली) की रहने वाली खुशबू कहती हैं- 27 नवंबर 2025 को दिल्ली में रिश्तेदारी में शादी थी। इस दौरान एक हादसा हुआ, जिसमें मेरे पिता एडवोकेट भूपेंद्र शर्मा का निधन हो गया। पिता के गुजर जाने के बाद मानों सबकुछ खत्म हो गया। तब मेरी अर्द्धवार्षिक परीक्षा चल रही थी। तब मां चंद्रमुखी शर्मा ने समझाया कि मैं पढ़ाई कर अच्छे नंबर लाऊं, तो यही पिता को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मैंने मां के इन्हीं शब्दों को जीवन का लक्ष्य बना लिया। इसके बाद हर रोज 5 घंटे पढ़ाई की। सोशल मीडिया से दूरी बना ली। इसी का नतीजा रहा कि दसवीं बोर्ड रिजल्ट में 99% अंक हासिल किए। गणित में 100 और संस्कृत में 99 अंक प्राप्त किए हैं। मेरा लक्ष्य आईआईटी से इंजीनियरिंग करना है, जिससे मैं परिवार और मेरे देश का नाम रोशन कर सकूं। ————- रिजल्ट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… 10वीं में जुड़वा बहनों के 98% नंबर आए:सब्जी बेचने वाले की बेटी के 98.67 प्रतिशत; कोटा में परिणाम देख डांस करने लगे स्टूडेंट राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की ओर से मंगलवार को 10वीं का रिजल्ट जारी कर दिया गया। इस बार परिणाम 94.23 प्रतिशत रहा है। यह पिछले साल से 1.17 प्रतिशत ज्यादा है। पूरी खबर पढ़िए
एग्जाम के बीच पिता चल बसे,फिर भी 99% मार्क्स लाए:परिजनों को खोने के बाद भी नहीं हारी हिम्मत; पढ़िए 10वीं बोर्ड के टॉपर्स के संघर्ष की कहानी
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
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सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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